पंजाब में कोचिंग सैंटर चलाने वाले संचालकों को झटका, 3 महीने का अल्टीमेटम... जारी हुए नए आदेश

Edited By Urmila,Updated: 23 Jun, 2026 11:00 AM

setback for coaching center operators in punjab

पंजाब में मोटी फीस वसूल कर मनमाने ढंग से चल रहे प्राइवेट कोचिंग सैंटरों की मनमानी और विद्यार्थियों की सुरक्षा से हो रहे खिलवाड़ पर अब पंजाब सरकार सख्त शिकंजा कसने जा रही है।

लुधियाना (विक्की): पंजाब में मोटी फीस वसूल कर मनमाने ढंग से चल रहे प्राइवेट कोचिंग सैंटरों की मनमानी और विद्यार्थियों की सुरक्षा से हो रहे खिलवाड़ पर अब पंजाब सरकार सख्त शिकंजा कसने जा रही है। लंबे समय से बिना किसी जवाबदेही के चल रहे इन कोचिंग सैंटरों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने एक बेहद सख्त ड्राफ्ट तैयार किया है जिसका नाम 'रजिस्ट्रेशन व विद्यार्थी सुरक्षा नियमों के लिए प्राइवेट कोचिंग सैंटर पंजाब-2026' रखा गया है।

नए नियमों के दायरे में 50 से अधिक विद्यार्थियों वाले वे सभी कोचिंग सैंटर आएंगे जो अब तक बिना किसी रजिस्ट्रेशन के धड़ल्ले से अपनी दुकानें चला रहे थे। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी कोचिंग सैंटर बिना सरकारी रजिस्ट्रेशन के नहीं चल पाएगा। वर्तमान में चल रहे सैंटरों को भी केवल 3 महीने के भीतर रजिस्ट्रेशन करवाने का अल्टीमेटम दिया गया है, ऐसा न करने पर उन्हें बंद कर दिया जाएगा।

मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ बंद, 16 साल से कम उम्र के बच्चों के दाखिले पर पूरी तरह रोक

पैसों की खातिर छोटी उम्र के बच्चों को भारी मानसिक तनाव में धकेलने वाले कोचिंग सैंटरों की मनमानी पर रोक लगाते हुए सरकार ने साफ कहा है कि वे 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को दाखिला नहीं दे सकेंगे। विद्यार्थी केवल 10वीं की परीक्षा पास करने के बाद ही कोचिंग सैंटर जा पाएंगे। इसके साथ ही स्कूलों को बंक करवाकर सुबह के समय क्लास लगाने वाले सैंटरों पर भी रोक लगा दी गई है। अब कोचिंग सैंटर स्कूल के समय में बिल्कुल नहीं खुल सकेंगे। विद्यार्थियों और अध्यापकों का शोषण रोकने के लिए रोजाना केवल 5 घंटे ही सैंटर चलाने की अनुमति होगी और हफ्ते में एक दिन की अनिवार्य छुट्टी देनी होगी, जिससे कोचिंग सेंटरों की मनमर्जी पर पूरी तरह लगाम लगेगी।

बिना योग्यता वाले अध्यापकों और भ्रामक विज्ञापनों के जाल पर कड़ा प्रहार

अक्सर देखा गया है कि कोचिंग सैंटर कम सैलरी पर बिना योग्यता वाले लोगों को रखकर विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ करते हैं। अब इस पर रोक लगाने के लिए अध्यापकों की न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ग्रेजुएट तय की गई है। किसी भी दोषी या दागी व्यक्ति को अध्यापक रखने पर पूरी तरह पाबंदी होगी। इसके अलावा, अखबारों और होर्डिंग्स पर टॉप रैंक दिलाने और अच्छे नंबरों की गारंटी देने वाले कोचिंग सैंटरों के झूठे और भ्रामक विज्ञापनों के जाल को भी सरकार ने ध्वस्त कर दिया है। अब कोई भी सैंटर ऐसे झूठे वादे नहीं कर सकेगा। उन्हें अपनी वैबसाइट पर अध्यापकों की योग्यता, फीस, कोर्स और रिफंड पॉलिसी की पूरी सच्चाई सार्वजनिक करनी होगी, ताकि वे विद्यार्थियों और अभिभावकों को गुमराह न कर सकें।

नियम तोड़े तो लगेगा भारी जुर्माना, रद्द होगी रजिस्ट्रेशन

अब तक अपनी मर्जी से सैंटर चलाने वाले संचालकों को झटका देते हुए सरकार ने नियम तय किया है कि कोचिंग सैंटरों को केवल 3 साल के लिए ही एन.ओ.सी. दी जाएगी जिसे समय खत्म होने से 2 महीने पहले रिन्यू करवाना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले और विद्यार्थियों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले कोचिंग सैंटरों पर पहली बार में 25 हजार रुपए और दूसरी बार में 1 लाख रुपए का भारी जुर्माना ठोका जाएगा। इसके बाद भी सुधार न होने पर उनकी रजिस्ट्रेशन हमेशा के लिए रद्द कर दी जाएगी।

सुरक्षा मानकों में लापरवाही और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सख्ती

शहर के कई कोचिंग सैंटर बिना फायर सेफ्टी और बिल्डिंग सेफ्टी के तंग कमरों में चल रहे हैं, जिससे हर समय बड़ा हादसा होने का डर बना रहता है। अब सरकार ने साफ किया है कि बिल्डिंग और फायर सेफ्टी की एन.ओ.सी. के बिना एक भी सैंटर नहीं चलेगा। क्लासरूम में क्षमता से अधिक बच्चों को ठूंसने वाले सैंटरों को अब हर विद्यार्थी के लिए पर्याप्त जगह देनी होगी। बच्चों को डिप्रेशन और मानसिक तनाव से बचाने के लिए सैंटरों में पेशेवर काऊंसलर रखना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही साफ टॉयलैट, पीने के पानी और फर्स्ट एड जैसी जरूरी बुनियादी सुविधाएं न देने वाले सैंटरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

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