जालंधर में 72 साल की महिला का RTI वार, इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को दिया बड़ा झटका

Edited By Urmila,Updated: 12 Oct, 2026 01:25 PM

major setback for jalandhar improvement trust

जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को मास्टर गुरबंता सिंह एनक्लेव की आवासीय योजना में फ्लैट आवंटित करने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न करवाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से बड़ा झटका लगा है।

जालंधर: जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को मास्टर गुरबंता सिंह एनक्लेव की आवासीय योजना में फ्लैट आवंटित करने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न करवाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग से बड़ा झटका लगा है। आयोग ने 72 वर्षीय सुदर्शन टांगरी की शिकायत पर फैसला सुनाते हुए ट्रस्ट को जमा करवाई गई राशि ब्याज सहित वापस करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता ने RTI से प्राप्त जानकारी को अपने पक्ष में सबूत के तौर पर पेश किया, जिससे उनकी दलीलों को मजबूती मिली।

आयोग ने आदेश दिया है कि जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट शिकायतकर्ता को जमा की गई 4,54,677 रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। इसके अलावा मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 30,000 रुपये और मुकदमे के खर्च के लिए 10,000 रुपये देने होंगे। आयोग ने पूरी अदायगी के लिए 45 दिन का समय दिया है। निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर ब्याज दर में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त बढ़ोतरी के निर्देश दिए गए हैं।

2006 में बुक किया था फ्लैट, सुविधाओं के अभाव में नहीं रह सकीं महिला

शिवराज गढ़ निवासी सुदर्शन टांगरी ने अपनी शिकायत में बताया कि उन्होंने वर्ष 2006 में इंद्रपुरम विकास योजना के तहत ब्लॉक-ए की दूसरी मंजिल पर स्थित LIG फ्लैट नंबर 78 बुक करवाया था। उन्होंने किस्तों में कुल 4,54,677 रुपये जमा करवाए, लेकिन उनके अनुसार फ्लैट का वास्तविक कब्जा देने के बजाय केवल कागजी कब्जा सौंपा गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि फ्लैट का निर्माण ठीक ढंग से नहीं हुआ था और उसमें रहने के लिए जरूरी सुविधाओं की कमी थी। कॉलोनी में 45 फीट चौड़ी पहुंच सड़क, पेयजल, बिजली व्यवस्था, चालू सीवरेज लाइन और कम्युनिटी हॉल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। बिजली की मुख्य लाइनें और ट्रांसफार्मर भी काफी समय बाद, वर्ष 2012-2013 में चालू हो सके। इस कारण फ्लैट लंबे समय तक खाली रहे और उनकी जमा पूंजी फंसी रही।

ट्रस्ट ने दी 'जैसा है, जहां है' के आधार पर आवंटन की दलील

सुनवाई के दौरान जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट ने दलील दी कि फ्लैट का कब्जा पहले ही दिया जा चुका था और शिकायत समय-सीमा के बाहर दायर की गई थी। ट्रस्ट ने यह भी कहा कि फ्लैट 'जैसा है, जहां है' के आधार पर आवंटित किए गए थे तथा रखरखाव की जिम्मेदारी आवंटियों की थी।

हालांकि, दोनों पक्षों के सबूतों की समीक्षा के बाद आयोग ने पाया कि ट्रस्ट आवश्यक कंप्लीशन सर्टिफिकेट पेश करने में विफल रहा। आयोग ने स्पष्ट किया कि जरूरी बुनियादी सुविधाओं और पूर्णता प्रमाण पत्र के बिना दिया गया कब्जा अधूरा माना जा सकता है।

RTI की जानकारी बनी अहम आधार

इस मामले में सुदर्शन टांगरी ने RTI के माध्यम से हासिल जानकारी को आयोग के सामने पेश किया। इससे सेवाओं और बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर उनकी दलीलों को मजबूती मिली। बीबी भानी फ्लैट अलॉटी एसोसिएशन के प्रधान दर्शन ने भी कानूनी सलाह के संबंध में उनका सहयोग किया।

आयोग के फैसले के बाद अब इंप्रूवमेंट ट्रस्ट को तय समय में जमा राशि, ब्याज और मुआवजे का भुगतान करना होगा। यह मामला उन आवंटियों के लिए भी अहम है, जो पूरी रकम जमा करने के बावजूद फ्लैटों में बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने की शिकायत करते रहे हैं।

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