Edited By Kalash,Updated: 14 Oct, 2026 04:49 PM

पंजाब सरकार ने टैक्स चोरों और वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 429.30 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय वस्तु एवं सेवा कर घोटाले का भंडाफोड़ किया है।
लुधियाना (राज): पंजाब सरकार ने टैक्स चोरों और वित्तीय धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए 429.30 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय वस्तु एवं सेवा कर घोटाले का भंडाफोड़ किया है। पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी एवं कर मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बेहद संगठित और सुनियोजित बहु-राज्यीय जीएसटी फर्जीवाड़े का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि इस फर्जी सिंडिकेट के जरिए 2,410.22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम कर योग्य राशि से जुड़े जाली लेन-देन कर सरकार को 429.30 करोड़ रुपये के राजस्व का सीधा चूना लगाया गया है। स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट की गोपनीय रिपोर्ट के आधार पर थाना डिवीजन नंबर-4, लुधियाना में मुख्य ट्रांसपोर्टर और उसके साथियों के खिलाफ संगीन आपराधिक धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।
30 सितंबर को पकड़ी गई गाड़ी ने खोला महाघोटाले का राज
विभागीय कार्रवाई का विवरण साझा करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि इस पूरे रैकेट की पहली कड़ी 30 सितंबर को हाथ लगी थी। उस दिन सिपू लुधियाना के एक राज्य कर अधिकारी ने गुप्त सूचना के आधार पर दिल्ली से पंजाब में माल लेकर आ रहे एक संदिग्ध वाहन को चेकिंग के लिए रोका। जांच के दौरान वाहन के पास मौजूद ई-वे बिलों और इनवॉइस में दर्शाया गया था कि यह माल पंजाब की तीन प्रतिष्ठित फर्मों को डिलीवर किया जाना है। जब कर विभाग ने संबंधित फर्मों से संपर्क कर पड़ताल की, तो उन्होंने ऐसा कोई भी माल मंगवाने या ऑर्डर देने से सिरे से इनकार कर दिया। इसके बाद जब विभाग ने गहराई से पड़ताल शुरू की, तो यह मामला केवल एक गाड़ी तक सीमित न रहकर हजारों करोड़ के संगठित फर्जीवाड़े के रूप में सामने आया।
62 फर्जी फर्मों का मकडज़ाल, 25 अकेले पंजाब में कर रही थीं काम
वित्त मंत्री ने खुलासा किया कि विभाग की उन्नत डेटा एनालिटिक्स टीम और ई-वे बिल विंग ने जब पिछले रिकॉड्रस की गहन डिजिटल और फॉरेंसिक पड़ताल की, तो विभिन्न राज्यों में फैली 62 आपस में जुड़ी बोगस (फर्जी) फर्मों के नेटवर्क का पता चला। इन 62 फर्मों में से 25 फर्में अकेले पंजाब के विभिन्न जिलों में कागजों पर संचालित की जा रही थीं। यह सिंडिकेट मुख्य रूप से वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 के दौरान सक्रिय रहा। केवल कागजी इनवॉइस बनाकर और बिना किसी वास्तविक माल की आवाजाही के इनपुट टैक्स क्रेडिट का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया जा रहा था।
ट्रांसपोर्टर था रैकेट की मुख्य कड़ी, आरोपियों पर केस दर्ज
जांच में सामने आया कि श्री बालाजी ट्रांसपोर्ट कंपनी का संचालक इस पूरे अवैध नेटवर्क की रीढ़ था। ट्रांसपोर्टर अन्य फर्जी संस्थानों और शेल कंपनियों से जाली बिल प्राप्त करता था और ई-वे बिलों का पार्ट-बी (वाहन विवरण) भरकर फर्जी तरीके से माल की ढुलाई कागजों में दिखाता था, जबकि वास्तव में माल या तो कहीं और खपाया जाता था या सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर सरकार से टैक्स रिफंड/क्रेडिट हड़पा जाता था। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि पंजाब में कानून का राज है और कर चोरी करने वाले किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा। सिपू की विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस स्टेशन डिवीजन नंबर 4, लुधियाना में 13 अक्टूबर को एफआईआर नंबर 0185 दर्ज कर ली गई है। यह केस हर्ष थापर (मालिक, श्री बालाजी ट्रांसपोर्ट कंपनी) सम्मी धीमान, जस्स और अन्य अज्ञात सहयोगियों के खिलाफ दर्ज की गई है।
नेटवर्क से जुड़े अन्य राज्यों के व्यापारियों पर भी कसेगा शिकंजा
वित्त मंत्री ने बताया कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है। पंजाब कर विभाग अब अन्य संबंधित राज्यों के जीएसटी और प्रवर्तन विभागों के साथ मिलकर इस नेटवर्क से जुड़े तमाम व्यापारियों, फर्जी फर्म संचालकों और हवाला ऑपरेटरों की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि राज्य के खजाने को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ इस घोटाले से जुड़े अन्य बड़े चेहरों को भी बेनकाब किया जाएगा।
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