Edited By Kamini,Updated: 05 Oct, 2026 11:36 AM

पंजाब सरकार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के आदेश दिए हैं।
पंजाब डेस्क : पंजाब सरकार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के एक मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने CBI को मामले की जांच कर दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जानकारी के मुताबिक, यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के डीजीपी को भेजे गए पत्रों के बाद हाईकोर्ट पहुंचा। ED ने कथित भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी। पुलिस की ओर से मामला दर्ज नहीं किए जाने के बाद ED ने हाईकोर्ट का रुख किया। इसके बाद मामले में जनहित याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने के निर्देश दिए।
ED ने पत्रों में लगाए ये आरोप
ED के अनुसार, जुलाई और अगस्त 2026 में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव को कई पत्र भेजे गए थे। इनमें कथित भ्रष्टाचार, सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडर, नीतिगत फैसलों और जमीन के इस्तेमाल में बदलाव समेत विभिन्न सरकारी कार्यों को प्रभावित करने के आरोपों का उल्लेख किया गया था। ED की कार्रवाई में नितिन गोहल, रियल एस्टेट कारोबारी अजय सहगल, सुरेश कुमार बजाज समेत कुछ अन्य लोगों के नाम सामने आने की बात कही गई है। जांच में मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मण से जुड़े संपर्कों का भी उल्लेख किया गया है। ED का आरोप है कि कुछ लोग सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और अन्य प्रशासनिक फैसलों को प्रभावित करने के लिए कथित तौर पर बिचौलियों की भूमिका निभा रहे थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI इन आरोपों की जांच करेगी और दो महीने में अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करेगी।
मामले का एक पहलू चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) और मनी लॉन्ड्रिंग जांच से भी जुड़ा है। ED की कार्रवाई करीब 348 करोड़ रुपये के सनटेक सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के दौरान आगे बढ़ी। एजेंसी का आरोप है कि कुछ रियल एस्टेट संस्थाओं को जमीन के इस्तेमाल में बदलाव और अन्य सरकारी मंजूरियां दिलाने के लिए अधिकारियों के जरिए प्रभाव डालने की कोशिश की गई। ED के पत्र मिलने के बाद पंजाब पुलिस ने मामले में सीधे FIR दर्ज करने के बजाय ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन से कानूनी राय मांगी थी। इसके बाद ED ने दोबारा पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की। सितंबर 2026 में ED ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब पुलिस को कई बार पत्र भेजे गए, लेकिन अब तक FIR दर्ज नहीं हुई।
हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच
मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचने के बाद अदालत ने अगस्त 2026 में पंजाब सरकार से जवाब मांगा था। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर प्रकृति का बताते हुए राज्य से जवाब तलब किया और ED को डीजीपी को भेजे गए पत्र भी अदालत के समक्ष रखने को कहा। सितंबर में मामले पर फैसला सुरक्षित रखा गया। अब हाईकोर्ट ने जांच CBI को सौंपते हुए दो महीने में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ED के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज किया है। वहीं, नितिन गोहल ने भी आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि चैट और बातचीत को गलत संदर्भ में पेश किया गया है। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद CBI पूरे मामले में सामने आए आरोपों और साक्ष्यों की जांच करेगी।
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