Edited By Kalash,Updated: 30 Sep, 2026 05:15 PM

निजी स्कूलों के अध्यापकों पर एक बार फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बड़ा बोझ डालने की तैयारी शुरू हो गई है।
लुधियाना (विक्की): निजी स्कूलों के अध्यापकों पर एक बार फिर गैर-शैक्षणिक कार्यों का बड़ा बोझ डालने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर निगम लुधियाना के सेंसस चार्ज अफसर जोन डी की ओर से जारी एक पत्र ने शहर के निजी स्कूलों के प्रबंधन और अध्यापकों की चिंता बढ़ा दी है। पत्र में आगामी सेंसस (जनगणना) के राष्ट्रीय कार्य को समय पर पूरा करने के नाम पर प्रत्येक स्कूल से कम से कम 20-20 अध्यापकों व कर्मचारियों की सूची मांगी गई है। इस फरमान के बाद निजी स्कूल प्रबंधकों में भारी रोष देखने को मिल रहा है, क्योंकि इससे सीधे तौर पर विद्यार्थियों की पढ़ाई और स्कूलों की नियमित व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा मंडराने लगा है।
सेंसस चार्ज अफसर जोन डी ने 20-20 अध्यापकों का मांगा स्टाफ जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, सेंसस 2026-27 के अति महत्वपूर्ण और समयबद्ध राष्ट्रीय कार्य को सुचारू ढंग से चलाने का हवाला देकर स्कूलों को स्टाफ मुहैया करवाने को कहा गया है। पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि स्कूल अपने स्टाफ में से कम से कम 20-20 अध्यापक अथवा कर्मचारी सेंसस कार्य के लिए उपलब्ध करवाएं। इसके लिए निर्धारित प्रोफार्मे में स्कूल का नाम, अध्यापक/कर्मचारी का नाम और मोबाइल नंबर भरकर भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं।
सरकारी स्कूल पहले ही अध्यापकों से वंचित, अब निजी स्कूलों पर डाला जा रहा बोझ
निजी स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि प्रदेश के सरकारी स्कूल तो पहले ही लंबे समय से अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं और वहां विद्यार्थियों की पढ़ाई पहले ही बुरी तरह प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में सरकार अपनी कमियों को दूर करने और सरकारी तंत्र को मजबूत करने के बजाय निजी स्कूलों की व्यवस्था को भी पटरी से उतारने पर आमादा दिख रही है। निजी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा के भरोसे भेजते हैं और भारी फीस चुकाते हैं, लेकिन सरकार जब भी कोई बड़ा प्रशासनिक कार्य आता है, निजी स्कूलों के स्टाफ को ड्यूटी पर लगाने का आसान रास्ता चुन लेती है।
सिलेबस पूरा करवाने और परीक्षाओं की तैयारी पर पड़ेगा बुरा असर
प्रबंधकों का पक्ष है कि यह समय विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। स्कूलों में टर्म परीक्षाएं, बोर्ड कक्षाओं की विशेष तैयारी और सिलेबस पूरा करवाने का दबाव रहता है। ऐसे में यदि किसी एक स्कूल से 20-20 अनुभवी अध्यापक कई दिनों या हफ्तों के लिए फील्ड में जनगणना के काम पर लगा दिए जाएंगे, तो कक्षाओं में विद्यार्थियों को कौन पढ़ाएगा?
प्रबंधकों का तर्क : गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखे जाएं अध्यापक
निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार को जनगणना जैसे बड़े अभियानों के लिए अपने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों या विशेष रूप से प्रशिक्षित युवाओं की सेवाएं लेनी चाहिए। शिक्षा के अधिकार कानून और अदालती दिशा-निर्देशों में भी अध्यापकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों से दूर रखकर केवल अध्यापन पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है। निजी स्कूलों के स्टाफ पर इस तरह 20-20 लोगों की ड्यूटी का एकतरफा दबाव बनाना न केवल स्कूलों के आंतरिक अनुशासन को बिगाड़ता है, बल्कि अध्यापकों के आत्मसम्मान और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ है।
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