Edited By Subhash Kapoor,Updated: 07 Jan, 2026 07:36 PM

नूरपुर बेदी क्षेत्र के गांव समीरोवाल में पेयजल संकट अब प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते तूल पकड़ता जा रहा है। गांव में नए पेयजल बोर प्रोजेक्ट के नाम पर पुराने और घटिया सामान के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने काम पूरी...
नूरपुर बेदी | नूरपुर बेदी क्षेत्र के गांव समीरोवाल में पेयजल संकट अब प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते तूल पकड़ता जा रहा है। गांव में नए पेयजल बोर प्रोजेक्ट के नाम पर पुराने और घटिया सामान के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों ने काम पूरी तरह रुकवा दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से ही पीला और दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, जिससे लोग बीमारियों का खतरा झेल रहे हैं। ऐसे में स्वच्छ नहरी पानी ही एकमात्र स्थायी समाधान है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि गांव में डेढ़ लाख लीटर क्षमता का नहरी पानी का टैंक मौजूद होने के बावजूद जल आपूर्ति विभाग नियमित सप्लाई सुनिश्चित नहीं कर पा रहा।
ग्रामीणों ने बताया कि समीरोवाल के लिए पहले लगभग 24 लाख रुपये की लागत से वाटर वर्क्स परियोजना स्वीकृत हुई थी, लेकिन अब विभाग 12 लाख रुपये के नए प्रोजेक्ट की बात कहकर पुराने मोटर और पाइपलाइन लगाकर काम निपटाने की कोशिश कर रहा है। जैसे ही मौके पर पुराना सामान लगाया जाने लगा, ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध किया और कार्य बंद करवा दिया।
पारदर्शिता की मांग, भरोसे की कमी
ग्रामीणों की मांग है कि परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। लागत, सामग्री और कार्य विवरण का बोर्ड मौके पर लगाया जाए और किसी भी कीमत पर नया व मानक के अनुरूप सामान ही इस्तेमाल किया जाए।
इस मौके पर पंजाब मोर्चा के संयोजक गौरव राणा ने कहा कि केंद्र सरकार के मानकों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 55 लीटर पानी देना अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि डेढ़ लाख लीटर के नहरी टैंक से गांव को आवश्यकता से अधिक पानी दिया जा सकता है। यदि टैंक को दिन में दो बार भरा जाए तो प्रति व्यक्ति लगभग 150 लीटर पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब बुनियादी ढांचा और संसाधन मौजूद हैं, तो नहरी पानी गांव तक सही ढंग से क्यों नहीं पहुंच रहा। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए उन्होंने कहा कि नूरपुर बेदी क्षेत्र के लिए नहर और नहरी पानी ही स्थायी समाधान है।
विभाग का पक्ष और ग्रामीणों का अल्टीमेटम
वहीं जल आपूर्ति विभाग ने सफाई देते हुए कहा कि नया प्रोजेक्ट शुरू किया गया है और तकनीकी कारणों से अस्थायी रूप से कुछ पुराना सामान लगाया गया है, जिसे बाद में बदला जाएगा।
हालांकि ग्रामीण इस जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने साफ ऐलान किया है कि जब तक दिन में दो बार नहरी पानी की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं की जाती और पूरा नया सामान नहीं लगाया जाता, तब तक किसी भी तरह का काम गांव में नहीं होने दिया जाएगा।