Punjab: सचिन पायलट की एंट्री से गुटबाजी पर लगेगी लगाम? 2027 से पहले कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक

Edited By Subhash Kapoor,Updated: 05 Sep, 2026 11:31 PM

punjab will sachin pilot s entry alter the political equation

पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के बीच सचिन पायलट को पंजाब मामलों का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पायलट की नियुक्ति को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही...

जालंधर : पंजाब कांग्रेस में अंदरूनी खींचतान के बीच सचिन पायलट को पंजाब मामलों का नया प्रभारी बनाए जाने के बाद पार्टी की सियासत में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पायलट की नियुक्ति को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि पंजाब कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी को साधने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल अब यह है कि क्या पायलट की एंट्री के साथ पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व स्तर पर भी बड़ा बदलाव होगा? वहीं बताया जा रहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को लेकर पहले से नाराज चल रहे नेताओं को नई नियुक्ति से उम्मीदें बढ़ी हैं।

पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुटबाजी

पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से अलग-अलग नेताओं के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। वड़िंग के विरोधी खेमे के नेताओं ने पूर्व प्रभारी भूपेश बघेल की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए थे। ऐसे में पायलट को जिम्मेदारी मिलने के बाद हाईकमान की कोशिश पंजाब कांग्रेस के विभिन्न गुटों को एक मंच पर लाने की हो सकती है। पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा जैसे नेताओं का पायलट की नियुक्ति का स्वागत करना भी इस बदलाव को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाता है।

राजस्थान कनेक्शन भी हो सकता है अहम

सचिन पायलट की नियुक्ति का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू पंजाब के उन विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा है, जिनका राजस्थान के साथ सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव है। मानसा, सरदूलगढ़, बुढलाडा, फाजिल्का और अबोहर जैसे इलाकों में राजस्थान से जुड़े परिवारों और बागड़ी भाषी आबादी का प्रभाव माना जाता है। ऐसे में कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पायलट के राजस्थान कनेक्शन और OBC नेतृत्व की छवि का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है।

वहीं पायलट की नियुक्ति को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की बड़ी रणनीतिक तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि पायलट पंजाब में संगठन को संभालने के बाद सबसे पहले क्या कदम उठाते हैं और क्या उनकी एंट्री के साथ प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व स्तर पर भी कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलता है।

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