Edited By Vatika,Updated: 17 Sep, 2026 09:35 AM

पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पी.आई.ओ.) ने
लुधियाना(राज) : पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव्स (पी.आई.ओ.) ने भारतीय युवाओं को अपने नापाक मंसूबों का मोहरा बनाने के लिए एक बेहद खतरनाक डिजिटल जाल बिछा दिया है। सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने पंजाब सहित पूरे देश के युवाओं के लिए चिंता जताई है। क्योकि, पाकिस्तानी एजेंट धर्म, पार्ट-टाइम नौकरी, भारी-भरकम लॉटरी और सोशल मीडिया पर हनीट्रैप और जल्द पैसे कमाने का लालच के जरिए युवाओं का ब्रेनवाश कर रहे हैं। फिर इन मासूम या लालच में आए युवाओं को अपने ही देश के खिलाफ जासूसी, संवेदनशील ठिकानों की वीडियोग्राफी और हिंसक वारदातों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हाल ही में फिरोजपुर रोड इलाके में मिले जासूसी कैमरों और संगरूर में चंद रुपयों के लालच में किए गए पेट्रोल बम धमाके जैसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि आई.एस.आई. के हैंडलर पंजाब के युवाओं को लगातार टारगेट कर रहे हैं। विभागी सूत्रों का कहना है कि इसी चिंता के चलते खुफिया एजेंसियों ने एक अहम एडवाइजरी जारी करते हुए अलर्ट भी जारी किया हुआ है।
फिरोजपुर रोड पर जासूसी कैमरों और संगरूर ब्लास्ट इस ओर कर रहा इशारा
खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ समय में पंजाब के कई नौजवान अनजाने में या पैसों की लालच में आईएसआई के चंगुल में फंस चुके हैं। हाल ही में फिरोजपुर रोड पर मिले संदिग्ध जासूसी सीसीटीवी कैमरों ने खुफिया तंत्र के कान खड़े कर दिए हैं। आशंका है कि सीमा पार बैठे हैंडलर्स द्वारा स्थानीय युवाओं के जरिए सामरिक व संवेदनशील ठिकानों पर ऐसे कैमरे या निगरानी उपकरण लगवाए जा रहे हैं। यही नहीं संगरूर में भाजपा दफ्तर पर हुए पेट्रोल बम हमले में पकड़े गए दो युवाओं की जांच में सनसनीखेज सच सामने आया था। सोशल मीडिया पर विदेशी हैंडलर के संपर्क में आकर इन नौजवानों ने महज 2,200 के मामूली एडवांस लालच में इतनी बड़ी आतंकी वारदात को अंजाम दे दिया और अपनी पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे बर्बाद कर ली।
इन 5 तरीकों से युवाओं को बनाया जा रहा है शिकार?
पाकिस्तान के कंट्री कोड (+92) या वर्चुअल नंबरों से वाट्सएप पर केबीसी, कार या लाखों के इनाम जीतने के फर्जी मैसेज भेजे जाते हैं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस के नाम पर वसूली होती है या फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल हैक कर लिया जाता है। इसके साथ ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर खूबसूरत लड़कियों के नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर दोस्ती की जाती है। अश्लील वीडियो कॉल कर स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए लडक़ों को ब्लैकमेल किया जाता है और फिर भारतीय सेना के ठिकानों, एयरबेस, रेलवे स्टेशनों और वीआईपी मूवमेंट की तस्वीरें मांगी जाती हैं। ऐसे ही धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग कर युवाओं में कट्टरता भरी जाती है और उन्हें सिस्टम व देश के खिलाफ खड़ा कर स्लीपर सेल या मुखबिर की तरह तैयार किया जाता है। टेलीग्राम टास्क और डाटा एंट्री के नाम पर पहले 200-500 रुपये का मुनाफा दिखाया जाता है, फिर टास्क के नाम पर लोकेशन और संवेदनशील फोटो साझा करने का दबाव बनाया जाता है। इसके साथ ही अवैध चाइनीज व पाकिस्तानी ऐप्स के जरिए पहले आसान कर्ज दिया जाता है, फिर भारी ब्याज और निजी डाटा हैक कर देशविरोधी काम करने के लिए मजबूर किया जाता है।
फंसने पर भुगतना पड़ेगा भयानक अंजाम, जेल के साथ करियर खत्म :
सूत्रों ने बताया है सुरक्षा एजेंसियों ने कि साफ चेतावनी दी है कि जाने-अनजाने में भी देशविरोधी गतिविधियों या जासूसी में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। ऐसे मामलों में गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यू.ए.पी.ए.) और ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट (ओ.एस.ए.) के तहत गैर-जमानती केस दर्ज किए जा रहे हैं। पकड़े जाने पर जिंदगी भर के लिए सरकारी नौकरी, पासपोर्ट जारी होना और विदेश जाने के तमाम रास्ते हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे। चंद रुपयों का लालच युवाओं को सीधे तिहाड़ या केंद्रीय जेलों की अंधेरी कोठरियों तक पहुंचा रहा है।
रोजना सोशल मीडिया या जागरूकता कैंप लगाकर पुलिस कर रही है जागरूक :
पंजाब पुलिस रोजना सोशल मीडिया, अवेयरनेस कैंप लगाकर लोगों को लगातार जागरूक करती रहती है। जिसमें उन्होने साफ कहा होता है कि +92 कोड या किसी भी अनजान विदेशी नंबर से आने वाले वाट्सएप कॉल, मैसेज या एपीके फाइलों को तुरंत ब्लॉक व रिपोर्ट करें। सोशल मीडिया पर अनजान लडक़ी या प्रोफाइल से आने वाली वीडियो कॉल कतई न रिसीव करें; यह स्क्रीन रिकॉर्डिंग हनीट्रैप का फंदा हो सकता है। बिना लॉटरी खरीदे इनाम जीतने या चंद रुपयों के बदले किसी जगह की वीडियो/फोटो बनाकर भेजने के ऑफर को फौरन ठुकराएं। यदि कोई आपको ऑनलाइन ब्लैकमेल कर रहा है, तो डरकर देशविरोधी हरकत करने के बजाय तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। इसके साथ ही माता-पिता अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों और संदिग्ध विदेशी संपर्कों पर पैनी नजर रखें ताकि युवा पीढ़ी किसी विदेशी एजेंसी का मोहरा बनकर अपनी जिंदगी तबाह न कर ले।