PSPCL के 1000 पावर क्वालिटी मीटरों का टैंडर विवादों में, करोड़ों के घोटाले की आशंका

Edited By Sunita sarangal,Updated: 17 May, 2026 08:47 AM

pspcl power quality meters tender arises questions

इस संबंध में मैस एनर्जी इलैक्ट्रिकल पंचकूला द्वारा बाकायदा सी.एम.डी. को पत्र देकर साक्ष्यों सहित शिकायत भी दी गई है।

पटियाला(बलजिन्द्र, परमीत): पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन (पी.एस.पी.सी.एल.) द्वारा हाल ही में एक हजार एम.क्यू.पी.-246 पावर क्वालिटी मीटरों के टैंडर पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। यह टैंडर पावरकॉम द्वारा जे.वी. सेल्स एंड सर्विसेज नामक कंपनी को दिया गया है, जिस पर निर्धारित टाइप टैस्ट पास न करने सहित कई तरह के सवाल उठाए गए हैं।

इस संबंध में मैस एनर्जी इलैक्ट्रिकल पंचकूला द्वारा बाकायदा सी.एम.डी. को पत्र देकर साक्ष्यों सहित शिकायत भी दी गई है। शिकायत के अनुसार आई.ई.सी. 61000-4-30 ई.डी. 3.1 के तहत अनिवार्य रूप से आवश्यक ताजा टाइप टैस्ट, जिसमें अंडर/ओवर वोल्टेज डिविएशन टैस्ट भी शामिल है, उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा कई अनिवार्य तृतीय पक्ष (थर्ड पार्टी) टैस्ट जैसे शॉक टैस्ट, ग्लो वायर टैस्ट, स्प्रिंग हैमर टैस्ट, वाइब्रेशन टैस्ट, ड्राई हीट टैस्ट और कोल्ड टैस्ट भी पास न होने की बात सामने आई है।

बैंच टैस्टिंग के दौरान सीमेन्स मीटर के कम वोल्टेज परिस्थितियों (6.35 वोल्ट, एच.टी. पी.टी. सैकेंडरी सिस्टम) में फेल होने की रिपोर्ट भी सामने आई है। परीक्षण के दौरान यह मीटर हैंग मोड में चला गया और बार-बार अपने आप ऑन-ऑफ होने लगा। इतना ही नहीं वोल्टेज हार्मोनिक्स और इंटर-हार्मोनिक्स डेटा भी गायब पाया गया।

इसके साथ ही फील्ड टैस्टिंग में भी अंडर/ओवर वोल्टेज डिविएशन डेटा का अभाव, एस.ए.आई.-एफ.आई., एस.ए.आई.-डी.आई. रिपोर्टों की अनुपस्थिति तथा आई.ई.ई.ई.-519 रिपोर्टों और मीटर के रॉ डेटा में कई अंतर पाए गए।

डी.ए.सी. द्वारा भी इस मीटर के गलत टी.एच.डी. कैलकुलेशन और अविश्वसनीय हार्मोनिक विश्लेषण की बात कही गई है। सूत्रों ने यह भी बताया कि खरीदे गए मीटर की कीमत एल.-2 बोलीदाता की तुलना में लगभग 50,000 रुपए प्रति मीटर अधिक है, जबकि कुल मिलाकर केवल 300 रुपए कम होने के आधार पर एल.-1 को टैंडर दिया गया।

इस मामले में बातचीत (नेगोशिएशन) की भी संभावना थी। इसके बजाय पी.एस.पी.एल. द्वारा ओ एंड एम अवधि को 1 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया गया और लगभग केवल 0.5 प्रतिशत छूट दिखाई गई, जो करीब 2.70 लाख रुपए की कुल लागत में मात्र लगभग 1,650 रुपए की कमी बनती है।

इस टैंडर में 1000 पावर क्वालिटी मीटरों की खरीद शामिल थी और पूरी मात्रा एक ऐसी कंपनी के मीटरों को दे दी गई जिसे गैर-अनुपालक बताया जा रहा है, जबकि अन्य स्थापित सप्लायरों के पास पूर्ण टाइप टेस्ट रिपोर्ट, तैयार माल तथा पी.एस.पी.एल. में 800 से अधिक एम.पी.क्यू. मीटरों की पूर्व सप्लाई का अनुभव मौजूद था।

सूत्रों के अनुसार दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद जिस कंपनी को ठेका दिया गया है उसके कई अनिवार्य टाइप टैस्ट रिपोर्ट अभी तक उपलब्ध नहीं हैं और पी.एस.पी.एल. अभी भी इन रिपोर्टों तथा मीटरों की डिलीवरी का इंतजार कर रहा है।

इस बीच, अन्य सप्लायर जिनके पास पूरी तरह अनुकूल तथा तत्काल उपलब्ध मीटर लगभग 50,000 रुपए कम कीमत पर मौजूद थे, उन्हें नजरअंदाज किया गया। इस मामले ने अब एम.क्यू.पी. मीटर टैंडर की तकनीकी मूल्यांकन, परीक्षण और खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के आरोप खड़े कर दिए हैं।

पावर क्वालिटी (पी.क्यू.) मीटर औद्योगिक उपभोक्ताओं के परिसरों में हार्मोनिक स्तर और अन्य महत्वपूर्ण विद्युत मानकों की सटीक माप के लिए उपयोग किए जाते हैं। यदि गलत कैलकुलेशन और गलत रिपोर्ट देने वाले हार्मोनिक मीटर लगाए जाते हैं, तो उपभोक्ताओं को भारी आर्थिक और परिचालन नुकसान का खतरा हो सकता है तथा रिकॉर्डिंग के कारण विभिन्न प्रकार के विवाद भी उत्पन्न हो सकते हैं।

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