शहर में जर्जर दीवार से गिर रही ईंटें, स्कूली बच्चे व राहगीरों में दहशत, क्या हादसे के इंतजार में प्रशासन?

Edited By Urmila,Updated: 28 Sep, 2026 12:06 PM

risk of a major accident in patiala

देश में अक्सर यह रुझान देखने को मिलता है कि जब भी कोई हादसा होता है, उसके बाद ही सरकार और प्रशासन जागता है।

पटियाला (राजेश पंजौला) : देश में अक्सर यह रुझान देखने को मिलता है कि जब भी कोई हादसा होता है, उसके बाद ही सरकार और प्रशासन जागता है। यदि किसी बहुमंजिला इमारत में आग लग जाए और बड़ा जान-माल का नुकसान हो जाए तो तुरंत सरकार और स्थानीय निकाय विभाग सक्रिय होकर ऐसी इमारतों की जांच शुरू कर देता है। इसी तरह यदि कोई जर्जर भवन या पुल गिर जाए और नुकसान हो जाए, तब संबंधित विभाग हरकत में आता है।

जब कोई व्यक्ति अपनी जान की सुरक्षा को लेकर पुलिस से गुहार लगाता है, तो समय पर सुरक्षा नहीं मिलती, लेकिन जब उस पर हमला हो जाता है, तब प्रशासन जागता है। ऐसे सैंकड़ों उदाहरण हैं जब सिस्टम हादसे के बाद ही कार्रवाई करता है। अब सवाल यह है कि क्या शाही शहर पटियाला के सनौरी गेट स्थित सरकारी डिस्पैंसरी की जर्जर दीवार से गिरती ईंटें किसी के सिर पर लगकर जानलेवा हादसा होने के बाद ही प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग या नगर निगम जागेगा?

सरकारी डिस्पैंसरी सनौरी गेट की इमारत और विशेषकर इसकी बाहरी दीवार कभी भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यह दीवार बाबा थान सिंह गुरुद्वारे वाली गली में स्थित है और पटियाला रियासत के समय की बनी हुई है, जिसमें सरहंदी ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। वर्तमान में इसकी हालत इतनी खराब हो चुकी है कि रोजाना ईंटें अपने आप गली में गिरती रहती हैं।

यह गली सनौरी गेट स्कूल और सुईगरां मोहल्ले को जोड़ती है, जहां से सैंकड़ों बच्चे प्रतिदिन सरकारी हाई स्कूल और प्राइमरी स्कूल जाने के लिए गुजरते हैं। पुरानी दीवारें 3-3 फुट तक चौड़ी होती थीं और उनमें मजबूत सरहंदी ईंटें लगी होती थीं, जबकि आजकल 12 इंच की दीवारें बनाई जाती हैं। पिछले 2 महीनों की बारिश के कारण यह दीवार और कमजोर हो गई है, जिससे ईंटों के गिरने की घटनाएं बढ़ गई हैं।

इलाके के दुकानदार और निवासी काफी चिंतित हैं, क्योंकि वे और उनके बच्चे इसी रास्ते से गुजरते हैं। लोगों का कहना है कि कभी भी ये ईंटें किसी बच्चे या बुजुर्ग के सिर पर गिरकर जानलेवा साबित हो सकती हैं, क्योंकि दीवार काफी ऊंची है। डिस्पैंसरी के सामने कई दशकों से दुकान चला रहे सोनम राज ने कहा कि किसी भी सरकार या प्रशासन ने इस जर्जर इमारत को गंभीरता से नहीं लिया। दुकानदार सुभाष कुमार, लव कुमार, हैप्पी, रिंकू, बॉबी, राणा, साहिल, राजू, बलवंत, रुपिंदर, विक्की और अभिषेक मित्तल ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में ईंटें गिर रही हैं, जबकि यहां से रोजाना स्कूली बच्चे गुजरते हैं।

लोगों का कहना है कि नगर निगम और जिला प्रशासन को इस खतरे की कोई चिंता नहीं है और वे डर के साये में जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने कुछ नहीं किया, इसलिए उन्हें बदला गया, लेकिन मौजूदा प्रतिनिधि भी जनता के मुद्दों से दूर हैं। लोगों ने डिप्टी कमिश्नर पटियाला, नगर निगम कमिश्नर और सिविल सर्जन से मांग की है कि तुरंत इस जर्जर दीवार की मरम्मत करवाई जाए, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

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