ऑनलाइन वसीका अप्वाइंटमैंट प्रक्रिया पर माफिया का कब्जा बरकरार!

Edited By Vatika,Updated: 18 Jun, 2019 03:23 PM

maintaining possession of mafia on appointment process

पंजाब सरकार द्वारा सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की इच्छा के तहत प्रदेशभर में  ऑनलाइन वसीका अप्वाइंटमैंट प्रक्रिया शुरू होते ही इस खेल के माहिर माफिया के लिए सोने की खान बन चुकी है।

लुधियाना (शारदा): पंजाब सरकार द्वारा सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में फैले भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की इच्छा  के तहत प्रदेशभर में  ऑनलाइन वसीका अप्वाइंटमैंट प्रक्रिया शुरू होते ही इस खेल के माहिर माफिया के लिए सोने की खान बन चुकी है। हालांकि लोकल लैवल पर अधिकारियों ने इस माफिया पर लगाम कसने का भरसक प्रयास किया पर इसमें पूरी तरह सफलता न मिलने के कारण इस प्रक्रिया पर माफिया राज जहां पांव जमा चुका है, वहीं आम आदमी को इसका खमियाजा चुकाना पड़ रहा है। 

दरअसल ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू होने से पहले आम आदमी को वसीका रजिस्टर्ड करवाने के लिए सब-रजिस्ट्रार दफ्तरों में सक्रिय दलालों की मदद लेनी पड़ती थी जिसकी एवज में वे तय फीस अदा करते थे। इस सिस्टम को खत्म करने व दलालों की सक्रियता को निष्प्रभावी करने के लिए ही सरकार ने ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट सिस्टम शुरू किया था परन्तु इसका आम जनता को फायदा कम और नुक्सान ’यादा हुआ। पहले तो लोग सीधा दलाल से सम्पर्क  कर वसीका रजिस्टर्ड करवा लेते थे परन्तु ऑनलाइन प्रक्रिया तहत उस जनता के लिए अप्वाइंटमैंट लेना कितना मुश्किल होगा जिनके लिए कम्प्यूटर या लैपटॉप चलाना आसमान को छूने जैसा है। जनता की इसी मजबूरी का जमकर फायदा उठाया जा रहा है।

मिलजुल कर चल रहा सारा खेल 
ऐसा नहीं है कि इस गोरखधंधे की खबर प्रशासन को नहीं है। अलबत्ता समय-समय पर कुछ सब-रजिस्ट्रार रजिस्टर्ड वसीके रोककर चैक भी करते हैं, परन्तु निचले स्टाफ  के साथ माफिया की जुगलबंदी के कारण और मुद्दा आम जनता से सीधा जुड़ा होने की वजह से कोई भी अधिकारी ज्यादा सख्ती करने से परहेज ही करता है, क्योंकि ऑनलाइन प्रक्रिया तहत तुरंत वसीका वापस करना अनिवार्य है। ऐसे में अगर कोई तहसीलदार वसीके चैक करने के नाम पर रोकता है तो उस पर इसकी आड़ में रिश्वत मांगने के आरोप लगने शुरू हो जाते हैं।


 माहिरों की हो रही चांदी 
ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट की प्रक्रिया ने उन चुनिंदा लोगों की खूब चांदी कर दी है जो इस खेल के माहिर हैं। आम आदमी अप्वाइंटमैंट लेने के लिए ऐसे माहिरों के पास जाने के लिए मजबूर है जहां उसे मुहमांगी फीस अदा करनी पड़ रही है। ’यादातर वसीका नवीस वसीका लिखने के बाद इन्हीं माहिरों से सम्पर्क  साधने के लिए मजबूर हैं। जिन लोगों ने अपने पास ऑनलाइन सिस्टम का मास्टर स्टाफ  रखा है, उनको छोड़ बाकी सबके लिए यही लोग मददगार बनकर अपना धंधा चला रहे हैं।


फर्जी नामों पर ली जा रही अप्वाइंटमैंट 
प्रशासन के भरसक प्रयासों के बावजूद ऑनलाइन अप्वाइंटमैंट लेने में माहिर खिलाड़ी फर्जी नामों पर अप्वाइंटमैंट लेकर जल्दी वसीका रजिस्र्ट करवाने के लिए मजबूर लोगों से 10 से 15 हजार की रकम वसूल रहे हैं। ये लोग तय वसीकों की अप्वाइंटमैंट प्रक्रिया का जमकर फायदा उठा रहे हैं। तहसील की क्षमता मुताबिक फीड वसीकों की गिनती ही इनके लिए वरदान बनी हुई है। जब तक आम आदमी ऑनलाइन प्रक्रिया की नियमित शर्तों को एक-एक करके भरता है, तब तक इस खेल की खिलाड़ी दर्जनों अप्वाइंटमैंट्स बुक कर लेते हैं। फर्जी नाम के तहत जब एक बार अप्वाइंटमैंट मिल जाती है तो फिक्स समय पर बाकी प्रक्रिया भरते समय जिसका वसीका रजिस्टर्ड करवाना है, उसकी डिटेल डाल दी जा रही है !


डी.सी. के प्रयास के बाद गिनती में हुई वृद्धि ने दिलाई राहत 
अगर बात पूर्वी कार्यालय की करें तो यह पहले वसीको की तय गिनती कम थी जिस कारण आम जनता को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इस बात का फायदा ऑनलाइन माफिया भी मुंहमांगी फीस मांगकर उठाता था लेकिन मामले की गम्भीरता को भांप डी.सी. प्रदीप अग्रवाल ने न सिर्फ  वसीकों की गिनती में बढ़ौतरी करवाई बल्कि तत्काल सुविधा को भी बढ़वा दिया।

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