'शिक्षा क्रांति' के दावे खोखले! परीक्षाओं के बीच 'आप' सरकार का एक और तुगलकी फरमान

Edited By Kalash,Updated: 31 Jan, 2026 05:17 PM

order for teachers during exams

जहां एक तरफ पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार 'शिक्षा क्रांति' के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती, वहीं धरातल पर हालात इसके बिलकुल विपरीत हैं।

लुधियाना (विक्की): जहां एक तरफ पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी की सरकार 'शिक्षा क्रांति' के बड़े-बड़े दावे करते नहीं थकती, वहीं धरातल पर हालात इसके बिलकुल विपरीत हैं। सरकार की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है। इसकी ताजा मिसाल एसडीएम रायकोट द्वारा जारी किए गए वो आदेश हैं, जिन्हें अध्यापक संगठनों ने सिरे से नकारते हुए 'तुगलकी फरमान' करार दिया है। हैरानी की बात यह है कि सिर पर वार्षिक परीक्षाएं हैं, लेकिन शिक्षा विभाग और प्रशासन अध्यापकों को स्कूलों में पढ़ाने की जगह 'यात्रा इंचार्ज' बनाकर बसों में भेजने की तैयारी कर रहा है।

इस आदेश के जारी होते ही विभिन्न अध्यापक संगठनों और यूनियनों ने इसका कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। यूनियन नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे साधारण और गरीब परिवारों से आते हैं। फरवरी और मार्च का महीना उनकी पढ़ाई के लिए निर्णायक होता है क्योंकि फाइनल परीक्षाएं सिर पर हैं। नेताओं ने कहा कि ऐसे समय में अध्यापकों को स्कूलों से बाहर भेजना गरीब विद्यार्थियों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। उनका कहना है कि सरकार अपनी सियासत चमकाने के लिए गरीब बच्चों की पढ़ाई की बलि चढ़ा रही है।

क्या है पूरा मामला?

दफ्तर इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन अफसर-कम-एसडीएम रायकोट की ओर से रजिस्ट्रेशन अफसर-कम-एसडीएम पायल गोयल ने एक आदेश जारी किया है। यह आदेश सेक्टर अफसर अवतार सिंह और सेक्टर अफसर डॉ. हरिंदर सिंह (विधान सभा हलका 69-रायकोट) को लिखा गया है। विषय में स्पष्ट लिखा गया है कि 'मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना' के तहत 50 साल से अधिक उम्र के वोटरों को अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर, जलियांवाला बाग और वाघा बॉर्डर की यात्रा करवाई जानी है।

जारी किए गए आदेशों के मुताबिक, रायकोट निर्वाचन क्षेत्र के 188 पोलिंग स्टेशनों के 50 साल से ऊपर के वोटरों की लिस्ट तैयार करने की जिम्मेदारी बीएलओ को सौंपी गई है। गौरतलब है कि बीएलओ की ड्यूटी करने वाले अधिकतर कर्मचारी सरकारी स्कूलों के अध्यापक हैं। पहले ही उन पर पढ़ाई के साथ-साथ बीएलओ ड्यूटी का बोझ था, अब उन्हें इस सियासी कार्यक्रम में 'कार्यकर्ता' की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। जारी आदेशों में साफ लिखा है कि "यात्रा के जाने वाली बस के साथ उस गांव का एक बीएलओ भी यात्रा पर जाएगा।" यह यात्रा 2 फरवरी से गांव हिस्सेवाल (पोलिंग स्टेशन 1 और 2) से शुरू होगी।

वादे भूले मुख्यमंत्री

चुनावों से पहले मुख्यमंत्री बार-बार मंचों से कहते थे कि उनकी सरकार बनने पर अध्यापकों से सिर्फ टीचिंग (पढ़ाने) का काम लिया जाएगा। लेकिन हकीकत यह है कि बीएलओ का तीर्थ यात्रा में साथ जाना न तो कोई पढ़ाई का हिस्सा है और न ही चुनाव आयोग का कोई जरूरी काम। यह पूरी तरह से एक राजनीतिक स्टंट है जिसमें सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है। आदेशों में कहा गया है कि बीएलओ को ब्लॉक सुपरवाइजर राजदीप सिंह और गाँव के सरपंच के साथ तालमेल करके लिस्ट तैयार करनी होगी। इसके अलावा किसी भी जानकारी के लिए दफ्तर से संपर्क करने को कहा गया है।

अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here

Related Story

Trending Topics

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!