पंजाब के इस सरकारी मेडिकल कालेज का हाल-बेहाल, जानें पूरा मामला

Edited By Urmila,Updated: 28 Jul, 2024 03:10 PM

this government medical college of malwa punjab is in a bad condition

पंजाब और उत्तरी भारत के बेहद अहम सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला में डायरैक्टर कम प्रिंसिपल की पोस्ट पिछले 25 दिनों से खाली पड़ी है।

पटियाला/ सनौर : पंजाब और उत्तरी भारत के बेहद अहम सरकारी मेडिकल कालेज पटियाला में डायरैक्टर कम प्रिंसिपल की पोस्ट पिछले 25 दिनों से खाली पड़ी है, जिस कारण सेहत सेवाएं बड़े स्तर पर प्रभावित हो रही हैं और हालात हाल से बेहाल होते जा रहे हैं। मेडिकल कालेज के प्रिंसीपल कम डायरैक्टर और सीनियर मोस्ट डाक्टर राजन सिंगला ने 3 जुलाई को अपना इस्तीफा सरकार को भेजा था और इससे कुछ देर बाद वह छुट्टी पर चले गए थे। हैरानी यह है कि स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल में जाते हैं परन्तु 25 दिनों में प्रिंसीपल की पोस्ट पर किसी भी डाक्टर को न लगाना एक बुझारत बना पड़ा है।

जानकारी अनुसार सरकार की तरफ से समझदार और सूझवान डाक्टर राजन सिंगला को कई बार मनाने की कोशिशें भी हुई हैं परन्तु यह सब व्यर्थ हैं क्योंकि डा. राजन सिंगला दोबारा प्रिंसीपल की पोस्ट पर सेवाएं नहीं निभाना चाहते। आखिर ऐसा क्या हो गया कि जिस सीनियर डाक्टर सिंगला को सरकार ने कुछ समय पहले खुद प्रिंसीपल तैनात किया था, वह आज खुद ऐसी अहम पोस्ट का इस्तीफा देकर सिर्फ और सिर्फ कालेज में मेडिकल विद्यार्थियों को पढ़ाना चाहते हैं और अस्पताल में मरीजों को देखना चाहते हैं।

डा. राजन सिंगला एक बेहद समझदार, तजुर्बेकार और सुलझे हुए डाक्टर हैं। इसके साथ उनकी प्रशासनिक कामों पर भी अच्छी पकड़ है। यही कारण है कि सरकार ने उनको मेडिकल कालेज का डायरैक्टर कम प्रिंसीपल लगाया था और उन्होंने इस कुर्सी को लात मार दी है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग को अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। इस समय बड़ी-बड़ी सेहत सेवाओं के दावे हो रहे हैं परन्तु पिछले 25 दिनों से पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री अपने ही जिले के मेडिकल कालेज में किसी को भी प्रिंसिपल तैनात नहीं कर सके।

मेडिकल कालेज सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है सरकारी राजिन्दरा अस्पताल के साथ

पटियाला का सरकारी मेडिकल कालेज सीधे तौर पर अपने साथ ही बने मालवा के सबसे बड़े सरकारी राजेन्द्रा अस्पताल के साथ जुड़ा हुआ है। इसलिए मेडिकल कालेज के डायरैक्टर कम प्रिंसीपल जहां मेडिकल कालेज को चलाते हैं, वहां राजेन्द्रा अस्पताल के सभी बड़े और अहम अलग-अलग बीमारियों के विभागों को भी सीधे तौर पर कंट्रोल करते हैं क्योंकि राजेन्द्रा अस्पताल में भी काम करते सभी डाक्टर प्रोफैसर, असिस्टैंट डाक्टर प्रोफैसर, लैक्चरर रैक के डाक्टर और अन्य एसोसिएट डाक्टर, प्रोफैसरों सहित पी.जी. डाक्टर आदि सीधे तौर पर मेडिकल कालेज के प्रिंसीपल अधीन चलते हैं।

