Edited By Vatika,Updated: 01 Jul, 2026 09:17 AM

महानगर के नगर निगम में घोटालों और करप्शन का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है।
लुधियाना, (राज): महानगर के नगर निगम में घोटालों और करप्शन का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। अभी टेंडरों में मोटी कमीशन खोरी के आरोप में सस्पेंड और गिरफ्तार हुए एस.ई. (सुपरिटेंडेंट इंजीनियर) संजय केवर का मामला ठंडा भी नहीं पड़ा था कि निगम के एक और कद्दावर एस.ई. पर करोड़ों रुपए के टेंडर घोटाले के संगीन आरोप लगे हैं। जोन-बी में तैनात एस.ई. प्रवीन सिंगला पर अपने ही सगे-संबंधियों और रिश्तेदारों को बैकडोर से ठेकेदार बनाने और उन्हें मनमर्जी के वर्क ऑर्डर दिलाकर करोड़ों रुपए का हेरफेर करने के आरोप लगे हैं। इस महाघोटाले की बकायदा दस्तावेजी शिकायत मुख्यमंत्री भगवंत मान को भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।
'बाहुबली' अफसर का तिलस्म: 26 साल से एक ही शहर में जमाए बैठे हैं पैर!
संजय गांधी कॉलोनी के रहने वाले शिकायतकर्ता राजिंद्र पाल सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजी लिखित शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एस.ई. प्रवीन सिंगला पिछले 26 सालों से एक ही शहर में टिके हुए हैं और उनका ज्यादातर समय जोन-बी में ही बीता है। आरोप है कि इसके पीछे भारी राजनीतिक संरक्षण है। सरकार चाहे किसी भी पार्टी की आए, सिंगला साहब तुरंत बड़े नेताओं से साठगांठ कर अपनी कुर्सी बचा लेते हैं। रसूख ऐसा है कि कोई बड़ा अधिकारी भी आज तक इनका तबादला नहीं करवा सका, और अगर ट्रांसफर हुआ भी तो राजनीतिक दबाव के चलते वो टिक नहीं पाया।
रिश्तेदार ठेकेदारों का बना रखा है 'गैंग', एस्टीमेट में ही फिक्स हो जाता है खेल
शिकायत में बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए राजिंद्र पाल सिंह कहा गया है कि एस.ई. सिंगला ने निगम के भीतर अपने रिश्तेदारों के साथ मिलकर 'ठेकेदारों का एक गैंग' सक्रिय कर रखा है। जिसमें पहले रिश्तेदारों की फर्जी या चहेती कंपनियां रजिस्टर्ड करवाई जाती हैं। फिर टेंडर जारी होने से पहले एस्टीमेट ही इस चालाकी से तैयार किया जाता है, जिससे उनके रिश्तेदारों की कंपनियों को ही फायदा पहुंचे। फिर दूसरे अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर करोड़ों के भारी-भरकम रेट वाले टेंडर चहेतों की झोली में डाल दिए जाते हैं और बदले में मोटी कमीशन जेबों में जाती है। आरोप है कि इसी कमीशन के पैसे को आगे टेंडरों की 'पूलिंग और कोडिंग' में इन्वेस्ट किया जाता है।
10 साल के रिकॉर्ड की जांच हुई तो नपेंगे SC, बेनामी संपत्तियों का भी होगा खुलासा!
शिकायतकर्ता राजिंद्र पाल सिंह ने अपनी शिकायत में एस.ई. के रिश्तेदारों की कंपनियों के नाम, उन्हें मिले पिछले और मौजूदा टेंडरों की पूरी लिस्ट और करोड़ों के फंड्स का पूरा ब्योरा मुख्यमंत्री को सौंप दिया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि अगर इन कंपनियों के पिछले 10 साल के रिकॉर्ड और बैंक खातों की गहनता से जांच की जाए, तो लुधियाना निगम के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला सामने आएगा। इसके साथ ही उन्होंने जल्द ही एस.ई. की बनाई बेनामी प्रॉपर्टियों का पर्दाफाश करने का भी दावा किया है।
मुझ पर लगे सारे आरोप झूठे और बेबुनियाद, कोई भी रिश्तेदार ठेकेदार नहीं: एस.ई. सिंगला
वहीं दूसरी ओर, इन गंभीर आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए एस.ई. प्रवीन सिंगला ने इन्हें सिरे से खारिज कर दिया है। सिंगला का कहना है कि कुछ लोग निजी खुंदक और राजनीति से प्रेरित होकर झूठ फैला रहे हैं और सरकार को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि उनका कोई भी रिश्तेदार निगम में ठेकेदार नहीं है। टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होती है और फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट के पास रजिस्टर्ड ठेकेदार ही एस्टीमेट प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। दस्तावेजों की पूरी स्क्रूटनी (जांच) के बाद ही अलॉटमेंट होती है, इसलिए हेरफेर या गड़बड़ी की कोई संभावना ही नहीं है।
सियासी रंजिश या हकीकत? चर्चाओं का बाजार गर्म :
बता दें कि कुछ दिन पहले ही एस.ई. प्रवीन सिंगला और अकाली दल के पार्षद चतरवीर सिंह उर्फ कमल अरोड़ा के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद पार्षद पर मामला भी दर्ज हुआ था। निगम के गलियारों में चर्चा है कि यह शिकायत उसी विवाद की अगली कड़ी या राजनीतिक रंजिश का हिस्सा भी हो सकती है। बहरहाल, शिकायत अब मुख्यमंत्री दरबार में है, अब देखना यह होगा कि विजिलेंस इस पर क्या एक्शन लेती है!