पंजाब के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत! सेवाएं नियमित करने पर हाईकोर्ट का आया फैसला

Edited By Vatika,Updated: 14 Apr, 2026 09:57 AM

punjab highcourt order

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी विभाग

चंडीगढ़: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी विभाग में जूनियर कर्मचारियों को नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) का लाभ दिया गया है, तो समान परिस्थितियों में काम कर रहे सीनियर कर्मचारियों को इससे वंचित नहीं किया जा सकता। इस फैसले से पंजाब के कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है।

अदालत ने PRTCको दिए ये निर्देश
अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए पंजाब रोडवेज ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (PRTC) को गुरमेल सिंह नामक कर्मचारी की सेवा नियमित करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील विकास चतरथ ने PRTC पर आरोप लगाया कि वह नियमों की अनदेखी करते हुए नियमितीकरण का लाभ नहीं दे रही। जस्टिस हरप्रीत सिंह बराड़ की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए 19 मई 2004 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत याचिकाकर्ता को नियमितीकरण से वंचित किया गया था। अदालत ने निर्देश दिया कि गुरमेल सिंह की सेवा उसी तारीख से नियमित की जाए, जिस दिन उसके जूनियर कर्मचारियों को यह लाभ दिया गया था।

एरियर राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेवा कानून का मूल सिद्धांत यह है कि समान परिस्थितियों में कार्यरत सभी कर्मचारियों के साथ समान व्यवहार किया जाना चाहिए। यदि किसी जूनियर को नियमित किया गया है, तो सीनियर को इससे वंचित रखना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना जाएगा। फैसले में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता ने लगभग 21 वर्षों तक सेवा दी, इसके बावजूद अधिकारियों ने उसके नियमितीकरण के मामले में लापरवाही बरती। अदालत ने अपने पूर्व के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब एक कर्मचारी को राहत मिल जाती है, तो समान परिस्थितियों वाले अन्य कर्मचारियों को भी बिना अदालत का दरवाजा खटखटाए वही लाभ दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने PRTC को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को नियमित करने के साथ-साथ उसे सभी संबंधित लाभ भी दिए जाएं, जिनमें वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, एरियर और पेंशन से जुड़े लाभ शामिल हैं। इसके अलावा, एरियर राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी आदेश दिया गया है। अदालत ने यह पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।

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