Edited By Urmila,Updated: 10 Oct, 2026 03:55 PM

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के होशियारपुर जिले में बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी माइनिंग और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है।
चंडीगढ़ (गंभीर) : पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने पंजाब के होशियारपुर जिले में बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी माइनिंग और पर्यावरण को हो रहे नुकसान के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को मामले की शुरुआती जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, पूरे इलाके का ड्रोन सर्वेक्षण करने और गूगल अर्थ, ISRO या किसी दूसरे भरोसेमंद सोर्स से थ्री-डायमेंशनल सैटेलाइट इमेज लेने का भी आदेश दिया है। कोर्ट का मानना है कि इन तस्वीरों समय के साथ इलाके में हुए तबदीलियां और माइनिंग से हुए नुकसान का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने साफ किया कि जांच और सर्वे का पूरा खर्च पंजाब सरकार उठाएगी।
चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने राहुल मनचंदा की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिए। कोर्ट ने पहले होशियारपुर की डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सेक्रेटरी को संबंधित जगहों का इंस्पेक्शन करके रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। 14 सितंबर, 2026 को चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कम अथॉरिटी के सेक्रेटरी की तरफ से पेश रिपोर्ट में जिले के कई गांवों में बड़े पैमाने पर माइनिंग की पुष्टि की गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग जगहों पर माइनिंग की गहराई 20 से 110 फीट तक थी। कुछ जगहों पर पानी भरा होने और पहुंचने में मुश्किल होने की वजह से गहराई का पता नहीं चल सका। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि निरीक्षण टीम को असली जगहों पर पहुंचने से रोकने या उन्हें दूसरी जगहों पर भेजने की कोशिश की गई। कई जगहों पर रास्ते बंद मिले जबकि कई जगहों पर सड़कें टूटी हुई थीं।
निरीक्षण के दौरान, कई पत्थर क्रशर यूनिट्स पर कोई वर्कर नहीं मिला। हालांकि, वहां ट्रक, टिपर और JCB जैसी भारी मशीनरी खड़ी थीं। माइनिंग मटीरियल के ढेर भी मिले। रिपोर्ट में शक जताया गया कि निरीक्षण की जानकारी पहले ही संबंधित अधिकारियों तक पहुंच गई थी, जिसकी वजह से उस दिन काम रोक दिया गया था। कोर्ट ने इन हालातों को गंभीर मानते हुए कहा कि बड़े पैमाने पर गैर-कानूनी माइनिंग को रोकने के लिए जिम्मेदार संबंधित अधिकारी पहली नजर में अपनी ड्यूटी में असफल रहे हैं। सरकारी अधिकारियों और माइनिंग में शामिल लोगों के बीच मिलीभगत के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता।
इससे पहले राज्य सरकार की तरफ से फाइल किए गए एफिडेविट में कहा गया था कि होशियारपुर जिले में कोई भी अप्रूव्ड कमर्शियल माइनिंग साइट, जमीन मालिक की माइनिंग साइटें या क्रशर माइनिंग साइट नहीं चल रही थी। जिले में 31 स्टोन क्रशर रजिस्टर्ड बताए गए थे, जिनमें से 26 चालू थे। हालांकि, उनके रॉ मटेरियल के सोर्स के बारे में कोर्ट को संतोषजनक जानकारी नहीं दी गई। C.B.I. अब शुरुआती जांच के दौरान जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगी। वह जिला प्रशासन, माइनिंग डिपार्टमेंट और एक्सपर्ट संस्थाओं से भी मदद ले सकती है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर, 2026 को होगी। तब तक CBI को अपनी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को देनी होगी।
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