Edited By Kalash,Updated: 29 Sep, 2026 10:51 AM

उत्तर भारत में फैस्टिवल सीजन शुरू हो चुका है और अब कुछ ही सप्ताह बाद दशहरा व दिवाली जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं। P
जालंधर (खुराना): उत्तर भारत में फैस्टिवल सीजन शुरू हो चुका है और अब कुछ ही सप्ताह बाद दशहरा व दिवाली जैसे बड़े त्यौहार आने वाले हैं। इन दिनों पटाखों की बिक्री तेजी से बढ़ती है, लेकिन जालंधर के पटाखा कारोबारी इस बार असमंजस में हैं। कारण यह है कि अभी तक शहर में पटाखा मार्कीट लगाने के लिए जगह फाइनल नहीं हो पाई है। कारोबारियों के पास करोड़ों रुपए का पटाखा स्टॉक पहुंच चुका है जो शहर के असंख्य गोदामों में जमा है। कारोबारियों को डर सता रहा है कि अगर मार्केट लगाने में और देरी हुई तो माल बेचने के लिए समय कम पड़ सकता है।
पिछले साल भी पटाखा कारोबारियों को मार्केट लगाने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। पठानकोट चौक में मार्केट लगने के बाद कारोबारियों को केवल दो-तीन दिन में ही भारी स्टॉक बेचने की कोशिश करनी पड़ी थी। इस दौरान कई तरह की परेशानियां सामने आईं और काफी पटाखा स्टॉक भी बच गया था। इसी कारण इस बार कारोबारियों को उम्मीद थी कि दशहरा-दिवाली से काफी पहले मार्केट की जगह तय कर दी जाएगी, लेकिन अभी तक मामला फाइनल नहीं हो पाया है।
पटाखा मार्कीट के लिए एसोसिएशनों के कुछ प्रधान अपने स्तर पर लगातार कोशिश कर रहे हैं। सबसे पहले लेदर कॉम्प्लैक्स के पास एक खाली प्लाट को मार्कीट के लिए देखा गया था, लेकिन यह जगह भी फाइनल नहीं हो सकी। इसके बाद पठानकोट रोड पर फोर्टिस अस्पताल के आगे एक निजी प्लाट का विकल्प सामने आया। बताया जा रहा है कि इस जगह को लेकर भी प्रशासनिक स्तर पर कुछ अड़चनें हैं, जिसके चलते अंतिम फैसला नहीं हो पा रहा।
कारोबारियों का कहना है कि मार्कीट के लिए जगह तय होने के बाद भी सरकारी विभागों की अलग-अलग औपचारिकताएं पूरी करने में समय लगेगा। ऐसे में अगर अब भी फैसला नहीं हुआ तो दशहरा-दिवाली के सीजन में कारोबारियों के सामने अपने करोड़ों रुपए के स्टॉक को बेचने की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।
6 एसोसिएशनों में बंटे हुए हैं पटाखा कारोबारी
जालंधर में सौ से ज्यादा पटाखा कारोबारी इस समय 6 अलग-अलग एसोसिएशनों में बंटे हुए हैं। इनमें भंडारी, महाजन, जैन, तलवाड़, राणा और बाहरी ग्रुप शामिल हैं। मार्केट की जगह को लेकर कुछ प्रधान अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सभी कारोबारियों की एक जगह पर सहमति और प्रशासनिक मंजूरी अभी बाकी है। यही कारण है कि मार्केट का फैसला लगातार लटकता जा रहा है।
करोड़ों का स्टॉक, बिक्री के लिए कुछ ही दिन
पटाखा कारोबारियों का कहना है कि शहर में इस समय करोड़ों रुपए का पटाखा स्टॉक पहुंच चुका है। इस स्टॉक की मुख्य बिक्री दशहरा और दीवाली के आसपास ही होती है। अगर मार्केट लगाने में देरी होती रही तो कारोबारियों को बिक्री के लिए पर्याप्त दिन नहीं मिलेंगे और पिछले साल की तरह स्टॉक बचने का खतरा रहेगा। कारोबारियों की मांग है कि मार्केट के लिए जगह जल्द फाइनल कर सभी जरूरी औपचारिकताएं समय रहते पूरी की जाएं।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पटाखा मार्केट के लिए जगह कब फाइनल होगी, क्या सभी एसोसिएशनों के कारोबारी एक जगह पर सहमत होंगे और क्या सरकारी विभाग समय रहते मार्केट लगाने के लिए जरूरी सहयोग देंगे। फिलहाल इन सवालों का जवाब बाकी है, लेकिन कारोबारियों की नजर अब प्रशासन के अगले फैसले पर टिकी हुई है।
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