लुधियाना में लगी National Lok Adalat, एक ही दिन में 1.23 लाख से ज्यादा केस निपटे

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 12 Sep, 2026 05:37 PM

national lok adalat held in ludhiana

भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के पैट्रन-इन-चीफ माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत के दूरदर्शी नेतृत्व तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति विक्रम...

लुधियाना (मेहरा): भारत के मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली के पैट्रन-इन-चीफ माननीय न्यायमूर्ति सूर्यकांत के दूरदर्शी नेतृत्व तथा सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष माननीय न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के मार्गदर्शन में शनिवार को लुधियाना सैशन डिवीजन के अंतर्गत लुधियाना, जगराओं, समराला, खन्ना और पायल के न्यायिक परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया।

यह लोक अदालत पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एवं पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के पैट्रन-इन-चीफ माननीय न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में तथा जिला एवं सैशन जज-कम-चेयरपर्सन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण लुधियाना हरप्रीत कौर रंधावा की देखरेख में आयोजित की गई। पंजाब राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, एस.ए.एस. नगर के निर्देशों के अनुसार आयोजित इस लोक अदालत में अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज जगदीप कौर विर्क ने बतौर सदस्य सचिव कार्य किया।

1.25 लाख से अधिक मामले रखे गए

जिला एवं सैशन जज हरप्रीत कौर रंधावा ने बताया कि लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति एवं समझौते के माध्यम से प्री-लिटिगेशन तथा लंबित दीवानी और कंपाउंडेबल आपराधिक मामलों का शीघ्र निपटारा करना था। उन्होंने बताया कि जिला मुख्यालय लुधियाना में 44 बेंचों का गठन किया गया, जबकि जगराओं, समराला, खन्ना और पायल में कुल 10 बेंच गठित की गईं। राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान 1,25,000 से अधिक मामले सुनवाई के लिए रखे गए, जिनमें से 1,23,000 से अधिक मामलों का निपटारा किया गया। इन मामलों में कुल ₹260,34,22,067 की राशि के अवार्ड पारित किए गए।

छह साल पुराने एक्सिस बैंक मामले का समझौते से निपटारा

लोक अदालत की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में छह वर्ष से अधिक पुराने “Axis Bank vs. Pargat Singh” मामले का समझौते के माध्यम से निपटारा शामिल रहा। इस मामले में आरोपी ने ₹48,30,000 की पूरी बकाया राशि अदा करने पर सहमति जताई। इसी प्रकार पांच वर्ष से अधिक पुराने “Amandeep Kaur vs. Sukhvir Singh” मामले में भी महत्वपूर्ण समझौता हुआ। मामले में प्रतिवादी ने अपनी पत्नी तथा तीन बेटियों का भविष्य में उचित रूप से भरण-पोषण एवं सहायता करने पर सहमति व्यक्त की। प्रतिवादी द्वारा दिए गए आश्वासन के बाद याचिकाकर्ता नंबर-1 अमनदीप कौर ने बयान दिया कि वह धारा 125 सी.आर.पी.सी. के तहत दायर याचिका को आगे नहीं चलाना चाहतीं। इसके बाद उन्होंने याचिका वापस ले ली।

लोक अदालत से लोगों को कई लाभ

हरप्रीत कौर रंधावा ने लोक अदालत के विभिन्न लाभों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से मामलों का शीघ्र एवं सरल निपटारा, आपसी सहमति से विवाद का समाधान तथा कोर्ट फीस की वापसी जैसी सुविधाएं मिलती हैं। उन्होंने बताया कि लोक अदालत द्वारा पारित अवार्ड को सिविल कोर्ट की डिक्री का दर्जा प्राप्त होता है तथा यह अंतिम होता है, जिसके विरुद्ध कानून के तहत सामान्यतः अपील का प्रावधान नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि अगली राष्ट्रीय लोक अदालत 12 दिसंबर 2026 को आयोजित की जाएगी। इसके अलावा नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 से संबंधित मामलों के लिए विशेष लोक अदालत 21 नवंबर 2026 को आयोजित होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि लोक अदालत, कानूनी सेवाओं एवं सहायता से संबंधित जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क किया जा सकता है। इस अवसर पर अतिरिक्त जिला एवं सैशन जज डॉ. राजनीश, सिविल जज जूनियर डिवीजन गौरव गुप्ता, अमित बख्शी तथा एडवोकेट राजनीश लखनपाल भी उपस्थित रहे।

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