चंडीगढ़-अमृतसर जाने वालों की बढ़ी परेशानी, 180 करोड़ खर्च करने के बाद भी हादसों का डर

Edited By Urmila,Updated: 24 Oct, 2026 02:02 PM

risk of accidents on rupnagar bypass

चंडीगढ़ से अमृतसर जाने वाला रास्ता रूपनगर से होकर गुजरता है। इस रास्ते के बीच में 7 किलोमीटर लंबा 'रूपनगर बाईपास' आता है।

रूपनगर (विजय): चंडीगढ़ से अमृतसर जाने वाला रास्ता रूपनगर से होकर गुजरता है। इस रास्ते के बीच में 7 किलोमीटर लंबा 'रूपनगर बाईपास' आता है। यह बाईपास किसी टोल प्लाजा कंपनी के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, बल्कि इसके रखरखाव की जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग की है। अन्य सड़कों की तरह, बी.एंड आर विभाग को इसे भी सुंदर और आवाजाही के लायक बनाए रखना चाहिए। लेकिन, इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि चंडीगढ़ से अमृतसर जाने वाले लोगों का पूरा सफर खराब हो जाता है।

Rupnagar Bypass

इस 7 किलोमीटर के हिस्से में लगभग 170 बड़े गड्ढे हैं, जिनमें अक्सर गाड़ियों के टायर कट जाते हैं, रिम टूट जाते हैं और आए दिन हादसे होते रहते हैं। 'हलका सुधार कमेटी' की टीम का कहना है कि इस 7 किलोमीटर के रास्ते पर बड़े खंभों के साथ 412 लाइटें लगाई गई थीं, लेकिन इनमें से कई खंभे टूटकर गिर चुके हैं। अब केवल 58 लाइटें ही काम कर रही हैं और यह संख्या भी दिन-ब-दिन कम होती जा रही है। यह भी देखा गया है कि सड़क के दोनों किनारों का इस्तेमाल कचरा फेंकने की जगह (कूड़े के ढेर) के रूप में किया जा रहा है। इस बाईपास के बीच में लगा आधारशिला (फाऊंडेशन स्टोन) झाड़ियों में छिप गया है। गौरतलब है कि 180 करोड़ रुपए की लागत से बने इस बाईपास का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने 2 अक्तूबर 2015 को किया था।

'हलका सुधार कमेटी' के महासचिव, रणजीत सिंह पतियालां ने बताया कि करीब 2 साल पहले इस बाईपास को सुंदर बनाने के लिए सजावटी पौधे लगाए गए थे, लेकिन अब वे सभी सूख रहे हैं। इस बाईपास के दोनों तरफ, बिना किसी अनुमति के हाईवे को कट लगाए गए, जिसकी वजह से लोग यहां से यू-टर्न लेते हैं। लेकिन, यहां कोई लाइट या संकेत न होने के कारण, कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। 'हलका सुधार कमेटी' ने प्रशासन को सूचित करते हुए कहा है कि इस बाईपास के मामले पर तुरंत ध्यान दिया जाए और यहां बनाए गए अनधिकृत कटों को तुरंत बंद किया जाए, ताकि हादसों का डर खत्म हो सके।

इस मौके पर 'हलका सुधार कमेटी' के अध्यक्ष निर्मल सिंह लोदीमाजरा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष ज्ञान सिंह घनोली, रणजीत सिंह पतियालां, मास्टर अवतार सिंह लोदीमाजरा, मास्टर जगतार सिंह, हरदेव सिंह पटियालन और अन्य सभी सदस्य मौजूद थे।

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