Edited By Kalash,Updated: 16 Apr, 2026 01:53 PM

इस बार गर्मियों के सीजन में ‘बादशाह’ कहे जाने वाले खरबूजे की खेती में भारी कमी देखने को मिल रही है।
लुधियाना (खुराना): इस बार गर्मियों के सीजन में ‘बादशाह’ कहे जाने वाले खरबूजे की खेती में भारी कमी देखने को मिल रही है। किसानों को आलू की फसल में हुए नुकसान और बेमौसमी बारिश के चलते खरबूजे की बिजाई कम करनी पड़ी, जिसका सीधा असर इसकी कीमतों पर पड़ने की संभावना है। जानकारी के अनुसार, इस सीजन में आलू की कीमतें मंडियों में 12-15 रुपए प्रति किलो से गिरकर 2-3 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ा। आमतौर पर किसान आलू की कटाई के बाद खरबूजे की बिजाई करते हैं, लेकिन इस बार बारिश के कारण न तो समय पर आलू की खुदाई हो सकी और न ही खरबूजे की बुवाई हो पाई।
होलसेल कारोबारियों के मुताबिक, खरबूजे की खेती पर प्रति एकड़ करीब 50 हजार रुपए तक खर्च आता है। साथ ही यह फसल बारिश और कीटों के हमले से जल्दी खराब हो जाती है, जिससे किसानों ने जोखिम उठाने से परहेज किया। ऐसे में इस बार खरबूजे की कम पैदावार के चलते कीमतों में तेजी आना तय माना जा रहा है। खासकर निर्जला एकादशी जैसे अवसरों पर इसकी कीमतें आम लोगों की पहुंच से बाहर हो सकती हैं। वहीं तरबूज की खेती इस बार बेहतर बताई जा रही है। इसकी बिजाई पर प्रति एकड़ करीब 20 हजार रुपए खर्च आता है और यह फसल पानी की मार को भी बेहतर तरीके से सहन कर लेती है। ऐसे में मंडियों में तरबूज की अच्छी आमद की उम्मीद जताई जा रही है।
सीजन पर टिकी उम्मीदें
लुधियाना फ्रूट मंडी आढ़ती एसोसिएशन के चेयरमैन इंद्रजीत सिंह कुक्कू, सरपरस्त अमित अव्वल, प्रधान राजन अव्वल और हरजोत सिंह नागपाल ने बताया कि हाल ही में हुई बेमौसमी बारिश से फ्रूट मंडी का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ग्राहकों की कमी के कारण आढ़तियों को माल कम दामों पर बेचना पड़ा या नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के वापस जाने से भी खपत प्रभावित हुई है। ऐसे में अब आढ़तियों की उम्मीदें खरबूजा, तरबूज, आम और अन्य गर्मियों के फलों पर टिकी हैं। यदि सीजन अच्छा रहा तो हालात कुछ हद तक सुधर सकते हैं।
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