केरल में कांग्रेस की जीत के पीछे बैकरूम रणनीतिकार के रूप में उभरे गौतम सेठ

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 04 May, 2026 05:32 PM

gautam seth emerges as backroom strategist in congress s victory in kerala

Kerala में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की 100 से अधिक सीटों के साथ प्रचंड जीत के बाद जहां राजनीतिक नेतृत्व सुर्खियों में है, वहीं पर्दे के पीछे काम करने वाले रणनीतिकारों की भूमिका भी अब सामने आ रही है। इन्हीं में एक नाम Gautam Seth का है,...

पंजाब डैस्क : Kerala में विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की 100 से अधिक सीटों के साथ प्रचंड जीत के बाद जहां राजनीतिक नेतृत्व सुर्खियों में है, वहीं पर्दे के पीछे काम करने वाले रणनीतिकारों की भूमिका भी अब सामने आ रही है। इन्हीं में एक नाम Gautam Seth का है, जिन्होंने पार्टी की संचार रणनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने यह जिम्मेदारी Deepa Dasmunshi के नेतृत्व में निभाई, जो पूरे अभियान की प्रमुख रणनीतिकार रहीं।

गौतम सेठ का राजनीतिक सफर बेहद कम उम्र में शुरू हुआ। 16 वर्ष की आयु में उन्होंने Rahul Gandhi को लगातार 118 दिनों तक ईमेल लिखे, जिसके बाद मिले जवाब को वे अपने जीवन का निर्णायक मोड़ मानते हैं। यहीं से उनका कांग्रेस के साथ जुड़ाव शुरू हुआ और उन्होंने संगठन के भीतर अपनी जगह बनानी शुरू की।

शुरुआती दौर में सेठ ने वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करते हुए राजनीतिक और संगठनात्मक समझ विकसित की। उन्होंने Oscar Fernandes के साथ इंटर्न के रूप में काम किया और Sheila Dikshit, Buta Singh और Mohsina Kidwai जैसे दिग्गज नेताओं के साथ निकटता से जुड़े रहे। इन अनुभवों ने उन्हें शासन, संगठन और संचार की बारीकियों को समझने में मदद की।

उनकी संगठन में बढ़त भी तेज रही। महज 19 वर्ष की उम्र में वे पंजाब कांग्रेस के प्रवक्ता बनाए गए। इसके बाद 2019 से 2021 तक उन्होंने यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में काम किया। 25 वर्ष की आयु में वे पंजाब कांग्रेस के सबसे युवा जनरल सेक्रेटरी (ऑर्गनाइजेशन) बने, जहां उन्होंने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में भूमिका निभाई।

दीपा दासमुंशी के साथ उनकी कार्यशैली ने उनके करियर को नई दिशा दी। तेलंगाना विधानसभा चुनावों में, जहां कांग्रेस ने जीत दर्ज की, सेठ ने मीडिया कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनावों में केरल में कांग्रेस के 20 में से 18 सीट जीतने के अभियान में भी उन्होंने मीडिया रणनीति को संभाला।

2026 के केरल विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका और विस्तृत हो गई, जहां उन्होंने मीडिया ऑपरेशंस का नेतृत्व किया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस, प्रवक्ताओं की लाइन और वरिष्ठ नेताओं के मीडिया इंटरैक्शन को समन्वित किया, जिससे पूरे अभियान में संदेश की एकरूपता बनी रही और विपक्ष के हमलों का समय पर जवाब दिया जा सका।

इस पूरे अभियान में एक सशक्त वॉर रूम भी सक्रिय रहा, जिसका नेतृत्व हर्षा कनाडम ने किया और जिसमें डेटा विश्लेषण, डिजिटल मॉनिटरिंग और जमीनी फीडबैक को एकीकृत किया गया। इस ढांचे में B.M. Sandeep जैसे नेताओं की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस समन्वित तंत्र ने कांग्रेस को तेज और प्रभावी निर्णय लेने में मदद की।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल की यह जीत केवल जन समर्थन का परिणाम नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित रणनीति और संचार प्रबंधन का भी नतीजा है। दीपा दासमुंशी के नेतृत्व और गौतम सेठ जैसे रणनीतिकारों के बैकरूम काम ने इस अभियान को मजबूती दी।

आज, जब कांग्रेस इस जीत का जश्न मना रही है, गौतम सेठ जैसे नेता एक नई पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं—जो सुर्खियों से दूर रहकर, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।

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