Edited By Kalash,Updated: 25 Apr, 2026 05:23 PM

पूरे मालवा क्षेत्र के अंदर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचना चिंता का विषय बना हुआ है और ग्लोबल वार्मिंग का असर वातावरण पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है।
जलालाबाद (बंटी): पूरे मालवा क्षेत्र के अंदर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचना चिंता का विषय बना हुआ है और ग्लोबल वार्मिंग का असर वातावरण पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। अप्रैल महीने में ही तापमान के 40 डिग्री के पार जाने के कारण हर वर्ग प्रभावित हो रहा है। गर्मियों में भीषण लू के कारण बाजारों में भी मंदी का माहौल देखने को मिल रहा है। इस समय केवल ठंडे पेय पदार्थों की दुकानों पर ही भीड़ देखने को मिल रही है। दूसरी ओर विशेषज्ञ डॉक्टरों ने गर्मी में शरीर का तापमान बनाए रखने के लिए तरल पदार्थों का अधिक सेवन करने की सलाह दी है। लोग गर्मी और लू से बचने के लिए अपना मुंह और सिर ढक कर ही बाहर निकल रहे हैं। इसके अलावा गर्मी से बेहाल बेसहारा पशुओं को भी पीने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। माना जा रहा है कि मई, जून और जुलाई में तापमान में और लगातार बढ़ोतरी होगी।
डॉ. अश्वनी मिड्ढा, डॉ. आर.के. सेठी, डॉ. विजय छाबड़ा और डॉ. नरेश चुघ ने जानकारी देते हुए बताया कि लू लगने से शरीर का तापमान बढ़ता है जो बीमारियों का मुख्य कारण बनता है। शरीर का तापमान जो औसत 37 डिग्री के करीब रहता है, वह लू के कारण बढ़कर यदि 41 डिग्री तक पहुंच जाए तो इससे हाइपरथर्मिया बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है। इसके कारण डिहाइड्रेशन होने से शरीर के अंदर पानी की कमी हो जाती है।
इन बीमारियों से बचने के लिए धूप में निकलने से पहले कुछ खा-पीकर निकलें और तरल पदार्थ जैसे लस्सी, नींबू पानी और दूध का अधिक से अधिक सेवन करें। गर्मियों में पानी के कारण फैलने वाली बीमारियों के साथ-साथ डेंगू और मलेरिया होने का खतरा भी बना रहता है। इसलिए हमें अपने आसपास सफाई रखनी चाहिए और पूरी बाजू के कपड़े पहनने चाहिए। यदि बीमारी का कोई भी लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लेनी चाहिए। खाली पेट धूप में काम करने वाले मजदूरों को हाइपरथर्मिया बुखार का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, जिससे बचाव के लिए शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखनी चाहिए। बच्चों में डायरिया होने पर उन्हें समय-समय पर ओ.आर.एस. का घोल पिलाना चाहिए।
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