मेडिकल स्टोरों की आड़ में 'ओ.पी.डी.' का खेल! बिना पर्ची दवाइयां देकर खुद डॉक्टर बने बैठे कर्मचारी

Edited By Kalash,Updated: 14 Oct, 2026 11:48 AM

medical stores patients

मेडिकल स्टोरों की आड़ में ओ.पी.डी. का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है।

अमृतसर (दलजीत): मेडिकल स्टोरों की आड़ में ओ.पी.डी. का गोरखधंधा धड़ल्ले से चल रहा है। बिना डॉक्टर की पर्ची के फार्मासिस्ट और स्टोर में काम करने वाले कर्मचारी खुद डाक्टर बनकर मरीजों को विभिन्न बीमारियों की रूटीन में दवाइयां दे रहे हैं। थाना कंबो के अधीन आते विभिन्न इलाकों और मजीठा रोड स्थित विभिन्न कंपनियों के कई फ्रैंचाइजी प्राप्त मेडिकल स्टोरों में यह काम जारी है। विभाग को इस संबंधी पता होने के बावजूद ठोस कार्रवाई अमल में न लाकर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट का सरेआम उल्लंघन करवाया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार मेडिकल स्टोरों पर दवाओं की बिक्री के लिए निर्धारित नियमों का पालन लाजमी है। खास तौर पर ऐसी दवाइयां, जिनकी बिक्री के लिए डॉक्टर की पर्ची अनिवार्य है। इसके बावजूद कुछ स्टोरों पर कथित तौर पर मरीजों की समस्याएं सुनकर दवाइयां देने और पर्ची के बिना इलाज करने का काम जोरों पर जारी है। दवाइयों की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड संभालकर रखना और लाइसेंस की शर्तों का पालन करना भी मेडिकल स्टोर संचालकों की जिम्मेदारी है लेकिन यदि कोई स्टोर कर्मचारी अपनी मर्जी से मरीजों को दवाइयां देने लग जाए तो इससे मरीजों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

आम लोगों को डॉक्टर होने का भ्रम! 

मामले का एक और चिंताजनक पहलू यह है कि मेडिकल स्टोरों पर काम करने वाले कुछ कर्मचारियों और फार्मासिस्टों को लोग डॉक्टर कहकर संबोधित करते हैं। कुछ जगहों पर मरीजों को दवाइयां देने का काम इस तरह किया जाता है कि लोगों को डॉक्टर और स्टोर के कर्मचारी के बीच अंतर समझना मुश्किल हो जाता है।

पंजाब केसरी द्वारा अपने स्तर पर किए गए निरीक्षण के दौरान थाना कंबो के अधीन आते तथा मजीठा रोड और अन्य क्षेत्रों के कुछ मेडिकल स्टोरों पर बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाइयां देने संबंधी सवाल उठे हैं। एक स्टोर के बारे में यह भी दावा किया गया कि वहां एक राजनीतिक नेता का संरक्षण होने की चर्चा है और स्टोर पर मौजूद व्यक्ति खुद को फार्मासिस्ट बताता है। वह कुछ मरीजों को बिना पर्ची दवाइयां देता है जबकि दूसरों को डॉक्टर की पर्ची लाने के लिए कहा जाता है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच होनी अभी बाकी है।

सी.सी.टी.वी. कैमरों की जांच से खुल सकता है भेद 

विभाग द्वारा मेडिकल स्टोरों में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगाने संबंधी दी गई हिदायतों के मद्देनजर मांग उठ रही है कि नियमित जांच के साथ-साथ शिकायतों वाले स्टोरों की उपलब्ध रिकॉर्डिंग भी नियमों अनुसार जांची जाए। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि मरीजों को किन हालात में दवाइयां दी जा रही हैं और क्या कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हो रहा।

क्या कहना है ड्रग कंट्रोल अधिकारी का? 

इस संबंधी जब ड्रग कंट्रोल अधिकारी गुरदीप सिंह से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर मेडिकल स्टोरों की जांच की जाती है। जहां भी कोई कमी सामने आती है वहां नियमों अनुसार कार्रवाई की जाती है। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा फिर से टीमें बनाई गई हैं जो लगातार क्षेत्र में चैकिंग कर रही हैं। फार्मासिस्ट द्वारा डॉक्टर की पर्ची के बिना दवाई देने संबंधी पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट आमतौर पर अपनी मर्जी से मरीज को दवाई नहीं दे सकता और नियमों का पालन लाजमी है। अब देखना यह होगा कि विभाग द्वारा इन शिकायतों की कितनी गंभीरता से जांच की जाती है और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन साबित होता है तो संबंधित मैडीकल स्टोरों के खिलाफ क्या कार्रवाई अमल में लाई जाती है।

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