Edited By Vatika,Updated: 27 Oct, 2026 09:11 AM

उत्तर भारत के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में शुमार लुधियाना रेलवे स्टेशन पर चल रहे री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की कछुआ चाल
लुधियाना (राज): उत्तर भारत के प्रमुख रेलवे जंक्शनों में शुमार लुधियाना रेलवे स्टेशन पर चल रहे री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट की कछुआ चाल ने यात्रियों का जीना मुहाल कर दिया है। नवनिर्माण का कार्य अपनी तय समय-सीमा से करीब 22 महीने पीछे चल रहा है। इस लेटलतीफी के बीच सबसे शर्मनाक बात यह है कि पिछले एक साल से प्लेटफॉर्म नंबर 2, 3, 4, 5, 6 और 7 पर सामान्य यात्रियों के लिए शौचालय (टॉयलेट) की कोई वैकल्पिक व्यवस्था तक नहीं की गई है। इसके चलते प्रतिदिन सफर करने वाले करीब 50 हजार यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।
अगस्त 2025 थी पहली डेडलाइन, अब जून 2027 तक का इंतजार
स्टेशन के आधुनिकीकरण का काम जिस रफ्तार से चल रहा है, उससे प्रोजेक्ट की लागत और समय दोनों लगातार बढ़ रहे हैं। इस री-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को पूरा करने की मूल समय-सीमा अगस्त 2025 तय की गई थी। इसके बाद रेलवे ने इसे बढ़ाकर दिसंबर 2026 किया, लेकिन धरातल पर मौजूदा हालात को देखते हुए अधिकारियों का खुद मानना है कि यह कार्य जून 2027 से पहले पूरा होना मुमकिन नहीं दिख रहा है।
200 ट्रेनों की आवाजाही, टॉयलेट के लिए प्लेटफॉर्म-1 की दौड़; ट्रेन छूटने का खौफ
लुधियाना रेलवे स्टेशन से रोजाना करीब 200 ट्रेनों का संचालन होता है और सामान्य दिनों में 45 से 50 हजार यात्री सफर करते हैं। त्योहारों के सीजन में यह आंकड़ा बढ़कर 60 से 70 हजार तक पहुंच जाता है। प्लेटफॉर्म नंबर 2 से लेकर 7 तक टॉयलेट न होने के कारण यात्रियों को मजबूरन प्लेटफॉर्म नंबर 1 पर भागना पड़ता है। कई बार प्लेटफॉर्म बदलने और ओवरब्रिज चढ़ने-उतरने के चक्कर में यात्रियों की ट्रेनें तक छूट जाती हैं। प्लेटफॉर्म पर मौजूद वेंडर्स का भी यही कहना है कि यात्री जब टॉयलेट पूछते हैं, तो उन्हें ट्रेन आने पर उसके डिब्बे का शौचालय इस्तेमाल करने या फिर 1 नंबर प्लेटफॉर्म पर जाने की सलाह देनी पड़ती है।
दिव्यांग टॉयलेट्स में गंदगी का अंबार, रैंप तक बनाना भूला विभाग
स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 2-3, 4-5 और 6-7 पर दिव्यांग यात्रियों के लिए जो टॉयलेट बनाए गए हैं, वे भी बदहाली के आंसू रो रहे हैं। साफ-सफाई के अभाव में ये पूरी तरह दुर्गंध मार रहे हैं। हद तो यह है कि रेलवे प्रशासन इन शौचालयों तक पहुंचने के लिए रैंप बनाना ही भूल गया। रैंप न होने के कारण व्हीलचेयर पर आने वाले दिव्यांगजन इन शौचालयों तक पहुंच ही नहीं पाते। यात्री राजेश और मनोज ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि प्लेटफॉर्म पर मूलभूत सुविधाएं न होने से पूरे परिवार को असहनीय परेशानी झेलनी पड़ती है।
अधिकारियों का पक्ष: त्योहारों के मद्देनजर करेंगे अस्थायी प्रबंध
मामले को लेकर फिरोजपुर डिवीजन के सीनियर रेलवे अधिकारियों के अनुसार, दिवाली के बाद प्लेटफॉर्म 2 और 3 पर निर्माण कार्य शुरू होगा और उसी दौरान नए टॉयलेट्स बनाए जाएंगे। इसके बाद बाकी प्लेटफॉर्मों पर चरणबद्ध तरीके से काम चलेगा।
"फेस्टिवल सीजन को ध्यान में रखते हुए स्टेशन पर टॉयलेट की वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। पिछले साल भी अस्थायी प्रबंध किए गए थे। चूंकि अभी निर्माण कार्य प्रगति पर है, इसलिए काम पूरा होते ही यात्रियों को सभी आधुनिक सुविधाएं मिलने लगेंगी।" — विक्रांत, पी.आर.ओ., फिरोजपुर रेलवे डिवीजन