Edited By Urmila,Updated: 08 Jul, 2026 10:23 AM

जिला बरनाला के विधानसभा क्षेत्र बरनाला के गांव खुड्डी कलां के मौजूदा सरपंच सिमरजीत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है।
बरनाला (पुनीत) : जिला बरनाला के विधानसभा क्षेत्र बरनाला के गांव खुड्डी कलां के मौजूदा सरपंच सिमरजीत सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। सस्पेंड करने की यह कार्रवाई जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (DDPO) बरनाला के आदेशों के तहत की गई है। यह कार्रवाई गांव खुड्डी कलां के निवासी सतनाम सिंह पुत्र सरबजीत सिंह से मिली एक शिकायत के आधार पर अमल में लाई गई है।
इस मामले के संबंध में शिकायतकर्ता सतनाम सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि वह पंजाब सरकार का धन्यवाद करते हैं, जिनके द्वारा पंचायती जमीनों से अवैध कब्जे हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारे गांव का सरपंच काफी लंबे समय से अवैध जमीन पर खेती कर रहा था और धक्केशाही (जबरदस्ती) कर रहा था। संबंधित विभाग द्वारा इस अवैध कब्जे को हटाया गया है। इसके अलावा कोटला-लसाड़ा ड्रेन के पास भी करीब एक किले के आसपास जमीन इसमें से निकली है। उन्होंने प्रशासन तक पहुंच की और प्रशासन के ध्यान में लाए कि यह व्यक्ति उनके साथ सरेआम धक्केशाही कर रहा था। पहले भी यह हमें खेत का रास्ता नहीं देता था और सरकारी रास्ते को बंद कर देता था, जिससे उन्हें काफी परेशानियां होती थीं। इसीलिए संबंधित विभाग को कानूनी दस्तावेजों के साथ शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद वह संबंधित विभाग की कार्रवाई से पूरी तरह संतुष्ट हैं कि बिल्कुल सही काम हुआ है। उन्होंने पंजाब सरकार का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हुए कहा कि पंचायती जमीनों पर किए गए अवैध कब्जों को छुड़ाना एक बहुत ही सराहनीय प्रयास है। इससे पूरे पंजाब का सिस्टम बेहतर होगा और वहां अच्छे पेड़-पौधे लगाए जा सकेंगे।
इस मौके पर संबंधित विभाग के अधिकारी, सीनियर सहायक डी.ए. मनप्रीत सिंह देओल ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी की ओर से आदेश जारी हुए थे। जिसके तहत 13-06-26 को राजस्व विभाग, कानूनगो और प्रशासन की मौजूदगी में एक निशानदेही की गई थी। निशानदेही में मौजूदा सरपंच सिमरजीत सिंह 5 कनाल 0 मरला जमीन पर काबिज पाया गया था जिसके आधार पर बी.डी.पी.ओ. (BDPO) बरनाला से मिली एक रिपोर्ट के अनुसार सरपंच के अवैध कब्जे के आधार पर कार्रवाई की गई है। सरपंच के खिलाफ अवैध कब्जे को लेकर गांव के सतनाम सिंह द्वारा शिकायत भी मिली थी। अवैध कब्जा करने के आधार पर ही यह कार्रवाई की गई है और सरपंच को सस्पेंड कर दिया गया है। सीनियर सहायक मनप्रीत सिंह देओल ने कहा कि सरपंच की जगह पर कानून के अनुसार एक हफ्ते के भीतर बी.डी.पी.ओ. द्वारा पंचों के साथ बैठक करने के बाद, पंचों में से ही किसी अधिकृत पंच को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। यदि कोई सहमति नहीं बनती है, तो विकास कार्यों के लिए प्रशासक (एडमिनिस्ट्रेटर) नियुक्त किया जाएगा।
दूसरी ओर, इस मामले को लेकर गांव के मौजूदा सस्पेंड हुए सरपंच सिमरजीत सिंह ने संबंधित विभाग पर राजनीतिक दबाव में आकर उन्हें सस्पेंड करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक तौर पर उनके सरपंच बनने के समय से लेकर अब तक उनके साथ सरेआम धक्केशाही की जा रही थी। पहले सरपंच चुनाव में भी उनके साथ धक्का हुआ और अब जानबूझकर झूठी दफ्तरी कार्रवाई के तहत उन्हें सस्पेंड किया गया है। उन्होंने कहा कि गांव में कुल 9 पंचायत सदस्य हैं, जिनमें से 8 पंचायत सदस्य उनके पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके नाम पर कोई भी पंचायती जमीन नहीं है और न ही उन्होंने कोई अवैध कब्जा किया है, बल्कि सब कुछ राजनीतिक दबाव में किया गया है।
सस्पेंड हुए सरपंच सिमरजीत सिंह ने कहा कि ब्लॉक समिति चुनावों और सरपंच चुनावों में उनके उम्मीदवार जीत गए थे, जिसके परिणामस्वरूप यह सब राजनीतिक दबाव में किया जा रहा है। सस्पेंड हुए सरपंच ने कहा कि संबंधित विभाग द्वारा निशानदेही के समय किसी भी पंचायत सदस्य या सरपंच को मौके पर नहीं बुलाया गया और न ही कोई नोटिस दिया गया। उन्होंने पुख्ता तौर पर दावा किया कि उनकी ओर से किसी भी पंचायती जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया गया है। 1959 में उनके बुजुर्गों की एक जमीन का तबादला (बटांदरा) हुआ था। शिकायतकर्ता द्वारा 25-30 साल से कब्जे की बात कही गई है, लेकिन उस समय उनकी उम्र महज पांच साल थी। वह किस तरह जमीन पर कब्जा कर सकते हैं? सस्पेंड सरपंच सिमरजीत सिंह ने दावा किया कि उनके हक में गांव के 8 पंचायत सदस्य आए हैं, जिन्होंने इस विभागीय कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से सस्पेंड किया गया है, लेकिन वह अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए माननीय हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर 'बाय नेम' (नामजद करके) जाएंगे। उन्होंने कहा कि गांव के विकास कार्यों के लिए गांव के लोगों ने उन्हें सरपंच के रूप में जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन राजनीतिक दबाव में की गई ऐसी कार्रवाई गांव के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करती है।
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