बच्चों से भरी School Bus हुई बेकाबू, सड़क से उतरकर खेतों में घुसी, मची चीख-पुकार

Edited By Vatika,Updated: 24 Oct, 2026 10:27 AM

ludhiana school bus accident

सुबह करीब 7:30 बजे विभिन्न गांवों से बच्चों को लेकर स्कूल जा रही थी बस

लुधियाना/मुल्लांपुर दाखा(राज, कालियां): मुल्लांपुर दाखा के नजदीकी गांव देतवाल के पास शनिवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया। जी.टी.बी. (GTB) सीनियर सेकेंडरी स्कूल की करीब 20 मासूम बच्चों से भरी बस का अचानक टाई-रॉड (स्टीयरिंग से जुड़ा मुख्य तकनीकी पुर्जा) खुल गया। टाई-रॉड खुलते ही चालक का स्टीयरिंग पर से नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो गया और अनियंत्रित हुई बस सड़क से नीचे उतरकर सीधे खेतों में जा घुसी। बस के हिचकोले खाते ही बच्चों में चीख-पुकार मच गई और वे बुरी तरह सहम गए। राहत की बात यह रही कि बस पलटने से बच गई और उसमें सवार सभी 20 बच्चे पूरी तरह सुरक्षित और बाल-बाल बच गए।

सुबह 7:30 बजे हुआ हादसा, गांवों से बच्चों को ला रही थी बस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जीटीबी सीनियर सेकेंडरी स्कूल की यह बस रोजाना की तरह शनिवार सुबह करीब 7:30 बजे आसपास के विभिन्न ग्रामीण इलाकों से स्कूली छात्र-छात्राओं को लेकर स्कूल की ओर आ रही थी। जब बस गांव देतवाल के पास पहुंची, तो अचानक चलती बस का टाई-रॉड टूटकर/खुलकर अलग हो गया। पुर्जा अलग होते ही बस का स्टीयरिंग पूरी तरह फ्री हो गया और चालक चाहकर भी बस को सड़क पर रोक नहीं पाया। बेकाबू हुई बस रफ्तार के साथ सड़क किनारे उतरते हुए खेतों में जाकर रुक गई।

खेतों में धंसी बस, बाल-बाल बची मासूमों की जान
बस के अनियंत्रित होकर सड़क से उतरने और झटके खाने के कारण भीतर बैठे बच्चों में भारी दहशत फैल गई और वे रोने-चिल्लाने लगे। आसपास खेतों में काम कर रहे किसानों और राहगीरों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर चालक की मदद से बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात यह रही कि किसी भी बच्चे को कोई गंभीर चोट नहीं आई और किसी प्रकार का जानी नुकसान होने से बच गया। घटना की सूचना जैसे ही गांवों में पहुंची, बच्चों के माता-पिता घबराए हुए घटनास्थल की ओर दौड़ पड़े।

स्कूल बसों की फिटनेस और तकनीकी जांच पर उठे गंभीर सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर निजी स्कूलों द्वारा चलाई जा रही बसों की मैकेनिकल फिटनेस, तकनीकी रखरखाव और सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है। अभिभावकों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि स्कूली बसों में रोजाना सैकड़ों मासूम बच्चे सफर करते हैं, लेकिन कई प्रबंधन मुनाफा कमाने के चक्कर में पुरानी और खटारा बसों की समय पर सर्विस नहीं करवाते। स्टेयरिंग, ब्रेक, टायर और टाई-रॉड जैसे बेहद संवेदनशील और अहम पुर्जों की समय-समय पर तकनीकी जांच होना अनिवार्य है। लोगों ने जिला प्रशासन और ट्रांसपोर्ट विभाग से मांग की है कि स्कूलों में चलने वाले वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट की जमीनी जांच की जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े दर्दनाक हादसे से बचा जा सके।

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