राजा वड़िंग के RSS एजेंट वाले बयान पर कांग्रेस में विवाद, ममता आशु ने बघेल से मांगा जवाब

Edited By Kamini,Updated: 06 Aug, 2026 07:59 PM

mamta ashu sought answers from baghel

पंजाब में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद मुश्किल दौर में भी पार्टी के साथ डटकर खड़े रहने वाले पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और उनके समर्पित समर्थकों के हक में अब उनकी पत्नी ममता आशु आ गई हैं।

लुधियाना (विक्की) : पंजाब में कांग्रेस की सरकार जाने के बाद मुश्किल दौर में भी पार्टी के साथ डटकर खड़े रहने वाले पूर्व मंत्री भारत भूषण आशु और उनके समर्पित समर्थकों के हक में अब उनकी पत्नी ममता आशु आ गई हैं। आज पार्टी के लुधियाना में हुए प्रोग्राम के दौरान जब आशु समर्थक हाल में अपने नेता के हक में नारेबाजी कर रहे थे तो प्रधान राजा वडिंग ने नारेबाजी कर रहे कांग्रेस नेताओं और आशु समर्थकों को आरएसएस का एजेंट कहकर हाल से बाहर जाने को कहा।

वड़िंग की इस टिप्पणी का जहां विरोध हो रहा है वहीं पूर्व मंत्री आशु की पत्नी ममता आशु ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पंजाब कांग्रेस के इंचार्ज भूपेश बघेल से 5 सवाल पूछे हैं। ममता आशु ने कहा कि पूर्व मंत्री आशु ने पार्टी के लिए करीब 2 साल तक जेल तक काटी है। अब पंजाब कांग्रेस प्रधान द्वारा उनके समर्थकों जिनमें पार्षद, पार्टी को समर्पित वर्करों को मंच से आरएसएस  का एजेंट कहा जा रहा है तो क्या अब यह कहने वाले वड़िंग पर हाईकमान कोई एक्शन लेगा? उन्होंने कहा कि पंजाब कांग्रेस का आम कार्यकर्ता आज सच जानना चाहता है कि पार्टी के सच्चे सिपाहियों का अपमान आखिर कब तक होता रहेगा। उन्होंने हाईकमान से आशु और उनके साथी नेताओं के सम्मान की रक्षा करने तथा अनुशासन की धज्जियां उड़ाने वालों पर तुरंत सख्त एक्शन लेने की जोरदार मांग की है। 

सांसद वडिंग को भी घेरा 

ममता आशु ने राजा वड़िंग के बयान की पोल खोलते हुए कहा कि पीपीसीसी अध्यक्ष ने दावा किया था कि वह नारे लगाने वाले एक कार्यकर्ता को विजिलेंस से छुड़ाकर लाए हैं। यदि यह सच है तो उन्होंने ऐसा कैसे किया और आशु समेत बाकी महीनों तक जेल काटने वाले सच्चे कांग्रेसी कार्यकर्ताओं के लिए ऐसी कोशिश क्यों नहीं की? यदि यह दावा सही नहीं है, तो इस गुमराह करने वाले बयान के लिए अध्यक्ष की जवाबदेही तय होगी या नहीं?

क्या सारे नेता गलत- केवल वड़िंग ही सही?

ममता ने कहा कि पीपीसीसी अध्यक्ष कहते हैं कि लुधियाना से उनका चुनाव लड़ना हाईकमान का फैसला था। लेकिन जब हाईकमान किसी वरिष्ठ नेता या मंत्री को जिम्मेदारी देता है, तो उस पर सवाल उठाना कितना वाजिब है? सार्वजनिक रूप से पार्टी हाईकमान के फैसलों पर सवाल खड़े करना क्या पार्टी अनुशासन के अनुकूल है? आगे कहा कि पीपीसीसी अध्यक्ष लगभग हर स्टेज से 'हर बूथ मजबूत' करने की बात कहते हैं, लेकिन साथ ही भारत भूषण आशु जैसे बड़े कांग्रेसी नेताओं के आचरण, कामकाज और चुनाव लड़ने के हक पर भी सार्वजनिक सवाल खड़े करते हैं। एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाली इस बयानबाजी पर क्या हाईकमान कोई एक्शन लेगा? उन्होंने स्पष्ट किया कि आज हालात यह हैं कि पार्टी की बड़ी संख्या में सीनियर लीडरशिप एक तरफ खड़ी है। क्या सारे सीनियर नेता गलत हो सकते हैं और सिर्फ राजा वड़िंग ही सही हैं, इसलिए हाईकमान को इस स्थिति का निष्पक्ष मूल्यांकन करके तुरंत आशु व सीनियर नेताओं के पक्ष में फैसला लेना चाहिए।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here


 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!