राजेन्द्रा अस्पताल में रोजाना हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं परन्तु अस्पताल के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। राजनीतिक दबाव के चलते डाक्टर घुटन महसूस कर रहे हैं। जानकारी अनुसार राजेन्द्रा अस्पताल में हर रोज विशेषज्ञ डाक्टरों के पास सैंकड़ों मरीजों की ओ.पी.डी. है और यहां बहुत से विशेषज्ञ डाक्टरों को सिर खुजलाने की भी फुर्सत नहीं है क्योंकि सारा कुछ ओवर चल रहा है। इस समय प्रिंसीपल न होने के कारण कालेज के साथ-साथ अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।

प्रिंसीपल लगने से भी कतराने लगे हैं सीनियर प्रोफैसर

जानकारी अनुसार सरकार डायरैक्टर कम प्रिंसीपल लगाने के लिए तैयार है परन्तु कई सीनियर डाक्टरों ने प्रिंसिपल लगने से कोरा जवाब दे दिया है। राजेन्द्रा अस्पताल में इस समय 25 से 30 प्रोफैसर इस समय काम कर रहे हैं जो कि सीनियर मोस्ट भी हैं परन्तु सरकार को इनमें से प्रिंसिपल ढूंढना मुश्किल हुआ पड़ा है क्योंकि सरकार को प्रिंसीपल अकेला डाक्टर नहीं चाहिए, उसको प्रशासनिक सिस्टम की भी बड़ी समझ चाहिए। बहुत से डाक्टर इस कुर्सी पर लगने से कतरा रहे हैं क्योंकि वह अपना सारा ध्यान मेडिकल के बच्चों को पढ़ाने और मरीजों पर लगाना चाहते हैं, जिस कारण सरकार की लगातार किरकिरी हो रही है।

राजेन्द्रा अस्पताल में दवाइयां पूरी न होना भी है एक बड़ा मुद्दा

सरकारी मेडिकल कालेज कम राजिन्दरा अस्पताल पटियाला एक ऐसा अस्पताल है, जहां बहुत ही गंभीर मरीज मालवा से पहुंचते हैं। अस्पताल में दवाइयों की बेहद बड़ी कमी है, जिस कारण मजबूरी वश सीनियर डाक्टरों को ऑप्रेशन आदि के लिए दवाइयां बाहर से भी लिखनीं पड़तीं हैं, जिसके बाद सरकार इन डाक्टरों पर शिंकजा कसती है, जिस कारण यह डाक्टर बोल तो नहीं सकते परन्तु इस व्यवस्था से खिझे पड़े हैं। डाक्टरों का कहना है कि या तो अस्पताल में दवाईयों का भंडार लगा दो या फिर मरीज को ठीक करने के लिए बाहर से दवाइयां लिखना मजबूरी है।

एक डाक्टर ने पंजाब केसरी के साथ बातचीत करते कहा कि ऐसे गंभीर मरीज अस्पताल में पहुंचते हैं, उनके लिए यहां दवाइयों का प्रबंध ही नहीं है और यदि हम बाहर से दवाइयां लिखते हैं तो सरकार हमें परेशान करती है। इसलिए डाक्टर सरकार की इस सिस्टम से दुखी नजर आ रहे हैं।

नहीं लूंगा इस्तीफा वापस : डा. सिंगला

मेडिकल कालेज के प्रिंसीपल कम डायरैक्टर की पोस्ट से इस्तीफा दे चुके मेडिकल कालेज के सीनियर मोस्ट प्रोफैसर कम डाक्टर राजन सिंगला के साथ संपर्क बनाया तो उन्होंने कहा कि वह अपना इस्तीफा सरकार को भेज चुके हैं। जब उनको कहा कि उनका इस्तीफा अभी तक मंजूर नहीं हुआ तो उन्होंने कहा कि इस सम्बन्धित उनको कोई जानकारी नहीं परन्तु वह इस्तीफा वापस नहीं लेंगे। उन्होंने कहा कि वह मेडिकल कालेज के विद्यार्थियों को पढ़ाने और मरीजों की सेवा जारी रखेंगे।

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