Edited By Vatika,Updated: 28 Apr, 2026 10:49 AM
लुधियाना(सहगल): देश में कुछ दिन पहले बी.पी., शूगर सहित खतरनाक बीमारियों की दवाइयों के सैंपल फेल होने की चौंकाने वाली बात सामने आई है। दरअसल, सिरदर्द, पेट दर्द, बी.पी., शूगर सहित 141 दवाइयों के सैंपल फेल हो गए हैं। सबसे हैरानी की बात ये है कि इनमें से 47 दवाएं हिमाचल प्रदेश के बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़, कालाअम्ब, ऊना और सोलन में बनी है जबकि साथ दवाइयां पंजाब की भी शामिल थीं।
हिमाचल में अलर्ट, पंजाब में बिना जांच बिक रही दवाइयां
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की जांच में देश में बनी 141 दवाइयों के सैंपल फेल हुए हैं। यह दवाइयां ज्यादातर सिर दर्द, पेट दर्द, बी.पी., शूगर, अल्सर, हृदय रोग जैसी खतरनाक बीमारी व विभिन्न संक्रामक बीमारियों में इस्तेमाल की जाती है ड्रग अलर्ट के अनुसार इन दवाइयों की गुणवत्ता जांच फेल होने पर इन्हें नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी घोषित किया गया है। इसके साथ ही कंपनियों को नोटिस जारी करके दवाइयों का स्टाक वापस मंगवाने के सख्त आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि, हिमाचल से पूरे देश और विदेश में दवाइयां सप्लाई की जाती है।
हिमाचल के ड्रग विभाग ने जारी किया अलर्ट
हिमाचल प्रदेश में बनी दवाओं के 47 सैंपल फेल हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने इस माह का ड्रग अलर्ट जारी किया है। वहीं कुछ पाऊडर, आयरन व विटामिन की गोलियां भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल हो गईं। सी.डी.एस.सी.ओ. के अलर्ट में मेहंदी, टूथपेस्ट, साबुन सहित अन्य कई और उत्पादों के सैंपल भी फेल हुए हैं। सी.डी.एस.सी.ओ.के ड्रग अलर्ट के अनुसार हिमाचल के अतिरिक्त उत्तराखंड की 20, गुजरात की 23, पंजाब की 7, राजस्थान की 6, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा की 5-5 दवाएं, तमिलनाडु व महाराष्ट्र की 3-3, केरल, पड्डुचेरी, चेन्नई, जे. एंड के., तेलंगाना के 2-2 दो और यूपी, सिक्किम, झारखंड, दिल्ली, वैस्ट बंगाल, आंध्र प्रदेश और उडीसा का एक-एक दवा का सैंपल फेल हुआ है।
पंजाब में नहीं की जाती गुणवत्ता की परवाह
हिमाचल प्रदेश का ड्रग विभाग जहां दवाइयां की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए रैगुलर सैंपलिंग पर जोर देता है वहीं पंजाब में ड्रग विभाग सूप्त अवस्था में रहता है परंतु जांच कभी कभार ही की जाती है इसके अलावा जिले में दवाइयां बनाने वाली कई इकाइयां काम कर रही हैं सूत्रों ने बताया कि ड्रग विभाग के अधिकारी बाजार में जाते हैं तो है अथवा दवा बाजार से जुड़े लोग उनके कार्यालय में आते रहते हैं परंतु सैंपलिंग के नाम पर कार्रवाई जीरो ही रहती है। क्या राज्य अथवा जिले को लोगों को गुणवत्तापूर्ण दवाइयां खाने का अधिकार नहीं है ?
आरटीआई एक्टिविस्ट ने कराई जांच की मांग
शहर के एक आर.टी.आई. एक्टिविस्ट ने जितेंद्र सिंह शंटी मैंबर पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन को पत्र लिखकर जोनल लाइसैंसिंग अथॉरिटी के ऑफिस के बारे में शिकायत की है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली दवाओं और दूसरे फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स के सही संख्या में सैंपल नहीं ले रहे हैं। यह मामला सीधे तौर पर उन सभी मरीज़ों की ज़िंदगी और आज़ादी से जुड़ा है जो दवाएं और दूसरे फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स ले रहे हैं और इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनहित में ऑफिस ऑफ द ज़ोनल लाइसैंसिंग अथॉरिटी लुधियाना से डाटा, रिपोर्ट मांगी जाए कि पिछले 2 सालों में उन्होंने दवाइयों और दूसरे फार्मास्यूटिकल प्रोडक्ट्स के कितने सैंपल लिए हैं और उसका डाटा, रिपोर्ट महीने के हिसाब से मांगी जाए ताकि फैक्ट्स सामने आ सकें।