Edited By Kamini,Updated: 04 Mar, 2026 01:35 PM

होली का त्योहार खुशियों और मेल-मिलाप का प्रतीक है, लेकिन डिजिटल दौर में यही अवसर साइबर ठगों के लिए कमाई का जरिया बनता जा रहा है।
पंजाब डेस्क : होली का त्योहार खुशियों और मेल-मिलाप का प्रतीक है, लेकिन डिजिटल दौर में यही अवसर साइबर ठगों के लिए कमाई का जरिया बनता जा रहा है। ऐसे में अगर आपको होली गिफ्ट के नाम पर कोई Link आए तो गलती से भी उसे क्लिक न करें। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि होली के खास तोहफों, इनाम या भारी छूट का लालच देने वाले मैसेज लोगों को बड़ी आर्थिक क्षति पहुंचा सकते हैं। सीधा-सीधा कहें तो आपके बैंक अकाउंट खाली हो सकता है। त्योहार की खुशियों के बीच सतर्क रहना बेहद जरूरी है, ताकि एक छोटी सी लापरवाही आपकी मेहनत की कमाई पर भारी न पड़ जाए।
जानकारी के मुताबिक ठग अक्सर व्हाट्सऐप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए आकर्षक लिंक भेजते हैं। इन संदेशों में दावा किया जाता है कि किसी नामी कंपनी या बैंक की ओर से “होली गिफ्ट” दिया जा रहा है। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर क्लिक करता है, उसे एक एपीके फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। यह फाइल असल में मालवेयर होती है। यदि यूजर इसे अपने फोन में इंस्टॉल कर लेता है, तो मोबाइल का नियंत्रण दूर बैठे अपराधियों के हाथ में चला जाता है। फोन उपयोगकर्ता के पास रहता है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर नजर साइबर ठग रखते हैं। मालवेयर इंस्टॉल होने के बाद ठग मोबाइल में आने वाले मैसेज, ईमेल और यहां तक कि गैलरी तक पहुंच बना लेते हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि वे OTP (वन टाइम पासवर्ड) भी पढ़ सकते हैं। इसके जरिए बैंक खाते, Paytm, Google Pay या अन्य ऑनलाइन बैंकिंग ऐप्स से कुछ ही मिनटों में पैसे ट्रांसफर कर लिए जाते हैं।
निजी जानकारी भी खतरे में
यह धोखाधड़ी सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रहती। मोबाइल में मौजूद निजी तस्वीरें, दस्तावेज और अन्य गोपनीय डेटा भी चोरी हो सकता है। बाद में इन जानकारियों का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग या अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
रखें सावधानी?
- अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
- किसी भी एपीके फाइल को आधिकारिक ऐप स्टोर के बाहर से डाउनलोड न करें।
- ओटीपी या बैंकिंग जानकारी किसी से साझा न करें।
- कोई भी ऑफिशियल ऑर्गनाइज़ेशन या बैंक आपसे WhatsApp पर ऐप्स इंस्टॉल करने के लिए कभी नहीं कहता।
- संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत बैंक और साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) पर शिकायत करें।
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