पुलिस स्टेशन में कारोबारी ने बाथरूम में जाकर खुद को लगाई आग, पूरा मामला जान चौंक जाएंगे आप

Edited By Kalash,Updated: 04 Aug, 2026 02:04 PM

khanna police station

खन्ना के थाना सिटी-1 में हुई एक दर्दनाक घटना ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

खन्ना (विपन): खन्ना के थाना सिटी-1 में हुई एक दर्दनाक घटना ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ठगी की शिकायत लेकर इंसाफ की उम्मीद लेकर थाने पहुंचे एक व्यक्ति ने उसी थाने के बाथरूम में खुद पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली, इस दौरान उसकी मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि जिस व्यक्ति ने अपनी शिकायत में पहले ही लिख दिया था कि अगर उसके साथ कुछ बुरा हुआ तो कुछ लोग जिम्मेदार होंगे। उसकी मौत के बाद पुलिस हरकत में आई और चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

मृतक की पहचान लुधियाना के ईशर नगर निवासी 45 साल के गोबिंद सिंह के रूप में हुई है। वह दवा का बिजनेस करता था। बिजनेस में नुकसान और पैसे की तंगी के दौरान वह खन्ना के ललहेड़ी रोड निवासी चरण दास के संपर्क में आया, जो खुद को बाबा बताकर पैसे लेता था और लोगों की परेशानियां दूर करके उनकी किस्मत बदल देता था। आरोपों के मुताबिक, चरण दास ने गोबिंद सिंह से 73 हजार रुपये लिए थे। जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो गोबिंद ने पैसे वापस मांगे। उन्हें सिर्फ 20 हजार रुपये वापस किए गए और बाकी 53 हजार रुपये देने के बजाय, चरण दास और उसके साथियों मक्खन सिंह, जुगराज सिंह जिम्मी और इंदरप्रीत सिंह ईशु द्वारा उन्हें धमकियां दी जाती थी।

इस बारे में गोबिंद सिंह ने सिटी-1 थाने में लिखित शिकायत दी थी। बताया जा रहा है कि गोबिंद सिंह ने पहले भी शिकायत दी थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर उसने शिकायत में अपनी जान को खतरा होने का डर जताया था, तो क्या पुलिस ने उसकी सुरक्षा के लिए कोई कदम उठाए? क्या शिकायत को गंभीरता से लिया गया? जब वह थाने में मौजूद था, तो उसे अकेले बाथरूम तक जाने और वहां पेट्रोल डालकर खुद को आग लगाने तक की नौबत कैसे आ गई? जानकारी के मुताबिक, गोबिंद सिंह सोमवार को फिर से शिकायत लेकर आया था। इस दौरान गोबिंद सिंह बाथरूम गया। जब वह काफी देर तक वापस नहीं आया, तो पुलिस ने दरवाजा खोला तो वह बुरी तरह जला हुआ मिला। उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए। इसके बाद पुलिस ने मृतक की पहले की शिकायत के आधार पर चरण दास और उसके तीन साथियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

हालांकि इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर शिकायत पहले से थी और मृतक  ने अपनी जान को खतरा होने की बात भी लिखी थी, तो पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या समय रहते आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई होती तो जान बच सकती थी? सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक शिकायत करने वाला थाने के अंदर जान देने की नौबत तक कैसे पहुंचा? D.S.P. विनोद कुमार का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और अगर और भी बातें सामने आती हैं तो कानून के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। लेकिन लोगों में यह चर्चा जरूर है कि अगर पुलिस पहले एक्टिव होती तो शायद यह दर्दनाक घटना टल सकती थी।

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