बारिश और उमस के मौसम में बढ़ा मौसमी बीमारियों का खतरा, डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की दी सलाह

Edited By Kalash,Updated: 24 Aug, 2026 11:04 AM

rainy and humid weather disease risk increase

बारिश और उमस के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव तथा जगह-जगह पानी जमा होने के कारण विभिन्न मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

जालंधर (धवन): बारिश और उमस के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव तथा जगह-जगह पानी जमा होने के कारण विभिन्न मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। डॉक्टरों के अनुसार इस मौसम में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार, टाइफाइड, गैस्ट्रोएंटेराइटिस तथा त्वचा संबंधी फंगल संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं। मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण बनने के कारण डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द, आंखों के पीछे दर्द तथा कई बार त्वचा पर चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। चिकनगुनिया में बुखार के साथ जोड़ों में दर्द और अकड़न प्रमुख लक्षण हो सकते हैं, जबकि मलेरिया में बुखार के साथ ठंड लगना और पसीना आना देखा जाता है। वहीं दूषित पानी और भोजन के कारण दस्त, उल्टी, पेट दर्द तथा अन्य पेट संबंधी संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।

टैगोर अस्पताल के चेयरमैन डा विजय महाजन ने लोगों को साफ और सुरक्षित पानी पीने, खुले में रखे खाद्य पदार्थों और कटे हुए फलों से बचने तथा भोजन को अच्छी तरह पकाकर खाने की सलाह दी है। घरों और आसपास पानी जमा न होने देने, कूलर, गमलों, छतों तथा अन्य स्थानों पर जमा पानी को नियमित रूप से साफ करने और मच्छरों से बचाव के लिए रिपेलेंट तथा पूरी आस्तीन के कपड़ों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

डा. महाजन ने कहा कि उमस के कारण त्वचा पर फंगल संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। डॉक्टरों ने शरीर और त्वचा की सिलवटों को सूखा रखने, पसीने वाले कपड़े तुरंत बदलने तथा व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि यदि तेज या लगातार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी, लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, रक्तस्राव या पेशाब कम आने जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं नहीं लेनी चाहिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे बारिश के दौरान घरों के आसपास जलभराव को नजरअंदाज न करें और मच्छरों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से साफ-सफाई करें। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है।

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