SP ओसवाल 7 करोड़ ठगी केस में बड़ा खुलासा: कोलकाता से रिमांड पर आए सोहेल अख्तर से ईडी की पूछताछ

Edited By Vatika,Updated: 02 Oct, 2026 08:50 AM

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प्राथमिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह भारत में केवल पैसे बटोरने का काम करता था

लुधियाना/जालंधर (राज): वर्धमान ग्रुप के चेयरमैन एवं प्रख्यात उद्योगपति एसपी ओसवाल से फर्जी सीबीआई अधिकारी बनकर ₹7 करोड़ की ठगी और 'डिजिटल अरेस्ट' के बहुचर्चित मामले में जांच एजेंसियों का शिकंजा और कस गया है। कोलकाता से ट्रांजिट रिमांड पर जालंधर लाए गए मुख्य हैंडलर सोहेल अख्तर उर्फ राजू से प्रवर्तन निदेशालय (ED) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम लगातार गहन पूछताछ कर रही है। स्पेशल पीएमएलए कोर्ट से 6 अक्टूबर तक मिले रिमांड के दौरान ईडी आरोपी से अंतरराष्ट्रीय साइबर सिंडिकेट, हवाला ऑपरेटरों और विदेशी नेटवर्क के लिंक खंगालने में जुटी है। प्राथमिक पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह भारत में केवल पैसे बटोरने का काम करता था, जबकि इसका असली कंट्रोल रूम विदेशों से संचालित हो रहा था।

'AMMFORWARD' ऐप से विदेश पहुंचता था पूरा एक्सेस
ईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में सोहेल अख्तर ने स्वीकार किया है कि ठगी की रकम को चंद मिनटों में ठिकाने लगाने के लिए आधुनिक तकनीक और विशेष सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था। आरोपी ने खुलासा किया कि उसने रिग्लो वेंचर्स समेत कई शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों (म्यूल अकाउंट्स) को मैनेज किया था। इन खातों से जुड़े स्मार्टफोन्स में गुप्त रूप से 'AMMFORWARD' नाम का एपीके (APK) एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया था। इस ऐप के सक्रिय होते ही फोन पर आने वाले तमाम बैंक एसएमएस (SMS) और ओटीपी (OTP) सीधे नेपाल, कंबोडिया और वियतनाम में बैठे साइबर अपराधियों के डैशबोर्ड पर लाइव दिखने लगते थे। इसके बाद विदेशी हैंडलर भारत के बैंक सर्वर से रकम को विदेशी खातों और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों में ट्रांसफर कर देते थे।

म्यूल अकाउंट धारकों और स्थानीय एजेंटों पर लटकी तलवार
ईडी की जांच में सामने आया है कि सोहेल अख्तर ने पश्चिम बंगाल और आसपास के राज्यों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को आसान लोन और नौकरियों का लालच देकर उनके नाम पर दर्जनों बैंक खाते खुलवाए थे। जांच एजेंसी अब उन सभी बैंक खातों की मुकम्मल लिस्ट तैयार कर रही है जिनका इस्तेमाल 2 से 5 लाख रुपये के छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन कर कैश निकालने में किया गया। जांच अधिकारियों को शक है कि बिना उचित केवाईसी (KYC) और संदिग्ध लेन-देन की अनदेखी करने में कुछ बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत भी हो सकती है। आने वाले दिनों में संबंधित बैंक शाखाओं के अधिकारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

अर्पित राठौर व रूमी कलिता के बयानों से कराया जा रहा मिलान
उल्लेखनीय है कि इस सिंडिकेट के दो अन्य अहम किरदार—कानपुर निवासी अर्पित राठौर और गुवाहाटी की रूमी कलिता—को ईडी दिसंबर 2025 में ही गिरफ्तार कर चुकी है, जिनके खिलाफ 19 फरवरी को अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) दायर की जा चुकी है।।अब सोहेल अख्तर द्वारा दिए जा रहे बयानों का मिलान अर्पित और रूमी के पूर्व बयानों से कराया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अर्पित राठौर को बाइनेंस (Binance) अकाउंट पर जो मोटी क्रिप्टो कमीशन मिलती थी, उसमें सोहेल का कितना हिस्सा था और भारत में बैठे अन्य किन लोगों को इसका लाभ पहुंचाया गया।

अटैच होगी और भी संपत्तियां, नए छापों की तैयारी
ईडी इस मामले में पहले ही आरोपियों की ₹1.76 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां कुर्क कर चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि सोहेल अख्तर से पूछताछ के आधार पर देश के कई अन्य हिस्सों में भी छापेमारी की तैयारी की जा रही है। जांच एजेंसी को उम्मीद है कि 6 अक्टूबर को रिमांड खत्म होने से पहले लुधियाना, कोलकाता और दिल्ली से जुड़े कुछ और स्थानीय हवाला डीलरों और साइबर दलालों की शिनाख्त कर ली जाएगी, जिससे देश भर में फैले इस अंतरराष्ट्रीय डिजिटल अरेस्ट रैकेट की पूरी चेन को तोड़ा जा सके।

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