Edited By Vatika,Updated: 07 Apr, 2026 01:12 PM

सराभा नगर के अंर्तगत आते पॉश इलाके साऊथ सिटी में स्थित क्लब इन दिनों अय्याशी और
लुधियाना(राज) : सराभा नगर के अंर्तगत आते पॉश इलाके साऊथ सिटी में स्थित क्लब इन दिनों अय्याशी और कानून उल्लंघन के सुरक्षित अड्डे बन चुके हैं। कहने को तो प्रशासन ने रात के समय पाबंदियां लगाई हैं, लेकिन इन क्लबों के भीतर की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यहां रात 11 बजे के बाद असली खेल शुरू होता है, जो तडक़े 4 बजे तक निर्बाध रूप से चलता रहता है। हुक्के का धुआं और महंगी विदेशी शराब का दौर यहां सरेआम चलता है, लेकिन, हैरत की बात यह है कि खाकी की नजर इन ऊंची दीवारों के पीछे चल रहे गोरखधंधे पर नहीं पड़ती।इन लेट नाइट पार्टियों में सबसे डरावना पहलू यह है कि यहां भारी तादाद में नाबालिग बच्चे पहुंच रहे हैं। इन क्लबों में उम्र की कोई पाबंदी नहीं दिखती और किशोरों को सरेआम शराब और जहरीला हुक्का परोसा जा रहा है। नियमों के मुताबिक नाबालिगों को नशा परोसना संगीन अपराध है, लेकिन मुनाफे के लालच में क्लब मालिक बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। रात भर चलने वाले कानफोड़ू संगीत और नशे के इस मेल ने स्थानीय निवासियों की नींद भी हराम कर रखी है।
सड़क पर डंडा, क्लबों में ठंडा: पुलिस की दोहरी नीति पर सवाल
शहर की पुलिस अक्सर सडक़ों पर रेहड़ी-फडिय़ों या छोटी दुकानों पर शराब पीने वालों को पकडक़र अपनी पीठ थपथपाती है, लेकिन साऊथ सिटी के इन बड़े क्लबों के आगे पुलिस बेबस नजर आती है। चर्चा है कि पुलिस के कई बड़े अधिकारियों का इन क्लबों में नियमित आना-जाना है, जिसके कारण इन पर खास मेहरबानी रहती है। अगर कभी जनता के दबाव में कोई रेड होती भी है, तो वह महज खानापूर्ति और फाइलों को भरने तक सीमित रह जाती है। रेड से पहले ही क्लबों को सूचना मिल जाना भी दाल में कुछ काला होने की ओर इशारा करता है।

साहब! कब टूटेगी यह सांठगांठ?
हैरानी की बात है कि जहां आम आदमी के लिए नियम सख्त हैं, वहीं इन आलीशान क्लबों के लिए कानून के मायने बदल जाते हैं। महंगे दामों पर ब्रांडेड शराब और अवैध हुक्का बार चलाने वाले इन रसूखदारों पर आखिर नकेल कब कसी जाएगी? क्या पुलिस प्रशासन इन क्लबों के मालिकों और वहां आने वाले खास मेहमानों के प्रभाव से मुक्त होकर निष्पक्ष कार्रवाई करेगा? शहर के जागरूक नागरिक अब पुलिस कमिश्नर से मांग कर रहे हैं कि इन नाइट क्लबों की गहराई से जांच की जाए और नाबालिगों को नशा परोसने वालों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। अब देखना होगा कि खाकी अपनी साख बचाने के लिए इन वीआईपी क्लबों पर कब धावा बोलती है।

नशे के शक में एन.सी.बी. ने भी की थी रेड
कुछ महीने पहले साऊथ सिटी एक क्लब पर एन.सी.बी. ने भी रेड की थी। जहां बताया जा रहा था कि युवाओं को बुलाकर बाथरूम में नशा करवाया जाता है। वहां टीम ने कुछ संदिगधों को भी पकड़ा था और उनसे नशा भी बरामद किया था। हालांकि, दिल्ली से आई एनसीबी की टीम नें कुछ स्पष्ट नहीं किया था। यहां अक्सर किशोर और किशोरियों को खुलेआम नशा दिया जाता है। नशे में देर रात जब रसूखदार बच्चें अपनी अपनी गाडिय़ों में निकलते है तो वह फिर गाडिय़ों से रेस लगाते है जोकि सडक़ हादसों के कारण बनते है।
डी.सी. ने रात 11 बजे के बाद शराब पर लगाई थी पाबंदी
कुछ समय पहले एक भाजपा नेत्री की बेटी और अन्य की गाड़ी सडक़ हादसे में क्षतिग्रस्त हो गई थी। कुछ घायल भी हुए थे। जिसके बाद डीसी ने इन क्लबों पर पाबंधी लगाई थी कि शराब का सेवन रात 11 बजे के बाद नहीं होगा। मगर इन पाबंधियों को कोई फ्रक नजर नहीं आ रहा है। रात होते ही जहां पुरा शहर शांत हो जाता है, वहीं इन क्लबों में शोर शराबा शुरू हो जाता है। आसपास रहने वाले लोगों ने शिकायतें की है, मगर कोई फायदा नहीं होता है।
छोटी सी जगह में सैकेंड़े लोग होते, किसी हादसे के बाद जागेगा प्रशासन
सबसे बड़ी बात यह है कि जहां नाइट पार्टियां होती है, वहां पर करीब 100 लोग ही आ सकते है, मगर पैसों के लालच में अंधे हुए क्लबों के मालिकों ने सारे कानून ताक पर रखकर वहां पर 300 से 400 लोग होते है। ऐसे में अगर कोई हादसा होता है तो बहुत बड़ा नुक्सान भुगतना पड़ सकता है। मगर प्रशासन किसी हादसे का इंतजार कर रहा है कि अगर कोई हादसा हुआ तो ही कार्रवाई की जाएगी।