Edited By Kamini,Updated: 01 Oct, 2026 02:44 PM

पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित गैर-कानूनी माइनिंग के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
चंडीगढ़ (गंभीर): पठानकोट और गुरदासपुर जिलों में कथित गैर-कानूनी माइनिंग के मामलों को गंभीरता से लेते हुए पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को तुरंत कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने 3 जुलाई, 2026 की सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि दोनों जिलों में करीब 233 ऐसी साइट की पहचान की गई है जहां गैर-कानूनी माइनिंग चल रही है। कोर्ट ने साफ किया कि जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए, नहीं तो मामले की जाँच किसी इंडिपेंडेंट एजेंसी को सौंपने पर विचार किया जा सकता है।
4 हफ़्ते में कार्रवाई करने और हलफनामा दाखिल करने का आदेश
चीफ जस्टिस अश्विनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने पंजाब सरकार को सर्वे ऑफ इंडिया रिपोर्ट की जांच करने और सही कार्रवाई करने के लिए चार हफ़्ते का समय दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर समय-सीमा के अंदर सही कदम नहीं उठाए गए, तो अगली सुनवाई में संबंधित अधिकारियों की निजी जिम्मेदारी तय की जा सकती है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर, 2026 तय की गई है। उस समय तक पंजाब सरकार को हलफनामा दाखिल करके बताना होगा कि सर्वे ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की गई।
माइनिंग डायरेक्टर का हलफनामा भी 48 घंटे में मांगा गया
बेंच ने अपने पहले के आदेश के बावजूद पंजाब डायरेक्टर, माइनिंग द्वारा हलफनामा दाखिल न करने पर भी नाराजगी जताई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि डायरेक्टर माइनिंग का हलफनामा 48 घंटे के अंदर दाखिल किया जाए और उसकी एक एडवांस कॉपी याचिकाकर्ताओं के वकीलों को दी जाए। यह मामला पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर ज़िलों में कथित अवैध माइनिंग गतिविधियों से जुड़ी याचिकाओं के एक ग्रुप की सुनवाई के दौरान सामने आया। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स को भी मामले में पार्टी बनाने की इजाज़त दी थी। कोर्ट ने साफ किया कि अगर संबंधित अधिकारी तुरंत सही कार्रवाई नहीं करते हैं, तो अगली सुनवाई में उनकी पर्सनल जिम्मेदारी तय की जाएगी।
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