पंजाब यूनिवर्सिटी में कार्यक्रम का आयोजन, सेमिनार हॉल बना इतिहास प्रेमियों का केंद्र

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 05 May, 2026 06:26 PM

event organized at punjab university

पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के सेमिनार हॉल में 4 मई 2026 को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 'ब्रिट्स देसी सोसाइटी' के चेयरमैन रिशु वालिया की बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक पुस्तक “जस्सा सिंह आहलूवालिया: द वॉरियर सेंट” का भारत में...

पंजाब डैस्क : पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के सेमिनार हॉल में 4 मई 2026 को एक ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 'ब्रिट्स देसी सोसाइटी' के चेयरमैन रिशु वालिया की बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक पुस्तक “जस्सा सिंह आहलूवालिया: द वॉरियर सेंट” का भारत में सफलतापूर्वक विमोचन किया गया। इस कार्यक्रम ने सिख और भारतीय इतिहास के प्रति उत्साही विद्वानों, गणमान्य व्यक्तियों और छात्रों को एक मंच पर ला दिया।

प्रो. रेनू विग और प्रख्यात इतिहासकारों की उपस्थिति
इस प्रतिष्ठित समारोह में पंजाब यूनिवर्सिटी की माननीय कुलपति प्रोफेसर रेनू विग ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। पुस्तक विमोचन के साथ-साथ एक विशेष चर्चा सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें इतिहास और पंजाबी अध्ययन के क्षेत्र के दिग्गजों ने भाग लिया। पैनल में प्रोफेसर वीणा सचदेवा (पूर्व चेयरपर्सन, इतिहास विभाग), प्रोफेसर सरबजीत सिंह (अध्यक्ष, पंजाबी साहित्य अकादमी), डॉ. दलजीत सिंह (पूर्व प्रमुख, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला) और डॉ. जसबीर सिंह (चेयरमैन, इतिहास विभाग, पीयू) शामिल रहे।

राज्यपाल और सत्यपाल जैन से प्राप्त किया आशीर्वाद
चंडीगढ़ प्रवास के दौरान लेखक रिशु वालिया ने पंजाब के माननीय राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात की और उन्हें अपनी पुस्तक भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा, उन्होंने पूर्व सांसद और भारत के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन से भी मुलाकात की और सिख इतिहास को सहेजने के अपने इस प्रयास पर चर्चा की।

विरासत और वैश्विक डायस्पोरा का संगम
इस पुस्तक का विमोचन न केवल लेखक की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह विरासत, इतिहास और वैश्विक भारतीय डायस्पोरा के बीच के महत्वपूर्ण संबंधों को भी मजबूत करता है। वक्ताओं ने कहा कि यह पुस्तक भावी पीढ़ियों के लिए सिख योद्धाओं और आध्यात्मिक गुरुओं की विरासत को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगी।

कार्यक्रम के दौरान रिशु वालिया के साथ जगतेर सिंह, राकेश शर्मा, रुपिंदर पाल सिंह और सर्वप्रीत सिंह भी मौजूद रहे। पंजाब यूनिवर्सिटी के इतिहास विभाग के छात्रों और शोधकर्ताओं ने भारी संख्या में पहुंचकर इस अकादमिक और सांस्कृतिक चर्चा को सफल बनाया।

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