एक बार फिर बड़े विवादों में पावरकॉम, कर्मचारियों में मची हाहाकार

Edited By Kalash,Updated: 18 May, 2026 04:05 PM

powercom employees

पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की मैनेजमैंट एक बार फिर बड़े विवादों में आ गई है।

पटियाला/सनौर (मनदीप जोसन): पंजाब राज्य पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड की मैनेजमैंट एक बार फिर बड़े विवादों में आ गई है। पहले ही घोटाले के कारण बिजली मंत्री ई.डी. के शिकंजे में हैं और पावरकॉम के चेयरमैन को ई.डी. का नोटिस मिल चुका है। अब मैनेजमैंट द्वारा अपने कर्मचारियों पर जबरन थोपे जा रहे महंगे स्मार्ट फोनों के कारण हजारों बिजली कर्मचारियों में हाहाकार मच गई है कि आखिर छोटे कर्मचारियों पर ये महंगे फोन क्यों थोपे जा रहे हैं। मौजूदा दौर में हर छोटे से छोटे कर्मचारी के पास भी अपना निजी फोन होता है और इस फोन को भी बिजली बोर्ड के ऑनलाइन सिस्टम से जोड़ा जा सकता है। आज के समय में मोबाइल के माध्यम से हर व्यक्ति पूरी दुनिया से जुड़ा होता है। इस मोबाइल खरीद घोटाले में करोड़ों रुपए इधर से उधर होने का मामला भी सामने आने की संभावना है। 

अधिकारियों का कहना है कि यह स्मार्ट फोन तकनीकी कर्मचारियों को ऑनलाइन शिकायतों को क्लोज करने के मुख्य उद्देश्य से दिया जा रहा है, जबकि सभी यूनियनों द्वारा इसका जोरदार विरोध किया जा रहा है क्योंकि यह कदम कर्मचारियों के निजता के अधिकार पर हमला है। इस फोन का पूरा कंट्रोल विभाग के आई.टी. विंग के पास होगा। प्रत्येक कर्मचारी की लोकेशन और हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी। इस फोन के माध्यम से हर कर्मचारी अपने किए जा रहे कार्य के प्रति जवाबदेह होगा और उसे हर शिकायत को बंद करने के लिए इस फोन में स्थापित एप के जरिए ही कार्य करना पड़ेगा। इस फोन में विभाग के सिस्टम के अलावा और कुछ भी नहीं चल सकेगा।

सूत्रों के अनुसार यह सैमसंग कंपनी की ए सीरीज का 07 नंबर फोन है, जिसे विभाग ने प्रति फोन 21 हजार रुपए में खरीदा है और कर्मचारियों तथा यूनियनों की मांग के बिना जबरन पूरे पंजाब के कर्मचारियों, सभी सहायक लाइनमैन और लाइनमैन ग्रिड कर्मचारियों को यह फोन बहुत तेजी से युद्ध स्तर पर वितरित किया जा रहा है। यूनियनों के नेताओं ने आशंका जताई कि इस फोन खरीद मामले में कई करोड़ रुपए का घोटाला होने की पूरी संभावना है क्योंकि विभाग हमारी जायज मांगों को विभाग की वित्तीय स्थिति का हवाला देकर हमेशा टालता रहा है। पिछली 30 अप्रैल को मैनेजमैंट के साथ बैठक में बनी सहमतियों को लागू न करने के कारण वे फिर से संघर्ष की राह पर जा रहे हैं। ऐसे माहौल में बिना मांगे करोड़ों के स्मार्ट फोन छोटे कर्मचारियों को देना कई सवाल खड़े करता है।

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