दीपावली पर बढ़ सकता है वायु प्रदूषण, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की एडवाइजरी

Edited By Kamini,Updated: 06 Nov, 2026 04:10 PM

health department issues advisory

दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाव के लिए सिविल सर्जन लुधियाना डॉ. रमनदीप कौर ने जिले के निवासियों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है।

लुधियाना (राज): दीपावली के त्योहार को ध्यान में रखते हुए वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों से बचाव के लिए सिविल सर्जन लुधियाना डॉ. रमनदीप कौर ने जिले के निवासियों के लिए विशेष स्वास्थ्य एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे त्योहार को खुशी और उत्साह के साथ मनाएं, लेकिन साथ ही अपने स्वास्थ्य और पर्यावरण का भी पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा को प्रदूषित करता है और इसका हृदय एवं फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित मरीजों, बच्चों, बुजुर्गों तथा गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।

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डॉ. रमनदीप कौर ने लोगों से पटाखों की बजाय दीप जलाकर पर्यावरण अनुकूल एवं हरित दीपावली मनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अस्थमा और फेफड़ों की अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीज पटाखों से दूर रहें और त्योहार की उन रातों में, जब पटाखे चलाए जा रहे हों, घर के अंदर रहना प्राथमिकता दें। यदि पटाखों का इस्तेमाल किया जाता है तो केवल लाइसेंस प्राप्त दुकानों से स्वीकृत ग्रीन पटाखे ही खरीदें तथा सरकार द्वारा निर्धारित समय और ध्वनि संबंधी नियमों का सख्ती से पालन करें। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे अपने क्षेत्र का दैनिक एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की वेबसाइट या SAMEER ऐप के माध्यम से अवश्य जांचें। AQI का स्तर 0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी में आता है। जब AQI 200 से अधिक हो तो सुबह की सैर, जॉगिंग और बाहर भारी शारीरिक व्यायाम करने से बचना चाहिए। बहुत खराब और गंभीर AQI वाले दिनों में बाहरी गतिविधियों से परहेज करना चाहिए।

सिविल सर्जन ने कहा कि लोगों को भारी यातायात वाली सड़कों, औद्योगिक इकाइयों तथा निर्माण स्थलों के आसपास जाने से बचना चाहिए। खुले में पराली, पत्तियां, लकड़ी और कूड़ा नहीं जलाना चाहिए तथा धूम्रपान से भी दूर रहना चाहिए। घरों में लकड़ी, कोयले और पारंपरिक ईंधन की बजाय LPG या बिजली जैसे स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल करना चाहिए। बंद कमरों में अंगीठी जलाने से पूरी तरह बचना चाहिए, क्योंकि इससे कार्बन मोनोऑक्साइड गैस जमा हो सकती है, जो जानलेवा साबित हो सकती है। उन्होंने विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं तथा हृदय, फेफड़ों की बीमारियों या स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी। ऐसे लोगों को अधिक AQI वाले दिनों में बाहर जाने से बचना चाहिए, भारी शारीरिक मेहनत नहीं करनी चाहिए तथा डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाइयां और इनहेलर हमेशा अपने पास रखने चाहिए।

मास्क के इस्तेमाल के संबंध में उन्होंने बताया कि आवश्यकता पड़ने पर नाक और मुंह को अच्छी तरह ढकने वाला उचित फिटिंग का N95 या N99 मास्क पहनना चाहिए। सामान्य कपड़े के मास्क, रुमाल या दुपट्टे से प्रदूषण के बारीक कणों से प्रभावी सुरक्षा नहीं मिलती। घरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखने और सफाई के लिए सूखी झाड़ू की बजाय गीले पोछे का इस्तेमाल करने की भी सलाह दी गई।

डॉ. रमनदीप कौर ने स्कूल प्रबंधकों से भी अपील की कि वे स्कूलों में प्रतिदिन AQI का स्तर प्रदर्शित करें और प्रदूषण बढ़ने वाले दिनों में बच्चों की बाहरी खेल गतिविधियों और अन्य शारीरिक गतिविधियों को सीमित करें। अस्थमा और सांस संबंधी अन्य समस्याओं से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष सावधानी बरती जाए। पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं के संबंध में उन्होंने प्राथमिक उपचार की जानकारी देते हुए बताया कि यदि किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लग जाए तो उसे तुरंत जमीन पर लेटकर इधर-उधर लुढ़कना चाहिए ताकि आग बुझ सके। जलने वाले हिस्से को 20 मिनट तक साफ और ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। जले हुए स्थान पर बर्फ, टूथपेस्ट, घी या तेल नहीं लगाना चाहिए। आंख में चोट लगने पर आंख को नहीं रगड़ना चाहिए और तुरंत अस्पताल में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, सांस में घरघराहट, छाती में दर्द या जकड़न, चक्कर आना अथवा आंखों में जलन और लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें या स्वास्थ्य केंद्र में जाकर जांच करवाएं। अंत में सिविल सर्जन ने जिले के निवासियों से अपील की कि वे सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करें, अधिक से अधिक पेड़ लगाएं और वायु प्रदूषण को कम करने में अपना योगदान दें, ताकि सभी लोग स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण में त्योहारों की खुशियां मना सकें। किसी भी आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस सेवा के लिए 108 और आपातकालीन हेल्पलाइन के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है।

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