FSL रिपोर्ट से दोराहा कोऑपरेटिव सोसायटी घोटाले में हुआ बड़ा खुलासा

Edited By Urmila,Updated: 24 Jun, 2026 06:12 PM

major revelation in the doraha cooperative society scam

दोराहा कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी लिमिटेड में सामने आए करोड़ों रुपये के चर्चित घोटाले की जांच में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल), मोहाली की रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं।

दोराहा  (विनायक): दोराहा कोऑपरेटिव मार्केटिंग सोसायटी लिमिटेड में सामने आए करोड़ों रुपये के चर्चित घोटाले की जांच में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल), मोहाली की रिपोर्ट ने कई अहम खुलासे किए हैं। जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि सोसायटी के तत्कालीन मैनेजर साधु सिंह ने कथित तौर पर वित्तीय अनियमितताओं को छिपाने के लिए बैलेंस शीट में छेड़छाड़ की तथा ऑडिट विभाग की इंस्पेक्टर और सोसायटी के एक कर्मचारी के फर्जी हस्ताक्षर एवं जाली मुहरों का इस्तेमाल किया। 

एफएसएल रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने वर्ष 2023 में दर्ज मामले में जालसाजी से संबंधित नई धाराएं जोड़ दी हैं और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विभिन्न स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। पुलिस का मानना है कि करीब एक करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ियों को सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया।

एफएसएल रिपोर्ट के बाद सोसायटी के सेल्समैन जसदेव सिंह भी सामने आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन मैनेजर साधु सिंह ने उनके तथा ऑडिट विभाग की इंस्पेक्टर अदिति के फर्जी हस्ताक्षर और जाली मुहर तैयार कर बैलेंस शीट बनाई थी, जिसका खुलासा बाद में ऑडिट जांच के दौरान हुआ।

Doraha Cooperative Society scam

ऑडिट विभाग की वर्ष 2021-22 की विशेष जांच रिपोर्ट के अनुसार सोसायटी में कुल 1,00,68,081.23 रुपये की वित्तीय अनियमितताएं सामने आई थीं। रिपोर्ट के मुताबिक आरोपी मैनेजर पर 9,13,100 रुपये के प्रत्यक्ष गबन का आरोप है, जबकि सोसायटी फंड की 49,27,514.73 रुपये की राशि के कथित दुरुपयोग की बात भी सामने आई। इसके अलावा रिकॉर्ड और बैलेंस शीट में 42,27,466.50 रुपये का स्पष्ट हिसाब नहीं पाया गया। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि आरोपी ने सोसायटी कार्यालय से दो एयर कंडीशनर और एक अलमारी को सोसायटी के टेंपो में लादकर कथित तौर पर अपने कब्जे में ले लिया। इसके अतिरिक्त सोसायटी की जमीन पर बने मैहता अस्पताल की छत पर पड़ा कीमती लोहे का स्क्रैप भी चोरी कर ले जाने का आरोप लगाया गया है।

बताया जाता है कि साधु सिंह वर्ष 2005 से सोसायटी में मैनेजर के पद पर कार्यरत था और राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित सोसायटी की बहुमूल्य संपत्तियों से करोड़ों रुपये का किराया प्राप्त होता है। पूरा मामला तब उजागर हुआ जब ऑडिट विभाग ने बैलेंस शीट की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान पाया गया कि ग्राहकों से प्राप्त होने वाली वास्तविक राशि 39,93,933.03 रुपये थी, लेकिन रिकॉर्ड में इसे 3,99,393.30 रुपये दर्शाया गया। मात्र दशमलव की स्थिति बदलने से करीब 35.94 लाख रुपये का अंतर सामने आया। इसके बाद जब पूरे रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की गई तो लगभग एक करोड़ रुपये की वित्तीय गड़बड़ियां उजागर हो गईं। सूत्रों के अनुसार अभी करीब डेढ़ वर्ष का ऑडिट शेष है।

दिसंबर 2023 में मामला दर्ज होने के बाद संदिग्ध दस्तावेजों और हस्ताक्षरों को जांच के लिए एफएसएल, पंजाब भेजा गया था। हाल ही में प्राप्त रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी ने ऑडिट विभाग की इंस्पेक्टर अदिति की कथित रूप से जाली सरकारी मुहर तैयार की थी। साथ ही ऑडिट रिपोर्ट को विश्वसनीय दिखाने के लिए इंस्पेक्टर अदिति और सेल्समैन जसदेव सिंह के फर्जी हस्ताक्षरों का भी इस्तेमाल किया गया।

घोटाले और सोसायटी के सामान की चोरी का मामला सामने आने के बाद वर्ष 2023 में दोराहा थाने में साधु सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। गबन और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों के मद्देनजर सहकारिता विभाग ने 20 फरवरी 2026 को साधु सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया। फॉरेंसिक रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद पुलिस ने पुराने मामले में भारतीय दंड संहिता की धाराएं 465, 467, 468 और 471 जोड़ दी हैं, जो जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल से संबंधित हैं।

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