सिद्धू मूसेवाले के हत्याकांड से पंजाब की अमन-कानून की स्थिति पर उठने लगे सवाल

Edited By Urmila,Updated: 31 May, 2022 12:26 PM

sidhu musewale s murder raises questions on the law and order

पंजाब के लोगों ने बड़े चाव के साथ आम आदमी पार्टी को 92 सीट विधान सभा पर जिता कर साफ-सुथरा राज्य प्रबंध चलाने की आशा जताई थी। पंजाब के लोगों...

संगरूर (विवेक सिंधवानी, प्रवीण): पंजाब के लोगों ने बड़े चाव के साथ आम आदमी पार्टी को 92 सीट विधान सभा पर जिता कर साफ-सुथरा राज्य प्रबंध चलाने की आशा जताई थी। पंजाब के लोगों ने जिसने चाव के साथ इस सरकार से अमन कानून की स्थिति से लेकर रोजगार, व्यापार और अन्य बहुत-सी इच्छाओं रखी थी परन्तु बहुत थोड़े समय के अंदर-अंदर ही लोगों की इच्छाएं चकनाचूर होती नजर आ रही हैं।

रोजगार के बड़े-बड़े वायदे तो कहीं अमली रूप में आते दिखाई नहीं दे रहे। इसके उलट लोगों के अमन कानून पर भी बड़े पंजाबी गायक और विधान सभा की चयन लड़ चुके कांग्रेसी नेता सिद्धू मूसेवाल के दिन-दिहाड़े गोलियों की बौछार वाली घटना के साथ पंजाबियों के दिल हिला कर रख दिए हैं। पंजाब के लोगों में दहशत का माहौल छा गया है। बड़े-बड़े वायदे, बहाने और ऐलान लोगों को आकर्षित नहीं कर सकेंगे क्योंकि पंजाब के बेरोजगार नौजवान जिन्होंने आशाएं इस सरकार पर लगाईं थी। वह मुख्यमंत्री की कोठी आगे उनके साथ किओ वादे याद कराने के लिए धूप और बारिशों में अपनी मांगें याद करवाने के लिए दिन-रात डेरे लगाए बैठे हैं।

एक तरफ पंजाब का अर्थ व्यवस्था पूरी तरह दुखी है और दूसरी तरफ नौजवानों को रोजगार देने का मामला किसी किनारे पर पहुंचता नजर नहीं आ रहा क्योंकि सरकार के पास पैसा ही नहीं तो वह भर्ती के नियुक्तियां कहां से और कैसे कर पाएगी? सिद्धू मूसेवाला का दिन-दिहाड़े गोलियों की बौछार के साथ हुआ कत्ल जिसका पंजाबियों के मन पर गहरा प्रभाव कर गया।  

पंजाब के लोगों को यह बात बिल्कुल रास नहीं आ रही कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान हों और पंजाब सरकार का कंट्रोल आम आदमी पार्टी के संजोयक अरविन्द केजरीवाल के हाथ में हो। गांवों की बुजुर्ग अक्सर बातें करते हैं कि घर का कंट्रोल किसी एक के हाथ में न हो तो वह घर सही नहीं चल सकता। यह सारा कुछ पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर पूरी तरह ठीक बैठती है कि ‘गली बातीं मैं बड़ी, करतूती बड़ी जेठानी’। इसी कारण पंजाब की अफसरशाही यह फैसला लेने में असमर्थ है कि वह दिल्ली के इशारे पर चले या फिर राघव चड्ढा दे। पंजाब के लोगों ने जिन इच्छाएं पर चाव के साथ आम आदमी पार्टी की सरकार को पंजाब की सत्ता पर बिठाया है, उनकी इच्छाओं पर ठेस पहुंचती जा रही है। ऐसे हालातों में पंजाब के लोग आम आमदी पार्टी की सरकार से जल्दी ऊब जाएंगे। 

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