Edited By Kalash,Updated: 02 Mar, 2026 10:34 AM

विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अजय भांबी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ते सैन्य तनाव केवल घटनाएं नहीं बल्कि ग्रहों की विशेष स्थिति का संकेत हैं।
जालंधर/चंडीगढ़ (धवन): विश्व प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित अजय भांबी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया में बढ़ते सैन्य तनाव केवल घटनाएं नहीं बल्कि ग्रहों की विशेष स्थिति का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि बृहस्पति (गुरु) के अतिचारी होने के कारण वह मानवता की रक्षा करने की सामान्य भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभा पा रहा है, जिसके चलते विश्व स्तर पर संघर्ष और अस्थिरता बढ़ने की संभावना बन रही है।
भांबी ने कहा कि आगामी वर्ष में शनि ग्रह अपनी नीच राशि मेष में प्रवेश करेगा, जो अग्नि तत्व की राशि मानी जाती है। उन्होंने चेतावनी दी कि शनि का लगभग अढ़ाई वर्ष तक मेष राशि में रहना विश्व शांति के लिए चुनौतीपूर्ण समय साबित हो सकता है। इस अवधि में देशों के बीच टकराव, सैन्य गतिविधियां तथा राजनीतिक अस्थिरता बढ़ने की आशंका रहेगी, इसलिए विश्व नेतृत्व को संयम और कूटनीति का रास्ता अपनाना चाहिए।
उन्होंने वर्तमान अमरीका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की भी प्रश्न कुंडली के अनुसार विश्लेषण करते हुए कहा कि दिल्ली में एक मार्च को शाम 6.34 बजे सिंह लग्न उदित हो रहा है तथा 5 प्रमुख ग्रह सप्तम भाव में स्थित हैं। ज्योतिषीय दृष्टि से सप्तम भाव ईरान का प्रतिनिधित्व करता है, जो इस समय कमजोर स्थिति में दिखाई दे रहा है। इसके चलते अमेरिका समर्थित शक्तियों द्वारा ईरान पर दबाव और हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अजय भांबी के अनुसार गोचर में वर्तमान में मंगल और राहू की युति को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है, जो युद्ध, सैन्य गतिविधियों तथा अचानक तनाव बढ़ने के संकेत देती है। इसके साथ ही सूर्य, बुध और शुक्र भी कुंभ राशि में यह ग्रह स्थिति देशों के बीच मतभेद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा सकती है।
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आगामी 15 मार्च को सूर्य के राशि परिवर्तन (संक्रांति) के दौरान शनि के प्रभाव क्षेत्र में प्रवेश से राजनीतिक और सैन्य स्तर पर सख्ती बढ़ने की संभावना है। इसके बाद 2 अप्रैल 2026 को मंगल का भी इसी क्षेत्र में प्रवेश होने से तनाव और अधिक गहराने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर टकराव की स्थिति लंबी खिंच सकती है।
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