लुधियाना में करोड़ों का UCHC फेल, न स्टाफ न इलाज, सिर्फ नाम का अस्पताल

Edited By Vatika,Updated: 07 Apr, 2026 09:37 AM

uchc hospital ludhiana

पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं ..

लुधियाना(राज): पंजाब सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा राज्य में बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे जमीनी स्तर पर कितने 'खोखले' हैं, इसकी जीती-जागती मिसाल सिविल सर्जन कार्यालय परिसर में बनी 10 बेड की अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (UCHC) की इमारत पेश कर रही है।

'स्टाफ' की कमी के चलते वेंटिलेटर पर खुद अस्पताल
करोड़ों रुपये खर्च करने और खुद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह द्वारा बड़े तामझाम के साथ उद्घाटन करने के बावजूद यह अस्पताल आज खुद 'स्टाफ' की कमी के चलते वेंटिलेटर पर नजर आ रहा है। जिस अस्पताल को सिविल अस्पताल का बोझ कम करने और उत्तरी विधानसभा क्षेत्र के लोगों को राहत देने के लिए बनाया गया था, वह आज केवल एक रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। हैरानी की बात यह है कि दिसंबर 2024 में जब इसका उद्घाटन हुआ था, तब बड़े-बड़े वादे किए गए थे कि इसे 30 बेड तक अपग्रेड किया जाएगा और यहां डायलिसिस से लेकर जच्चा-बच्चा सेवाएं तक मिलेंगी। लेकिन सवा साल बीत जाने के बाद भी हकीकत यह है कि यहां न तो कोई ऑर्थोपेडिक डॉक्टर है और न ही गायनोकोलॉजिस्ट। अस्पताल में रोजाना 40 से 50 मरीज ओपीडी में तो आते हैं, लेकिन इमरजेंसी की हालत खस्ता है। ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, इमरजेंसी में बेड खाली पड़े धूल फांक रहे हैं और पूछताछ केंद्र सामान से भरा पड़ा है। इमरजेंसी में डॉक्टर की कुर्सी अक्सर खाली मिलती है और स्टाफ की कमी के चलते गंभीर मरीजों को तुरंत सिविल अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। 

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर  खड़े हो रहे गंभीर सवाल
हालांकि, ओपीडी सेवाओं में 50 तरह के खून टेस्ट और 200 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं, साथ ही हफ्ते में तीन दिन डिजिटल एक्स-रे की सुविधा भी मिलती है, लेकिन इसके अलावा अन्य सभी बड़े प्रोजेक्ट अधर में लटके हैं। करोड़ों की लागत से बनी इस शानदार इमारत में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की तैनाती न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जब सिविल सर्जन डॉ. रमनदीप कौर से इस बारे में बात की गई, तो उन्होंने तर्क दिया कि सिविल अस्पताल पास होने के कारण मरीज वहां चले जाते हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर मरीजों को सिविल अस्पताल ही जाना है, तो जनता की खून-पसीने की कमाई के 4.5 करोड़ रुपये इस इमारत पर क्यों बहाए गए? क्या स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ फोटो खिंचवाने और उद्घाटन तक ही सीमित रह गई हैं, क्योंकि आज भी उत्तरी लुधियाना की जनता मामूली इलाज के लिए भटकने को मजबूर है।

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