Edited By Kalash,Updated: 26 Oct, 2026 11:24 AM

धान की पराली को जलाने से रोकने के लिए अलग-अलग विभागों के जरिए जागरूकता अभियान चलाए गए और संवेदनशील इलाकों में खेतीबाड़ी विभाग की वैन्स की तरफ से भी चक्कर लगाए गए लेकिन अमृतसर जिला इस बार भी पराली के प्रबंधन में फेल नजर आ रहा है।
अमृतसर (नीरज): हर वर्ष की तरह इस बार भी जिला प्रशासन की तरफ से धान की पराली को जलाने से रोकने के लिए अलग-अलग विभागों के जरिए जागरूकता अभियान चलाए गए और संवेदनशील इलाकों में खेतीबाड़ी विभाग की वैन्स की तरफ से भी चक्कर लगाए गए लेकिन अमृतसर जिला इस बार भी पराली के प्रबंधन में फेल नजर आ रहा है। आलम यह है कि पिछले तीन सप्ताह के दौरान अमृतसर में पराली जलाने के 144 मामले सामने आ चुके हैं, 27 किसानों पर एफ.आई.आर. दर्ज हो चुकी है और 56 से ज्यादा किसानों की जमीन की रैड एंट्री तक हो चुकी है लेकिन पराली का जलना बादस्तूर जारी है। अमृतसर जिला इस समय पंजाब में दूसरे नंबर पर आ चुका है जबकि 271 मामलों के साथ तरनतारन जिला इस समय पहले नंबर पर आ गया है। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पराली प्रबंधन चर्चा का विषय बना हुआ है।
ईंट-भट्ठों में 30 प्रतिशत काम पराली से निपटाया जाए
केन्द्र सरकार के एक फरमान के अनुसार इस बार ईंट-भट्ठों में ईटें बनाने के काम में 30 प्रतिशत धान की पराली को जलाने के लिए कहा गया है और पराली की गांठों का प्रयोग करने के लिए अपील की जा रही है लेकिन इसके लिए प्रशासन की तरफ से कोई पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं जहां से ईंट-भट्ठा मालिक पराली की गांठें खरीद सकें। इतना ही नहीं इसमें भी भट्ठा मालिकों का तर्क है कि पराली की आग ईंटें बनाने के लिए प्रयोग करने पर सही परिणाम नहीं देती है जितना कि कोयले का प्रयोग करने से परिणाम मिलता है। ईंट-भट्ठा मालिकों का कहना है कि प्रशासन की तरफ से पराली की गांठों की उपलब्धता ही नहीं करवाई गई है। ऐसे में भट्ठों में पराली का प्रयोग कहां से करें और कैसे करें प्रशासन सिर्फ औपचारिकता पूरी कर रहा है।
5 हजार एकड़ जमीन की पराली जलने से बचाई, गांठों को आग लगी पर प्रशासन ने नहीं दिया एक आना
पराली प्रबंधन में प्रशासन की लापरवाही का इससे बड़ा सबूत और क्या हो सकता है कि अमृतसर जिले का एक किसान गुरप्रीत सिंह निवासी गांव सौहियां कलां ने प्रशासनिक अधिकारियों जिसमें मुख्य रूप से पूर्व डी.सी. साक्षी साहनी व अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के प्रयासों से उत्साहित होकर न सिर्फ खुद पराली न जलाने का फैसला लिया बल्कि पूरे मजीठा हलके में 5 हजार एकड़ से ज्यादा जमीन की पराली को नहीं जलने दिया। बेलर व अन्य मशीनरी की मदद से किसानों के खेतों से पराली की गांठें बनाईं लेकिन बदकिस्मती से गांठों वाले स्थान पर शार्ट सर्किट से आग लग गई। किसान का लगभग 3 करोड़ का नुकसान हो गया लेकिन अभी तक जिला प्रशासन या किसी अन्य विभाग की तरफ से किसी ने भी किसान की मदद के लिए हाथ नहीं पकड़ा है।
2024 में 725 तो वर्ष 2025 में सिर्फ 315 पराली जलाने के मामले
गुरप्रीत जैसे किसानों की मेहनत के कारण ही अमृतसर जिले में पिछले 2 वर्षों की तुलना में पराली जलाने के मामले 55 प्रतिशत तक कम हुए हैं लेकिन जिस प्रकार का रवैया गुरप्रीत के साथ प्रशासन अपना रहा है उससे अन्य किसानों का हौसला भी पस्त होना तय है। आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2023 में 15 सितम्बर से लेकर 23 नवम्बर तक अमृतसर में 1572 पराली जलाने के मामले थे जो वर्ष 2024 के दौरान 725 तक आ गए और वर्ष 2025 में 315 पराली जलाने के मामले अमृतसर में दर्ज किए गए और इस वर्ष भी पराली जलाने के मामले लगातार जारी हैं। मामले कम जरूर हुए हैं लेकिन इसका स्थायी समाधान औपचारिकता पर है।
रात को एक माचिस की तीली कर देती है पराली का काम तमाम
पराली की बात करें तो ज्यादातर किसान रात के समय एक माचिस की तीली फैंककर पराली का काम तमाम कर देते हैं जबकि पराली को खेतों में मिलाने के लिए प्रति एकड़ तीन हजार के लगभग खर्च आता है जो हर किसान के वश की बात नहीं है।
कई गुना महंगे दाम पर मिल रही हैं पराली की गांठें
द अमृतसर ब्रिक्स क्लिन एसोसिएशन के प्रधान मुकेश नन्दा ने बताया कि भट्ठा मालिक पराली का प्रयोग करने के लिए भी तैयार हैं लेकिन हमें गांठें ही नहीं मिल रही हैं। खुली पराली जो कि एक से दो रुपए के बीच चाहिए वह गांठों के रूप में 8 रुपए के हिसाब से मिल रही है। पराली प्रबंधन के पुख्ता प्रबंध आज भी नहीं हैं।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here