Edited By Kamini,Updated: 19 Mar, 2026 06:20 PM

पंजाब के प्रमुख सरकारी संस्थानों में मातृभाषा पंजाबी के अस्तित्व को कथित तौर पर मिटाने की कोशिशें लगातार जारी हैं।
संगरूर (सिंगला): पंजाब के प्रमुख सरकारी संस्थानों में मातृभाषा पंजाबी के अस्तित्व को कथित तौर पर मिटाने की कोशिशें लगातार जारी हैं। समाजसेवी और मातृभाषा प्रेमी रामेश्वर सिंह ने बताया कि वे बिजली के बिलों को पंजाबी में लागू करवाने के लिए पहले ही माननीय पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुके हैं। उन्होंने कहा कि अदालती आदेशों के बावजूद पावरकॉम का यह अड़ियल रवैया 'पंजाब राज्य भाषा संशोधन बिल 2008' का सीधा उल्लंघन है।
रामेश्वर सिंह ने बताया कि पहले उनकी कानूनी कार्रवाई और मीडिया के सहयोग से बिल पंजाबी में आने शुरू हो गए थे, लेकिन कुछ महीनों बाद दोबारा कई बिल अंग्रेजी में आने लगे। जब यह मामला दोबारा हाईकोर्ट ले जाया गया, तो पावरकॉम ने अपने कर्मचारियों पर कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।
रामेश्वर सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि पावरकॉम की कागजी कार्रवाई, शिकायतों के जवाब, व्हाट्सएप हैल्पलाइन और ईमेल का प्रत्युत्तर भी अंग्रेजी में ही दिया जाता है। चूंकि बहुत कम शिकायतकर्त्ता अंग्रेजी जानते हैं, इसलिए उन्हें कुछ समझ नहीं आता। भाषा विभाग पंजाब ने इस संबंध में रामेश्वर सिंह को ईमेल के जरिए सूचित किया था कि जिला भाषा अधिकारी पटियाला कानून की धारा 8 के तहत पावरकॉम के कार्यों का निरीक्षण करेंगे, लेकिन इसके बावजूद उनके और उनके पड़ोसियों के बिल फिर से अंग्रेजी में आए हैं।
उन्होंने 19 फरवरी 2026 को भाषा विभाग को सबूतों के साथ पत्र भेजा, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री और पावरकॉम सचिव को भी कई पत्र लिखे, जिनका कोई उत्तर नहीं आया। रामेश्वर सिंह ने मांग की है कि भाषा अधिनियम का उल्लंघन करने वाले सभी अंग्रेजी पत्रों को तुरंत वापस लेकर पंजाबी में जारी किया जाए और अंग्रेजी में आए बिलों को नियमानुसार पंजाबी में दोबारा भेजा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो वे एक बार फिर माननीय हाईकोर्ट की शरण लेंगे।
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