नोटों के हारों पर पड़ी महंगाई की मार, शगुन डालना हुआ महंगा

Edited By Kalash,Updated: 04 May, 2026 11:06 AM

currency garland price hike

पंजाब में जहां पिछले दिनी जंग की दहशत व आर्थिक स्थिरता के कारण महंगाई आसमान को छू रही थी वहीं अब इसका असर शादी-विवाह के शगुनों पर भी पड़ना शुरू हो गया है।

अमृतसर (सर्बजीत): पंजाब में जहां पिछले दिनी जंग की दहशत व आर्थिक स्थिरता के कारण महंगाई आसमान को छू रही थी वहीं अब इसका असर शादी-विवाह के शगुनों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। रसोई के राशन व रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ने के बाद अब खुशी के मौकों पर इस्तेमाल होने वाले ‘नोटों के हार’ आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि हार बनाने वाले कारीगर असल रकम से लगभग 80 प्रतिशत तक अधिक पैसे वसूल रहे हैं।

धार्मिक और ऐतिहासिक शहर अमृतसर जो अपने शानदार विवाह व खुले खर्च के लिए जाना जाता है वहां नोटों के हार का कारोबार काफी बड़ा है। हाल बाजार, राम बाग, गुरु बाजार सहित अन्य प्रमुख बाजार के अलावा और प्रमुख व्यापारक केंद्रों में नोटों के हार बनाने वाली दुकानों पर पहले जहां ग्राहकों की भीड़ लगी रहती थी, वहीं अब महंगाई के कारण सन्नाटा देखने को मिल रहा है। कारीगरों का कहना है कि हार बनाने में इस्तेमाल होने वाला सामान जैसे गत्ता, चमकीली टेप, मोती और फूल महंगे हो गए हैं, जिस कारण उन्हें मजबूरी में दाम बढ़ाने पड़े हैं।

80 प्रतिशत से अधिक वसूली से लोग परेशान 

अगर कोई व्यक्ति 1000 रुपए के नोटों का हार बनवाना चाहता है तो उसे लगभग 1600 से 1800 रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी सीधे तौर पर ग्राहकों की जेब पर असर डाल रही है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह स्थिति काफी परेशानी भरी बन गई है। लोगों का कहना है कि पहले ही महंगे मैरिज पैलेस, कैटरिंग और कपड़ों के खर्च ने कमर तोड़ रखी है, ऐसे में नोटों के हार जैसी परंपराएं निभाना भी मुश्किल हो गया है।

कारण और प्रभाव 

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार पंजाब में बढ़ती महंगाई का असर हर वर्ग पर पड़ा है। अमृतसर में कोलकाता से आए एक परिवार ने बताया कि वे एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए आए हैं और उन्हें यहां राम बाग बाजार में काफी महंगे दामों पर सेहरे बनवाने पड़े। ग्राहक ने बताया कि पहले हार की मेकिंग चार्ज 10 से 20 प्रतिशत होती थी लेकिन अब 80 प्रतिशत तक वसूली करना अनुचित है।

दूसरी ओर दुकानदारों का कहना है कि नए नोटों की कमी और बैंकों से नई करंसी लेने के लिए भारी कमीशन देना पड़ता है, जिसका बोझ आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ता है। अमृतसर सहित पूरे पंजाब में इस समय नोटों के हार का कारोबार मंदी के दौर से गुजर रहा है। यदि महंगाई की यही रफ्तार जारी रही, तो आने वाले समय में यह पुरानी परंपरा केवल अमीर वर्ग तक सीमित होकर रह जाएगी। सरकार से मांग की जा रही है कि बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण किया जाए ताकि आम लोग भी बिना आर्थिक बोझ के अपनी खुशियां मना सकें।

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