पंजाब को नशामुक्त बनाने के लिए केंद्र का बड़ा Action, स्कूली छात्रों को 'थर्ड आई' बनाएगा NCB

Edited By Vatika,Updated: 03 Nov, 2026 09:53 AM

ncb team to visit schools in punjab

पोर्टल narcoticsindia.nic.in पर बच्चे दे सकेंगे सूचना; डिमांड खत्म कर नशे की सप्लाई चेन तोड़ने की रणनीति

चंडीगढ़/लुधियाना, (राज): पंजाब को नशे के अभिशाप से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक रणनीति के तहत जमीनी स्तर पर मोर्चा संभाल लिया है। इस विशेष मुहिम के पहले चरण में स्कूल स्तर पर ही बच्चों को नशे से दूर रखने और तस्करों के जाल को ध्वस्त करने का बीड़ा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को सौंपा गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की सख्त हिदायतों के बाद राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) पंजाब ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि वे सरकारी और निजी (प्राइवेट) स्कूलों में NCB अधिकारियों के विशेष सत्र आयोजित करवाएं। इस अभियान के तहत एनसीबी अफसर विद्यार्थियों को नशे के खिलाफ अपनी 'थर्ड आई' (तीसरी आंख) के तौर पर प्रशिक्षित करेंगे, ताकि नशाखोरी को शुरुआती स्तर पर ही खत्म किया जा सके।

जोनल डायरेक्टर खुद बनेंगे रिसोर्स पर्सन, सीधे स्कूलों में करेंगे संवाद
केंद्रीय कार्ययोजना के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के जोनल डायरेक्टर्स को अलग-अलग क्षेत्रों के लिए रिसोर्स पर्सन नियुक्त किया गया है। ये वरिष्ठ अधिकारी स्वयं सरकारी और निजी स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से सीधे रूबरू होंगे। वे छात्रों को नशा तस्करों द्वारा बिछाए जाने वाले गुप्त जालों, प्रलोभनों और झांसों की कार्यप्रणाली समझाएंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कारणवश भौतिक रूप से (Physical Mode) स्कूल पहुंचना संभव न हो या समय की कमी हो, तो इन सत्रों को अनिवार्य रूप से ऑनलाइन मोड के जरिए पूरा किया जाएगा ताकि कोई भी संस्थान अवेयरनेस से वंचित न रहे।

सरकारी व निजी दोनों स्कूलों के लिए सत्र आयोजित करना अनिवार्य
यह अभियान केवल सरकारी स्कूलों तक सीमित नहीं रहेगा। एससीईआरटी पंजाब के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को अपने-अपने जिले के सभी सरकारी और निजी स्कूलों के प्रमुखों को इस मुहिम से जोड़ना होगा। सभी प्राइवेट स्कूलों के लिए भी अपने यहां यह जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करवाना पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है। एजेंसी का प्राथमिक लक्ष्य नई पीढ़ी को उस समय ही मानसिक रूप से मजबूत बनाना है जब तस्कर उन्हें 'सॉफ्ट टारगेट' मानकर अपनी ओर खींचने का प्रयास करते हैं। प्राथमिक स्तर पर ही जागरूकता पैदा कर नशे की मांग को शून्य करने की दिशा में यह कदम उठाया गया है।

पीयर प्रेशर मैनेजमेंट पर फोकस: सिंथेटिक ड्रग्स के जानलेवा असर से बचाव
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश किशोर उम्र के बच्चे दोस्तों के दबाव में आकर पहली बार नशा चखने की गलती कर बैठते हैं। अभियान के दौरान एनसीबी अधिकारी छात्रों को पीयर प्रेशर मैनेजमेंट की विशेष तकनीक सिखाएंगे और उनमें आत्मविश्वास के साथ बिना झिझक 'ना' कहने की क्षमता विकसित करेंगे। इसके साथ ही मेडिकल नशे के रूप में इस्तेमाल होने वाली प्रतिबंधित दवाओं, सिंथेटिक ड्रग्स और जानलेवा इंजेक्शनों के गंभीर शारीरिक व मानसिक दुष्प्रभावों के बारे में वैज्ञानिक जानकारी दी जाएगी।

बच्चों से लेंगे तस्करों की जानकारी, नाम रहेगा शत-प्रतिशत गुप्त
इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू छात्रों के नेटवर्क का सकारात्मक उपयोग कर ड्रग सप्लायर्स और तस्करों तक पहुंचना है। एनसीबी के अधिकारी बच्चों को जागरूक कर उनसे आसपास सक्रिय नशा तस्करों की गोपनीय जानकारियां जुटाएंगे। छात्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उनका नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। इसके लिए एनसीबी के आधिकारिक पोर्टल narcoticsindia.nic.in पर विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित इनपुट देने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे जांच एजेंसियां बिना पहचान उजागर किए त्वरित कार्रवाई कर सकें।

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