ट्रैक्टर/थ्रैशर टायरों व ट्यूबों पर 28 प्रतिशत GST लगाने के खिलाफ उग्र हुए मैन्यूफैक्चरर्स

Edited By Punjab Kesari,Updated: 03 Jun, 2017 03:44 AM

28 percent gst raging manufacturers against appraisal

केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई से प्रस्तावित जी.एस.टी. को लेकर देशभर में वाद-विवाद.........

जालन्धर(धवन): केंद्र सरकार द्वारा 1 जुलाई से प्रस्तावित जी.एस.टी. को लेकर देशभर में वाद-विवाद का विषय छिड़ा हुआ है। अब जालंधर टायर/ट्यूब मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन ने केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेतली से मांग की है कि वह ट्रैक्टर/थ्रैशर टायर्स तथा एनिमल ड्रिवन व्हीकल (ए.डी.वी.) टायरों को जी.एस.टी. के दायरे से बाहर रखें। 

जालंधर टायर/ट्यूब मैन्यूफैक्चरर्स एसोसिएशन के संदीप जैन (के.आर.एम. टायर्स), प्रितपाल सिंह (स्पीडवेज टायर्स) तथा रजनीश धवन (एशियन टायर्स) ने एक संयुक्त वक्तव्य में कहा है कि टायर-ट्यूब लघु स्तरीय उद्यमों में शामिल हैं। यह एम.एस.एम.ई. के तहत आते हैं। अब यह कहा जा रहा है कि टायर व ट्यूबों पर भी जी.एस.टी. को लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्यों ने ए.डी.वी. टायरों को वैट तथा अन्य स्थानीय टैक्सों से मुक्त रखा हुआ है इसलिए इन वस्तुओं को नई जी.एस.टी. टैक्स प्रणाली में ए.डी.वी. से संबंधित उत्पादों को छूट वाले उत्पादों की गिनती में रखा जाए। 

संदीप जैन, प्रितपाल सिंह, रजनीश धवन तथा अन्य सदस्यों परमजीत सिंह, रजिन्द्र पुरी, अशोक बुद्धिराजा, राजेश खन्ना, राहुल मल्होत्रा, कुणाल सेखड़ी, आशु चोपड़ा, गुरप्रीत सिंह आदि ने कहा कि कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है। अगर टायरों पर 28 प्रतिशत टैक्स लागू कर दिया गया तो उस स्थिति में किसानों पर भारी बोझ पड़ जाएगा इसलिए किसानों को खुशहाल रखने के लिए जरूरी है कि टायरों को टैक्स मुक्त रखा जाए। उन्होंने कहा कि ट्रैक्टर तथा उसके अन्य उत्पादों को 12 प्रतिशत जी.एस.टी. के घेरे में रखा जा रहा है तो ऐसी स्थिति में टायरों को क्यों 28 प्रतिशत जी.एस.टी. के घेरे में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि साइकिल टायरों पर अगर 5 प्रतिशत टैक्स लागू होता है तो मोटरसाइकिल टायरों पर भी इतना ही टैक्स लागू होना चाहिए। 

टायर व ट्यूब आदि ऐश्वर्य वाली वस्तुओं में शामिल नहीं हैं कि उन्हें 28 प्रतिशत टैक्स के घेरे में रखा जाए। इन्हें 12 प्रतिशत श्रेणी में शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि टायर व ट्यूब का उत्पादन करने वाले उद्योग बहुत छोटे उद्योगों की श्रेणी में आते हैं। इन पर तो न्यूनतम एक्साइज ड्यूटी भी लागू नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अब इन पर टैक्स जी.एस.टी. के तहत सीधे तौर पर बढ़ाकर 28 प्रतिशत कर देना न्यायसंगत नहीं है। इससे छोटे उद्योगों का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।उन्होंने कहा कि टायर व ट्यूब उद्योग से जुड़े छोटे उद्यमी अपनी मांग को लेकर वित्त मंत्री से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय टायर उद्योग संकट के दौर से गुजर रहा है।

पिछले कुछ महीनों में ई-रिक्शा टायरों की बिक्री में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि चीन से सस्ते टायर व ट्यूब भारत में आ रहे हैं ऐसी स्थिति में किस तरह से भारतीय उत्पाद उनका मुकाबला कर सकेंगे। पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, एन.सी.आर., दक्षिण भारत तथा गुजरात में टायर-ट्यूब के यूनिट स्थापित हैं जहां हजारों लोगों को रोजगार मिला हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार को टायर व ट्यूब उद्योग की समस्याओं की तरफ ध्यान देना चाहिए तथा उनकी मांग के अनुसार जी.एस.टी. को लागू किया जाए।

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