GST Department अपने ही बनाए जाल में फंसा! 9 फर्जी फर्मों पर कार्रवाई के बाद उठे सवाल

Edited By Urmila,Updated: 08 Jun, 2026 10:40 AM

big question on gst department after action on 9 fake firms

राज्य जी.एस.टी. विभाग द्वारा 9 कथित फर्जी फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ दर्ज करवाए गए मामलों ने एक ओर जहां टैक्स चोरी के बड़े नैटवर्क का खुलासा किया है।

लुधियाना (सेठी): राज्य जी.एस.टी. विभाग द्वारा 9 कथित फर्जी फर्मों और उनके संचालकों के खिलाफ दर्ज करवाए गए मामलों ने एक ओर जहां टैक्स चोरी के बड़े नैटवर्क का खुलासा किया है, वहीं दूसरी ओर विभागीय कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

विभाग का दावा है कि इन फर्मों ने फर्जी दस्तावेजों, गलत जानकारियों तथा अन्य व्यक्तियों के मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर जी.एस.टी. पंजीकरण प्राप्त किया और करोड़ों रुपये के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आई.टी.सी.) का लाभ उठाया लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दस्तावेज, मोबाइल नंबर और बैंक खाते संदिग्ध थे तो इन फर्मों को जी.एस.टी. नंबर जारी कैसे हो गए। आखिर वह कौन-सा सत्यापन था जिसके बाद इन संस्थाओं को कारोबार करने की अनुमति मिल गई?

जी.एस.टी. व्यवस्था में पंजीकरण के दौरान आधार प्रमाणीकरण, दस्तावेजों की जांच, मोबाइल सत्यापन और आवश्यकता पड़ने पर भौतिक निरीक्षण जैसी प्रक्रियाएं मौजूद हैं। ऐसे में यदि विभाग की वर्तमान जांच सही है तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि प्रारंभिक स्तर पर इन खामियों को पकड़ने में सिस्टम क्यों विफल रहा।

करोड़ों का नुकसान होने तक कार्रवाई क्यों नहीं

व्यापारिक हलकों में यह चर्चा भी जोरों पर है कि यदि इन फर्मों के माध्यम से करोड़ों रुपए का फर्जी आई.टी.सी. बनाया गया तो विभाग को इसकी जानकारी समय रहते क्यों नहीं मिली। आखिर ऐसे कौन-से कारण रहे कि कथित फर्जीवाड़ा लंबे समय तक चलता रहा और कार्रवाई तब हुई जब सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंच चुका था।

विशेषज्ञों का मानना है कि फर्जी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई आवश्यक है लेकिन केवल बाद में एफ.आई.आर. दर्ज कर देना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि उन कारणों की पहचान की जाए जिनकी वजह से ऐसे नेटवर्क अस्तित्व में आए और लंबे समय तक सक्रिय रहे।

अब ईमानदार कारोबारी भी भुगत सकते हैं परिणाम

जानकारों के अनुसार विभाग की अगली कार्रवाई उन व्यापारियों और संस्थानों तक भी पहुंच सकती है जिन्होंने कभी न कभी इन फर्मों के साथ व्यापारिक लेन-देन किया होगा। ऐसे मामलों में विभाग अक्सर खरीद-बिक्री रिकॉर्ड, आई.टी.सी. दावे और अन्य दस्तावेजों की जांच करता है।

इसका सीधा असर उन कारोबारियों पर भी पड़ सकता है जिन्होंने सामान्य व्यावसायिक प्रक्रिया के तहत इन फर्मों के साथ कारोबार किया हो। ऐसे व्यापारियों को नोटिस, दस्तावेजी जांच और अन्य विभागीय प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि फर्जीवाड़ा करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए लेकिन ईमानदार करदाताओं को अनावश्यक परेशानियों से बचाने के लिए भी स्पष्ट नीति होनी चाहिए।

