पंजाब के 1,100 से ज्यादा स्कूल बिना प्रिंसिपल! 60% पद खाली, डीटीएफ ने सरकार को घेरा

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 09 Jun, 2026 07:14 PM

over 1 100 schools in punjab without principals 60 of principal posts vacant

भगवंत मान सरकार एक ओर जहां रोजाना शिक्षा में बदलाव और "शिक्षा क्रांति" के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रिंसिपलों के लगभग 60 प्रतिशत खाली पद इन दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। यह बात शिक्षक संगठन डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब के जिला...

लुधियाना: भगवंत मान सरकार एक ओर जहां रोजाना शिक्षा में बदलाव और "शिक्षा क्रांति" के दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रिंसिपलों के लगभग 60 प्रतिशत खाली पद इन दावों की सच्चाई उजागर कर रहे हैं। यह बात शिक्षक संगठन डेमोक्रेटिक टीचर्स फ्रंट (डीटीएफ) पंजाब के जिला लुधियाना अध्यक्ष दलजीत सिंह समराला और सचिव हरजीत सिंह सुधार ने कही।

उन्होंने बताया कि पंजाब के 1,927 सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में से 1,113 स्कूल बिना प्रिंसिपल के चल रहे हैं। नेताओं ने कहा कि पंजाब की शिक्षा व्यवस्था अपने इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि मानसा और नवांशहर में प्रिंसिपलों के 86 प्रतिशत पद खाली हैं, जबकि तरनतारन और बरनाला में 80 प्रतिशत स्कूल बिना प्रिंसिपल के संचालित हो रहे हैं। इसी तरह मोगा, कपूरथला और जालंधर में लगभग 70 प्रतिशत स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं।

डीटीएफ नेताओं ने हैरानी जताते हुए कहा कि जब प्रिंसिपल, हेडमास्टर, लेक्चरर, मास्टर और ईटीटी शिक्षकों के हजारों पद खाली पड़े हैं, तब सरकार पंजाब को शिक्षा के क्षेत्र में पहले स्थान पर होने का दावा कैसे कर सकती है।

संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दविंदर सिंह सिद्धू, उपाध्यक्ष गुरदीप हेरां, संयुक्त सचिव गुरप्रीत खन्ना, वित्त सचिव गुरबचन सिंह और प्रेस सचिव हुशियार सिंह ने कहा कि 1 अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र में स्कूलों का अकादमिक माहौल लगभग खत्म हो चुका है। उनका आरोप है कि 90 प्रतिशत शिक्षक जनगणना, एसआईआर, ड्रग सर्वे, चुनाव ड्यूटी और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यस्त हैं।

उन्होंने कहा कि स्कूलों में विद्यार्थी बिना पढ़ाई के खाली बैठकर लौट रहे हैं, जबकि सरकार इसे शिक्षा क्रांति का नाम दे रही है। दूसरी ओर शिक्षक अपनी पदोन्नति से जुड़ी फाइलों के लिए कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं और विभाग पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। डीटीएफ नेताओं ने दावा किया कि तथाकथित शिक्षा क्रांति के बावजूद सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में 9 प्रतिशत की कमी आई है।

संगठन ने पंजाब सरकार से मांग की कि प्रिंसिपलों समेत शिक्षकों के सभी कैडरों में लंबित पदोन्नतियां तुरंत की जाएं तथा सीधी भर्ती कोटे के तहत खाली पड़े पदों को जल्द से जल्द भरा जाए। इस अवसर पर ब्लॉक प्रधान हरपिंदर शाही (खन्ना), जसकरण सिंह (समराला), अमनदीप सिंह (दोराहा), हरदीप सिंह (सिद्धवां बेट), लाल सिंह (मांगट), अरविंदर भंगू (लुधियाना), राजिंदर सिंह (माछीवाड़ा साहिब) सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे।

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