GF से परेशान 12वीं के छात्र की मौत का मामला, 6 महीने बाद भी आरोपी प्रेमिका फरार, दर-दर भटक रही मां

Edited By Kalash,Updated: 10 May, 2026 02:47 PM

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लुधियाना में 12वीं कक्षा के छात्र निखिल द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है।

लुधियाना (गणेश/सचिन): लुधियाना में 12वीं कक्षा के छात्र निखिल द्वारा आत्महत्या किए जाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। बेटे की मौत के बाद टूट चुकी मां पिछले 6 महीनों से इंसाफ के लिए पुलिस अधिकारियों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन आज तक उसे न्याय नहीं मिल पाया। बेटे को खोने का दर्द झेल रही मां अब अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके बेटे को मानसिक रूप से इतना परेशान किया गया कि उसने मजबूर होकर अपनी जिंदगी खत्म कर ली।

जानकारी के अनुसार 27 अक्टूबर 2025 को निखिल नाम के 12वीं कक्षा के छात्र ने घर में पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उस समय परिवार को यह समझ नहीं आया कि आखिर उनके बेटे ने इतनी कम उम्र में इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया। अचानक हुई इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था। घर में मातम का माहौल था और मां-बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था।

मृतक निखिल की मां गीता ने बताया कि बेटे की मौत के करीब 3 से 4 दिन बाद जब उन्होंने उसका मोबाइल फोन खुलवाया और कमरे की दोबारा तलाशी ली, तब इस पूरे मामले की परतें खुलनी शुरू हुईं। परिवार को बेड के गद्दे के नीचे से एक सुसाइड नोट मिला। इसके अलावा मोबाइल फोन में कई चैट और मैसेज भी मिले, जिनके बाद परिवार को पता चला कि मामला एक लड़की से जुड़ा हुआ है।

गीता के अनुसार उनका बेटा धांदरा के सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ाई करता था। उसी स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की से उसकी बातचीत शुरू हुई थी। शुरुआत में परिवार को इसकी ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन धीरे-धीरे निखिल का व्यवहार बदलने लगा। वह चुप रहने लगा था, तनाव में रहता था और कई बार बिना बात के परेशान दिखाई देता था।

मां ने बताया कि एक दिन स्कूल से शिक्षक का फोन आया कि निखिल कई दिनों से स्कूल नहीं पहुंच रहा। इसी दौरान एक रिश्तेदार का भी फोन आया, जिसने बताया कि निखिल किसी लड़की के साथ घूमता देखा गया है। इसके बाद परिवार को चिंता हुई और उन्होंने बेटे से बात करने की कोशिश की।

गीता ने कहा कि उन्होंने बेटे को समझाया और उसे उस माहौल से दूर रखने के लिए उसका स्कूल बदलवा दिया। निखिल का दाखिला दूसरे सरकारी स्कूल में करवाया गया ताकि वह मानसिक रूप से सामान्य हो सके और अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सके। लेकिन मां का आरोप है कि इसके बावजूद भी लड़की ने उनका पीछा नहीं छोड़ा।

पीड़ित मां के अनुसार लड़की ने निखिल के दोस्तों से उसका मोबाइल नंबर हासिल कर लिया और फिर लगातार उससे संपर्क करना शुरू कर दिया। गीता का कहना है कि लड़की बार-बार मैसेज कर निखिल पर मानसिक दबाव बनाती थी। मां के अनुसार उनके बेटे को भावनात्मक रूप से परेशान किया जा रहा था, जिसके कारण वह अंदर ही अंदर टूटता चला गया।

गीता ने बताया कि निखिल बेहद सीधा-सादा और भावुक स्वभाव का लड़का था। वह परिवार से बहुत प्यार करता था और अपनी मां का सबसे बड़ा सहारा था। मां का कहना है कि शायद इसी वजह से वह मानसिक तनाव को सहन नहीं कर पाया और आखिरकार उसने मौत को गले लगा लिया।

रोते हुए गीता ने कहा कि उनके पति की पहले ही मौत हो चुकी है। पति के गुजर जाने के बाद उन्होंने बेहद मुश्किल हालात में अपने बच्चों को पाला। परिवार में उनकी तीन बेटियां हैं, जिनमें बड़ी बेटी नौकरी करती है, जबकि वह खुद लोगों के लिए टिफिन बनाकर घर का खर्च चलाती हैं। उन्होंने कहा कि निखिल ही उनका इकलौता बेटा और बुढ़ापे का सहारा था।

मां ने कहा कि बेटे की मौत के बाद उनका पूरा परिवार बिखर चुका है। घर का हर कोना आज भी निखिल की याद दिलाता है। उसकी किताबें, कपड़े और स्कूल बैग देखकर आज भी मां की आंखें भर आती हैं। गीता ने कहा कि उनके लिए हर दिन किसी सजा से कम नहीं है।

उन्होंने बताया कि उनकी बेटियां अक्सर रोते हुए कहती हैं “हम तीन बहनें थीं, हममें से एक चली जाती तो हमारा भाई बच जाता।” यह शब्द सुनकर एक मां के दिल पर क्या गुजरती होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। गीता ने कहा कि जब उनकी बेटियां ऐसा कहती हैं तो उनका कलेजा फट जाता है और वह पूरी रात सो नहीं पातीं।

गीता ने कहा कि बेटे की मौत के बाद उन्होंने निखिल का मोबाइल फोन, सुसाइड नोट और दो कॉपियां पुलिस को सौंप दी थीं ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। उन्हें उम्मीद थी कि पुलिस जल्द कार्रवाई करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद उन्हें सिर्फ तारीखें और भरोसे ही मिले।

पीड़ित मां ने आरोप लगाया कि वह लगातार थानों और अधिकारियों के चक्कर काटती रहीं। कई बार पुलिस अधिकारियों के सामने हाथ जोड़कर बेटे के लिए इंसाफ की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि पुलिस की ढिलाई ने उनके दर्द को और बढ़ा दिया है।

आखिरकार इंसाफ की मांग को लेकर गीता को एक NGO के साथ मिलकर CP ऑफिस के बाहर भूख हड़ताल पर बैठना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन अभी तक आरोपी लड़की की गिरफ्तारी नहीं हुई। मां का कहना है कि अगर समय रहते कार्रवाई की जाती तो शायद उन्हें इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता।

गीता ने कहा कि अब उनका पुलिस व्यवस्था से भरोसा उठता जा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अगर पुलिस उन्हें इंसाफ नहीं दिला सकती तो वह कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगी और अपने बेटे के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगी। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें कितनी भी मुश्किलों का सामना क्यों न करना पड़े, लेकिन वह अपने बेटे को इंसाफ दिलाकर रहेंगी। मां ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में किसी और मां को अपने जवान बेटे की लाश न देखनी पड़े।

 

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