त्यौहारों से पहले मिठाइयों में पाऊडर का खेल, फूड विंग की कार्रवाई पर उठे सवाल

Edited By Urmila,Updated: 06 Oct, 2026 01:30 PM

the practice of using milk powder instead of milk in sweets

त्यौहारी सीजन शुरू होते ही मिलावटखोरों ने लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की तैयारी कर ली है।

अमृतसर (दलजीत) : त्यौहारी सीजन शुरू होते ही मिलावटखोरों ने लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने की तैयारी कर ली है। अमृतसर जिले में कुछ कंपनियों द्वारा दूध से तैयार होने वाली मिठाइयों के स्थान पर दूध पाऊडर और अन्य पदार्थों का इस्तेमाल करके खोया, बर्फी, मिल्क केक सहित विभिन्न मिठाइयां तैयार करके बेचने की शिकायतें सामने आ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि कई जगहों पर ग्राहकों को यह स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी जा रही कि मिठाई किस सामग्री से तैयार की गई है। यह तैयार माल जिले की विभिन्न हलवाइयों, मिठाई की दुकानों और बड़े रैस्टोरैंटों तक सप्लाई होने की बात सामने आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत खाने-पीने की वस्तुओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और लेबलिंग से संबंधित नियम लागू हैं तो मिठाइयों में इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री के बारे में उपभोक्ताओं को स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी जा रही? यदि किसी मिठाई को दूध से बनी हुई बताकर बेचा जा रहा है लेकिन उसमें दूध के स्थान पर पाऊडर या अन्य सामग्री इस्तेमाल की जा रही है तो इसकी जांच करना स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बनती है।

एक्ट मौजूद, फिर भी दुकानों से जानकारी गायब

फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट 2006 और इसके तहत बने नियमों के अनुसार खाद्य पदार्थों की सुरक्षा और सही जानकारी देना बेहद महत्वपूर्ण है। उपभोक्ता को यह जानने का अधिकार है कि वह जो मिठाई खरीद रहा है, उसमें कौन-सी सामग्री इस्तेमाल की गई है। इसके बावजूद जिले की कई दुकानों पर मिठाई बनाने में इस्तेमाल सामग्री के बारे में स्पष्ट जानकारी न होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। त्यौहारों के सीजन को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग द्वारा फूड सेफ्टी अधिकारियों को लगातार जांच, सैंपल लेने और मिलावटखोरी के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाते हैं लेकिन अगर बाजार में दूध की जगह पाऊडर से तैयार मिठाइयां धड़ल्ले से बिक रही हैं तो सवाल यह है कि विभाग की निगरानी कहां है?

त्यौहारों में लोगों की सेहत से समझौता क्यों?

त्यौहारों के दिनों में मिठाइयों की बिक्री कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे समय में यदि गुणवत्ता और सामग्री की जांच सख्ती से नहीं की गई, तो उपभोक्ताओं की सेहत से खिलवाड़ का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग को सिर्फ औपचारिक सैंपल लेने के बजाय उत्पादन इकाइयों, सप्लायरों, हलवाइयों और बड़े रैस्टोरैंटों की क्रमवार जांच करनी चाहिए। लोगों की मांग है कि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट की धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करते हुए मिठाइयों की गुणवत्ता, इस्तेमाल की जा रही सामग्री और लेबलिंग की जांच की जाए ताकि त्यौहारी सीजन के दौरान लोगों को मिलावटखोरों के रहमो-करम पर न छोड़ा जाए।

रोजाना चैकिंग का दावा, पर जानकारी सार्वजनिक करने से विभाग का गुरेज!

स्वास्थ्य विभाग के फूड विंग द्वारा रोजाना मिलावटखोरी के खिलाफ चैकिंग करने और मिठाइयों सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग करने के दावे किए जा रहे हैं लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि विभाग द्वारा रोजाना इतने बड़े स्तर पर चैकिंग और सैंपलिंग की जा रही है तो इसकी जानकारी जनता और मीडिया से क्यों छिपाई जा रही है? पिछले कुछ दिनों से चैकिंग और सैंपलिंग से संबंधित विस्तृत जानकारी मीडिया के साथ सांझा न किए जाने के कारण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। न तो जांच के अधीन संस्थानों की जानकारी सार्वजनिक की जा रही है और न ही यह स्पष्ट किया जा रहा है कि कहां से कितने सैंपल लिए गए और उनकी जांच का क्या परिणाम रहा। चैकिंग व सैंपलिंग वास्तव में कितनी हो रही है और यह सिर्फ आंकड़ों तक ही सीमित है या नहीं, यह सवाल अब लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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