सीजी.एस.टी. और राज्य जी.एस.टी. के बीच समन्वय पर भी चर्चा

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इन कथित फर्जी फर्मों में से कई का पंजीकरण केंद्रीय जी.एस.टी. (सीजी.एस.टी.) के अधिकार क्षेत्र में बताया जा रहा है। ऐसे में यह मुद्दा भी चर्चा में है कि यदि निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारियां विभिन्न विभागों में विभाजित थीं, तो समय रहते सूचना सांझा करने और समन्वय स्थापित करने में देरी क्यों हुई।

कर विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल फर्मों के खिलाफ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि पूरी पंजीकरण और निगरानी प्रक्रिया की समीक्षा भी जरूरी है, ताकि भविष्य में सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाले नेटवर्क शुरुआती चरण में ही पकड़े जा सकें।

करोड़ों के कथित घोटाले के बीच जवाबदेही के मुद्दे

• यदि दस्तावेज फर्जी थे तो जी.एस.टी. नंबर जारी कैसे हुआ?
• पंजीकरण के समय सत्यापन प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही?
• क्या सभी मामलों में आवश्यक भौतिक सत्यापन किया गया था?
• कथित फर्जीवाड़ा कितने समय तक चलता रहा?
• करोड़ों रुपए का आई.टी.सी. बनने तक निगरानी तंत्र क्या कर रहा था?
• विभाग को इसकी जानकारी कब और कैसे मिली?
• क्या प्रक्रिया में हुई किसी चूक या लापरवाही की भी समीक्षा होगी?
• यदि कुछ फर्में सी.जी.एस.टी के अधीन थीं तो विभागों के बीच समन्वय में कमी कहां रही?
• इन फर्मों से कारोबार करने वाले मौजूदा व्यापारियों को अब किस प्रकार की जांच का सामना करना पड़ेगा?

व्यापारिक संगठनों का कहना है कि यदि फर्जी फर्मों के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है तो भविष्य में ऐसी फर्मों को पंजीकरण मिलने से रोकना उससे भी अधिक जरूरी है। क्योंकि जब तक सिस्टम की कमजोरियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक कार्रवाई के बावजूद ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता।

लुधियाना में 9 कंपनियों और उनके संचालकों पर केस दर्ज

जानकारी के अनुसार राज्य जी.एस.टी. विभाग की शिकायतों के आधार पर लुधियाना पुलिस ने कथित जी.एस.टी. फर्जीवाड़े के खिलाफ कार्रवाई करते हुए शहर के विभिन्न थाना क्षेत्रों में 9 कंपनियों और उनके संचालकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए हैं।

आरोप है कि इन फर्मों ने फर्जी दस्तावेजों, गलत जानकारियों तथा अन्य व्यक्तियों के मोबाइल नंबरों और बैंक खातों का इस्तेमाल कर जी.एस.टी. पंजीकरण हासिल किया, जाली इलैक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड तैयार किया और बाद में फर्जी बिलिंग के जरिए करोड़ों रुपए का इनपुट टैक्स क्रैडिट (आई.टी.सी.) प्राप्त कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया। सूत्रों के अनुसार यह कार्रवाई राज्य जी.एस.टी. विभाग द्वारा की गई विस्तृत जांच के बाद की गई है।

इन फर्मों के खिलाफ दर्ज हुए मामले

अल्फा ट्रेडिंग कंपनी : थाना दरेसी
सी.के. इंडस्ट्रीज : थाना साहनेवाल
पूजा एंटरप्राइजेज : थाना डाबा
श्री राधे ट्रेडिंग कंपनी : थाना डाबा
सितम एंटरप्राइजेज : थाना डाबा
गणपति पैकर्स इंडस्ट्रीज एवं संचालक अमित कुमार : थाना शिमलापुरी
बैनीपाल इंडस्ट्रीज : थाना डिवीजन नंबर 6
कृष्णा ट्रेडर्स एवं संचालक कृष्ण कुमार : थाना टिब्बा
खालसा एंटरप्राइजेज एवं संचालक सोहनजीत सिंह : थाना शिमलापुरी

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